हिमाचल में अपराध का बढ़ता ग्राफ
देवभूमि के नाम से पहचाने जाने वाले हिमाचल प्रदेश में कानून व्यवस्था के दावे हकीकत से काफी दूर नजर आ रहे हैं। राज्य में अपराध का ग्राफ जिस तेजी से ऊपर जा रहा है, उसने पुलिस और सरकार दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में सामने आए पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 के शुरुआती 9 महीनों में, यानी 1 जनवरी 2026 से लेकर 30 सितंबर 2026 तक, राज्य भर के पुलिस थानों में हत्या, दुष्कर्म और अपहरण जैसे जघन्य अपराधों के सैकड़ों मामले दर्ज किए गए हैं।
अपराधों का विस्तृत ब्यौरा
हिमाचल पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस नौ महीने की अवधि में कुल 63 हत्याएं दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, हत्या के प्रयास के 80 मामले सामने आए हैं। महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है, क्योंकि इस दौरान दुष्कर्म के 279 मामले दर्ज हुए हैं। सबसे ज्यादा चिंताजनक आंकड़ा अपहरण का है, जो कि 833 तक पहुंच गया है। इन आंकड़ों को अगर हम समय के साथ जोड़कर देखें, तो स्थिति और भी गंभीर नजर आती है। राज्य में हर दिन औसतन दो से अधिक अपहरण के मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के 373 और उनके साथ क्रूरता के 117 मामले पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हुए हैं, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंता का गंभीर विषय है। अन्य अपराधों में आत्महत्या के लिए उकसाने के 46 मामले, ईव-टीजिंग के 137 और चेन स्नैचिंग के 10 मामले शामिल हैं।
अपराध का समय-वार विश्लेषण
पुलिस के डेटा का विश्लेषण करें तो 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 के बीच कुल 273 दिन यानी 6,552 घंटे बीत चुके हैं। यदि इन अपराधों को घंटों और मिनटों के औसत में विभाजित किया जाए, तो स्थिति की भयावहता का पता चलता है:
- हत्या के 63 मामले: औसतन हर 4 दिन, 8 घंटे और 34 मिनट में एक हत्या।
- हत्या का प्रयास के 80 मामले: औसतन हर 3 दिन, 9 घंटे और 54 मिनट में एक केस यानी हर 82 घंटे में एक घटना।
- दुष्कर्म के 279 मामले: औसतन हर 23 घंटे और 34 मिनट में एक मामला।
- अपहरण के 833 मामले: औसतन हर 7 घंटे और 52 मिनट में एक अपहरण।
- महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के 373 मामले: औसतन हर 17 घंटे और 33 मिनट में एक घटना।
- महिलाओं के प्रति क्रूरता के 117 मामले: औसतन हर 2 दिन, 8 घंटे और 18 मिनट में एक मामला।
- आत्महत्या के लिए उकसाने के 46 मामले: औसतन हर 5 दिन, 22 घंटे और 26 मिनट में एक केस।
- ईव-टीजिंग के 137 मामले: औसतन हर 47 घंटे और 49 मिनट में एक मामला।
- चेन स्नैचिंग के 10 मामले: औसतन हर 27 दिन और 7 घंटे में एक घटना।
- दहेज निषेध अधिनियम के तहत 4 मामले: औसतन हर 68 दिन और 6 घंटे में एक केस।
- अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम के तहत 12 मामले: औसतन हर 22 दिन और 18 घंटे में एक मामला।
महिलाओं की सुरक्षा पर उठते सवाल
सामने आए आंकड़ों में अपहरण के 833 मामले सबसे चौंकाने वाले हैं, जो सीधे तौर पर सुरक्षा तंत्र की विफलता की ओर इशारा करते हैं। दुष्कर्म के 279 मामलों का अर्थ है कि हर दिन लगभग एक से अधिक महिला इस घिनौने अपराध का शिकार हो रही है। छेड़छाड़ और ईव-टीजिंग की बढ़ती संख्या भी राज्य में महिलाओं के सुरक्षित होने के दावों को झूठा साबित कर रही है।
बीते वर्षों से तुलना
सुक्खू सरकार के कार्यकाल के दौरान अपराध के आंकड़ों का अवलोकन करें तो पिछले तीन सालों में भी स्थिति कमोबेश चुनौतीपूर्ण रही है। साल 2023 में 92, 2024 में 83 और 2025 में 84 हत्याएं दर्ज की गई थीं। हत्या के प्रयास के मामलों में 2023 में 75, 2024 में 75 और 2025 में 84 घटनाएं दर्ज हुईं। महिलाओं के खिलाफ अपराध की बात करें तो 2023 में रेप के 344, 2024 में 330 और 2025 में 397 केस दर्ज किए गए थे। अपहरण के मामले जो 2023 में 438 थे, 2024 में बढ़कर 490 और 2025 में 574 हो गए थे, जो 2026 के केवल 9 महीनों में ही उछलकर 833 पर पहुंच गए हैं। यह बढ़ोतरी राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति में गिरावट को दर्शाती है।
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