दिवाली पर जरूर करें प्रभु श्रीराम की स्तुति, भक्तिभाव से पढ़िए भगवान राम की संपूर्ण आरती

दिवाली के पावन पर्व पर अयोध्यापति श्रीराम की आराधना का विशेष महत्व है। इस लेख में आप भगवान राम की प्रसिद्ध आरतियों का संपूर्ण पाठ पढ़ सकते हैं।

दिवाली और प्रभु श्रीराम का संबंध

दिवाली का पर्व मुख्य रूप से भगवान श्रीराम के 14 वर्ष का लंबा वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब प्रभु राम अपने गृह नगर वापस लौटे, तो अयोध्या के निवासियों ने पूरी नगरी को दीपों की रोशनी से जगमगाकर उनका भव्य स्वागत किया था। मर्यादा पुरुषोत्तम राम को भगवान विष्णु का साक्षात अवतार माना गया है। दिवाली के शुभ अवसर पर विधि-विधान से पूजा के साथ प्रभु श्रीराम की आरती करना भक्तों के लिए अत्यधिक कल्याणकारी और मन को शांति प्रदान करने वाला होता है। इस विशेष अवसर पर हम आपके लिए भगवान श्रीराम की उन आरतियों का संग्रह लाए हैं, जिनका गायन आपको पूजन के समय अवश्य करना चाहिए।

पहली आरती: श्री रघुवर जी की आरती

आरती कीजै श्री रघुवर जी की, सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥ दशरथ तनय कौशल्या नन्दन, सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन॥ अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन, मर्यादा पुरुषोत्तम वर की॥ निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि, सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि॥ हरण शोक-भय दायक नव निधि, माया रहित दिव्य नर वर की॥ जानकी पति सुर अधिपति जगपति, अखिल लोक पालक त्रिलोक गति॥ विश्व वन्द्य अवन्ह अमित गति, एक मात्र गति सचराचर की॥ शरणागत वत्सल व्रतधारी, भक्त कल्प तरुवर असुरारी॥ नाम लेत जग पावनकारी, वानर सखा दीन दुख हर की॥

दूसरी आरती: श्री राम चंद्र कृपालु भजमन

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्॥ कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्। पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्॥ भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्। रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्॥ सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं। आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं॥ इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्। मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्॥

स्तुति छंद और सोरठा

छंद: मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों। करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो। एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली। तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली॥

सोरठा: जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि। मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे॥

आप इन पवित्र आरतियों के पाठ को दिवाली के पूजन के दौरान उपयोग कर सकते हैं और राम जी की भक्ति में स्वयं को लीन कर सकते हैं। आप भगवान राम की आरती का पीडीएफ भी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

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