चावल की कीमतों में बढ़ोतरी की आहट
चीनी के बाद अब आम आदमी की रसोई पर चावल की कीमतों का असर पड़ सकता है। देश में चावल के उत्पादन को लेकर बढ़ती चिंताएं सरकार के लिए चुनौती बन गई हैं। यही कारण है कि सरकार अब खाद्यान्न की खुदरा कीमतों को काबू में रखने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गई है। हाल ही में चावल से एथनॉल बनाने की सीमा निर्धारित करने के बाद, अब सरकार ने खुले बाजार में बड़े पैमाने पर चावल उतारने का बड़ा फैसला लिया है ताकि उपभोक्ताओं पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ न पड़े।
ओपन मार्केट में चावल की आपूर्ति को किया गया दोगुना
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, चालू वित्तवर्ष के दौरान बाजार में दोगुना चावल उपलब्ध कराया जाएगा। पहले की योजना के तहत वित्तवर्ष 2026-27 में निजी कारोबारियों के माध्यम से लगभग 25 लाख टन चावल बेचने का लक्ष्य तय किया गया था। लेकिन, स्थितियों को देखते हुए अब इस लक्ष्य को बढ़ाकर दोगुना यानी 50 लाख टन कर दिया गया है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले 10 साल में यह पहला मौका है जब देश में चावल के उत्पादन में कमी देखी जा रही है।
फसल खराबी और उत्पादन में गिरावट के कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट पिछले 20 साल की सबसे बड़ी कमी हो सकती है। इसका मुख्य कारण फसल पकने के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में हुई सामान्य से अधिक बारिश को माना जा रहा है, जिससे तैयार फसल को काफी नुकसान पहुँचा है। ऐसी आशंका है कि इसका सीधा असर आने वाले समय में चावल के खुदरा बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। इस स्थिति से उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए सरकार भारतीय खाद्य निगम यानी FCI के भंडारों से चावल निकालकर बाजार में उतारने की कवायद में जुटी है।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सरकार की लगाम
सरकार ने चावल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पहले ही कई सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं। विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्यों में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 31 जनवरी, 2027 तक चावल और धान पर स्टॉक सीमा लगाने का आदेश जारी कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य जमाखोरी और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत निजी खरीदारों को इस वर्ष अब तक 25 लाख मीट्रिक टन चावल बेचा जा चुका है, जो पिछले वित्तवर्ष की समान अवधि में बेचे गए 11 लाख मीट्रिक टन से काफी अधिक है।
मानसून की मार और उत्पादन का भविष्य
भारत वैश्विक स्तर पर चावल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है। हालांकि, इस साल मानसून की बारिश सामान्य से 13 फीसदी कम रही, जिसने चावल की खेती को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया है। ऊपर से फसल कटाई के समय हुई बेमौसम बारिश ने उत्पादकता को और अधिक नुकसान पहुँचाया है। इन सभी कारकों को देखते हुए सरकार अब आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने और जमाखोरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है, ताकि आम जनता को चावल की कीमतों में होने वाली बेतहाशा वृद्धि से बचाया जा सके।
https://hindi.news18.com/news/business/latest-government-doubles-rice-sales-target-to-50-lakh-tons-as-price-concern-due-to-production-down-10971408.html