हैदराबाद में अनूठा प्रयोग: घर की छत बनी 'वॉटर बैंक', अब बूंद-बूंद पानी होगा सुरक्षित

हैदराबाद के निवासी राघवेंद्र ने अपने घर की छत पर आधुनिक रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित कर जल संरक्षण की एक शानदार मिसाल पेश की है। यह नवाचार न केवल पानी को बचाने में सक्षम है, बल्कि भूजल स्तर को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

बढ़ते जल संकट के बीच उम्मीद की किरण

आज के दौर में गर्मियों के दौरान गहराता जल संकट और लगातार गिरता भूजल स्तर शहरी क्षेत्रों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। जहां एक तरफ अधिकांश लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं हैदराबाद के रहने वाले राघवेंद्र ने एक प्रेरणादायक पहल की है। उन्होंने अपने निजी आवास को एक आधुनिक 'वॉटर बैंक' के रूप में तब्दील कर दिया है। उन्होंने अपने घर की छत पर रेनवाटर हार्वेस्टिंग का एक ऐसा उन्नत तंत्र विकसित किया है, जिससे बारिश की हर बूंद का सदुपयोग सुनिश्चित हो रहा है और भूजल को रिचार्ज करने में भी मदद मिल रही है।

प्रोजेक्ट की शुरुआत और तकनीक

राघवेंद्र का घर कुल 170 वर्ग गज के क्षेत्र में निर्मित है। घर का निर्माण करते समय ही उन्होंने यह दृढ़ संकल्प लिया था कि उनकी छत पर गिरने वाला बारिश का पानी व्यर्थ बहकर नालियों में नहीं जाएगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने अपनी छत के ड्रेन पाइप से जुड़ा एक विशेष रूफटॉप फिल्टर सिस्टम स्थापित किया है। यह निस्पंदन प्रणाली दो चरणों में पानी को शुद्ध करने का काम करती है। प्रथम चरण में एक जाली का उपयोग किया जाता है, जो सूखे पत्तों, टहनियों और अन्य बड़े कचरे को पानी से अलग कर देती है। इसके बाद, दूसरे चरण में एक माइक्रो-फिल्टर लगाया गया है, जो पानी में मौजूद बारीक धूल और मिट्टी के कणों को पूरी तरह साफ कर देता है।

दोहरे संप मॉडल की अनूठी व्यवस्था

इस पूरे जल संरक्षण मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'दोहरा संप' (डबल संप) डिज़ाइन है। राघवेंद्र ने अपने परिसर में दो अलग-अलग टैंकों का निर्माण किया है। पहला टैंक 4 से 5 हजार लीटर की क्षमता का है, जिसका उपयोग बोरवेल के पानी और नगरपालिका की जलापूर्ति के सामान्य उपयोग के लिए किया जाता है। वहीं, दूसरा टैंक 2 से 3 हजार लीटर का है, जिसे विशेष रूप से छत से छनकर आने वाले शुद्ध बारिश के पानी को संचित करने के लिए बनाया गया है। राघवेंद्र का मानना है कि बारिश का यह पानी प्राकृतिक रूप से अत्यंत शुद्ध और न्यूट्रल होता है, जिसे बिना किसी संकोच के पीने और खाना बनाने जैसे कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

भूजल स्तर में सुधार का लक्ष्य

जल संरक्षण के इस अभियान में उन्होंने एक सोक पिट (सोखने वाला गड्ढा) भी तैयार किया है। फिल्टर होने के बाद यदि पानी बच जाता है, तो उसे सीधे इस पिट के जरिए जमीन के अंदर उतारा जाता है। यह प्रक्रिया घर के आसपास के लगभग एक किलोमीटर के दायरे में भूजल के स्तर को सुधारने और बढ़ाने में काफी सहायक साबित हो रही है। राघवेंद्र का कहना है कि जिस प्रकार हम भविष्य के लिए बैंकों में पैसे की बचत करते हैं, उसी प्रकार पानी को सहेजना भी हर जागरूक नागरिक की जिम्मेदारी होनी चाहिए। शहरी इलाकों में बढ़ते कंक्रीट के जंगलों के बीच उनका यह प्रयास जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने वाली एक बेहतरीन मिसाल है।

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