एआई के निवेश पर अर्थशास्त्री की चेतावनी
दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर नजर रखने वाली दिग्गज अर्थशास्त्री और आईएमएफ की पूर्व प्रमुख गीता गोपीनाथ ने एक गंभीर चिंता जाहिर की है। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI में किए जा रहे अंधाधुंध निवेश को लेकर सचेत किया है। गोपीनाथ का मानना है कि जिस स्तर पर कंपनियां पैसा झोंक रही हैं, उसे देखते हुए निवेश पर मिलने वाला रिटर्न उम्मीदों के मुताबिक रहने की संभावना कम है। यह स्थिति 1 ट्रिलियन डॉलर के निवेश पर बड़ा जोखिम खड़ा कर रही है। यदि यह जोखिम बढ़ता है, तो अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट देखी जा सकती है और देश की आर्थिक विकास दर शून्य से नीचे जा सकती है, जो सीधे तौर पर मंदी का संकेत है।
मुनाफे पर संशय और बाजार करेक्शन
गोपीनाथ के अनुसार, वर्तमान में AI निवेश का सबसे आकर्षक क्षेत्र बना हुआ है। कंपनियां इसके बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भारी-भरकम पूंजी लगा रही हैं। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या ये कंपनियां अपनी लागत वसूलने में सफल हो पाएंगी। लागत कम करने के लिए कुछ कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी का रास्ता भी अपनाया है, लेकिन यह समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर गोपीनाथ का स्पष्ट मानना है कि बाजार में एक बड़ा करेक्शन यानी सुधार आने की पूरी संभावना है। हालांकि उन्होंने समय सीमा नहीं बताई, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि निवेशकों का डर और कम रिटर्न का दबाव अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल सकता है।
ग्लोबल ग्रोथ और भू-राजनीतिक चुनौतियां
गोपीनाथ ने वैश्विक विकास के दो विपरीत पहलुओं पर प्रकाश डाला है। एक तरफ AI में बढ़ता निवेश विकास को रफ्तार दे रहा है, तो दूसरी तरफ भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध इसे धीमा बना रहे हैं। इन विपरीत परिस्थितियों के चलते वैश्विक आर्थिक विकास के अनुमान और आर्थिक झटके एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए हैं। उनका कहना है कि आज की दुनिया पूरी तरह से बदल गई है। अगर केवल आंकड़ों पर ध्यान दें, तो स्थिति सामान्य लग सकती है, लेकिन यदि गहराई में जाकर देखें, तो दुनिया भर में बड़े बदलाव हो रहे हैं। विशेषकर उन देशों की आपूर्ति श्रृंखला यानी सप्लाई चेन में बदलाव ज्यादा स्पष्ट है जो AI तकनीक से गहराई से जुड़े हैं।
ताइवान और कोरिया की स्थिति
AI की मांग का असर अलग-अलग देशों पर अलग तरह से पड़ रहा है। गोपीवान के विश्लेषण के मुताबिक, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की ग्रोथ रेट सामान्य से दोगुनी हो गई है। ताइवान की सरकारी एजेंसी ने तो AI की बढ़ती मांग को देखते हुए अपने विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 11 फीसदी कर दिया है, जो साल 1987 के बाद का उच्चतम स्तर है। इसके विपरीत, खाड़ी देशों को युद्ध के चलते अपनी विकास दर के अनुमानों में कटौती करनी पड़ रही है। अमेरिका फिलहाल उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन वहां का मुख्य जोखिम AI में फंसा भारी निवेश और निवेशकों के मन में व्याप्त आशंकाएं हैं।
अमेरिका क्यों है मंदी के निशाने पर
गोपीनाथ ने विस्तार से बताया कि कैसे AI का सुस्त रिटर्न अमेरिका के लिए खतरा बन सकता है। साल 2026 में जिन कंपनियों ने 1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश किया है, अब उनके रेवेन्यू और मुनाफे को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसका सीधा उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एनविडिया ने जो AI लैब्स में निवेश किया है, वह उसके चिप बाजार को सपोर्ट करता है। यदि इन लैब्स के रिटर्न में गिरावट आती है, तो चिप का कारोबार भी प्रभावित होगा। यह चेन रिएक्शन अन्य तकनीकी कंपनियों को भी अपनी चपेट में लेगा। यदि बाजार का यह दबाव बढ़ता है, तो अर्थव्यवस्था की रफ्तार शून्य या उससे नीचे चली जाएगी, जो मंदी की शुरुआत का पुख्ता प्रमाण होगा।
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