क्या आपके पितृ हैं रुष्ट? नाराज पितरों को मनाने का सुनहरा अवसर, इस दिन करें पिंडदान

सोमवती अमावस्या से ठीक एक दिन पहले 14 जून को पितृ कार्येषु अमावस्या पड़ रही है, जिसे नाराज पितरों को प्रसन्न करने और पितृ दोष की शांति के लिए सर्वश्रेष्ठ तिथि बताया गया है।

अगर आपको ऐसा महसूस होता है कि आपके पितृ नाराज हैं और बार-बार आपको अजीब या परेशान करने वाले सपने आते हैं, तो उन्हें मनाने का यह बेहद उपयुक्त समय आ रहा है। इस वर्ष सोमवती अमावस्या से ठीक एक दिन पहले पितृ कार्येषु अमावस्या पड़ रही है, जिसे रुष्ट पितरों को प्रसन्न करने के लिए सबसे श्रेष्ठ तिथि माना गया है।

साल में कई तिथियां पितरों को समर्पित

नाराज पितरों को मनाने के लिए वर्ष भर में कई विशेष तिथियां आती हैं। इन तिथियों पर पितरों के निमित्त कोई भी धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ अथवा जप-तप किया जाए तो रुष्ट पितृ प्रसन्न हो जाते हैं। इसी तरह मलमास यानी अधिक मास में मांगलिक या शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है, परंतु भगवान विष्णु को प्रिय इस मास में पूजा-पाठ का विशेष महत्व बताया गया है।

संयोगवश संवत 2083 के ज्येष्ठ मास में अधिक मास की अमावस्या सोमवार के दिन पड़ रही है। इसी सोमवती अमावस्या से ठीक एक दिन पहले पितृ कार्येषु अमावस्या आएगी, जो नाराज पितरों को मनाने के लिए सर्वश्रेष्ठ तिथि कही गई है।

पितृ दोष के संकेत

हरिद्वार (उत्तराखंड) के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि संवत में आने वाली कुछ तिथियां अत्यंत खास होती हैं। अधिक मास की अमावस्या 15 जून सोमवार को होने के कारण साधकों को इसका विशेष लाभ मिलेगा। वहीं सोमवती अमावस्या से एक दिन पूर्व, यानी 14 जून को पितृ कार्येषु अमावस्या आएगी, जो नाराज पितरों को मनाने और पितृ दोष की शांति के लिए उपयुक्त मानी गई है।

उनके अनुसार पितरों के नाराज होने पर कार्यों में निरंतर बाधाएं बनी रहती हैं। बनते-बनते काम बिगड़ जाना, तरक्की में रुकावट आना, बुरे सपने आना, सपने में सांप दिखना अथवा सपने में पितरों की छवि दिखाई देना—ये सभी पितृ दोष के संकेत माने जाते हैं।

नाराज पितरों को ऐसे करें प्रसन्न

पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि शास्त्रों में पितृ कार्येषु अमावस्या का विशेष महत्व वर्णित है। 14 जून को पड़ने वाली इस अमावस्या पर यदि नाराज पितरों को मनाने के लिए उनका पिंडदान, तर्पण, पितृ गायत्री का पाठ, तिलांजलि, जलांजलि तथा पितरों की शांति हेतु हवन और जप-तप किया जाए, तो रुष्ट पितृ प्रसन्न होकर अपने धाम लौट जाते हैं।

दोपहर 3 बजे से पहले करें कार्य

ज्योतिषी आगे बताते हैं कि पितरों के निमित्त पिंडदान आदि सभी कार्य 14 जून की दोपहर 3:00 बजे से पूर्व करने पर ही लाभ मिलता है। इन कार्यों के बाद अपने सामर्थ्य के अनुसार पितरों को प्रिय वस्तुओं का दान करने से अटके हुए सभी कार्यों में तेजी आती है और तरक्की के द्वार खुल जाते हैं।

https://hindi.news18.com/news/dharm/pitru-dosh-nivaran-on-somvati-amavasya-perform-pind-daan-and-pitru-puja-local18-10551129.html