इमरजेंसी और इंदिरा गांधी के फैसले पर सोनिया गांधी की टिप्पणी
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 1975-77 के दौरान देश में लागू की गई इमरजेंसी को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। समाचार पत्र द हिंदू को दिए इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट तौर पर स्वीकार किया कि उस कालखंड में नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाया गया था और हैबियस कॉर्पस के अधिकार को निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी कार्रवाई संवैधानिक तरीके से ही अंजाम दी गई थी।
अशांति के माहौल में हालात संभालने की थी कोशिश
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का पक्ष रखते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि उस समय पूरे देश में व्यापक अशांति, आगजनी और हिंसक प्रदर्शनों की स्थिति बनी हुई थी। ऐसी विषम परिस्थितियों के बीच इंदिरा गांधी देश के हालात को नियंत्रित करने और स्थिति को संभालने का प्रयास कर रही थीं।
इमरजेंसी की ज्यादतियों पर जताया था अफसोस
सोनिया गांधी ने यह भी याद दिलाया कि इमरजेंसी की अवधि में जो भी ज्यादतियां और गड़बड़ियां हुईं, उन पर इंदिरा गांधी ने बाद में गहरा अफसोस प्रकट किया था। इसके साथ ही उन्होंने उन घटनाओं के लिए देश से माफी भी मांगी थी।
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