दोस्ती और व्यापार का बेहतरीन मेल
झारखंड के कोडरमा जिले में स्थित झुमरी तिलैया से एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहाँ दो दोस्तों ने अपनी पुरानी दोस्ती को एक ऊंचे मुकाम पर पहुँचाया है। विक्की केसरी और खालिद रिजवी नामक इन दो दोस्तों ने एवन बुक सेंटर नाम से एक ऐसा कारोबार खड़ा किया है, जो आज न केवल सफल है बल्कि तेजी से फल-फूल भी रहा है। इन दोनों की दोस्ती की नींव वर्ष 2005 में पड़ी थी, जब वे स्कूल में कक्षा 6 के छात्र थे। वक्त के साथ यह दोस्ती और भी मजबूत होती गई और आज यही तालमेल उनके बिजनेस की सफलता का मुख्य आधार बन गया है। महज 30 साल की उम्र में इन दोनों ने अपने काम को इतना विस्तार दिया है कि उनका सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।
स्कूल की पढ़ाई से व्यवसाय की शुरुआत
विक्की केसरी ने अपने सफर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि साल 2005 में उनकी मुलाकात खालिद रिजवी से हुई थी। उस समय दोनों सहपाठी थे और साथ पढ़ते हुए उनमें गहरी दोस्ती हो गई। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उनका साथ नहीं छूटा और उन्होंने कॉलेज स्तर तक साथ मिलकर शिक्षा ग्रहण की। साल 2016 में दोनों ने स्नातक की पढ़ाई पूरी की। विक्की का पारिवारिक बैकग्राउंड बिजनेस से जुड़ा था, उनके घर में बैग बनाने का काम होता था। पढ़ाई के साथ-साथ वह स्टेशन रोड स्थित अपनी दुकान पर भी बैठते थे, जिससे उन्हें ग्राहकों के साथ बातचीत करने और बाजार की जरूरतों को समझने का अमूल्य अनुभव प्राप्त हुआ। दूसरी ओर, खालिद रिजवी ने वर्ष 2015 में ही किताब सप्लाई के क्षेत्र में कदम रख दिया था। दोनों ने मिलकर फैसला किया कि वे अपने अनुभवों और रुचि को मिलाकर कुछ नया करेंगे।
साझेदारी की शुरुआत और कारोबार का विस्तार
वर्ष 2016 में स्नातक पूरा करने के तुरंत बाद, दोनों दोस्तों ने मिलकर किताब सप्लायर के तौर पर साझेदारी शुरू की। शुरुआती दौर में काम केवल कोडरमा जिले के कुछ स्थानीय स्कूलों तक सीमित था, लेकिन उनकी मेहनत और ईमानदारी के चलते काम का दायरा बढ़ता गया। आज एवन बुक सेंटर के माध्यम से वे कोडरमा के अलावा बरही, बरकट्ठा, रजौली और गिरिडीह जैसे इलाकों में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका कारोबार झारखंड के साथ-साथ बिहार के कई हिस्सों तक फैल चुका है। ये दोनों दोस्त प्ले ग्रुप से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए निजी प्रकाशकों की किताबें स्कूलों तक पहुँचाते हैं। आज उनका 50 लाख रुपये से अधिक का सालाना टर्नओवर उनकी व्यावसायिक समझ और निरंतर मेहनत की गवाही देता है।
काम का बंटवारा और कार्यकुशलता
विक्की और खालिद ने अपने कारोबार को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिम्मेदारियों का बंटवारा बखूबी किया है। हर साल अक्टूबर और नवंबर के महीने से ही वे अगले शैक्षणिक सत्र की तैयारियों में जुट जाते हैं। इस दौरान वे दिल्ली और मेरठ जैसे बड़े शहरों में स्थित पुस्तक प्रकाशकों के पास जाते हैं। वहाँ वे शिक्षा के बदलते दौर और स्कूलों की माँगों के अनुसार बेहतरीन गुणवत्ता वाली किताबों का चुनाव करते हैं। जब नया शैक्षणिक सत्र शुरू होता है, तो विक्की दुकान की व्यवस्था और लॉजिस्टिक की जिम्मेदारी संभालते हैं, जबकि खालिद फील्ड विजिट पर ध्यान देते हैं। वे विभिन्न स्कूलों में जाकर सीधे संपर्क करते हैं और किताबों के ऑर्डर लेते हैं। जिम्मेदारियों का यह स्पष्ट विभाजन उनके बिजनेस को बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ाने में मदद करता है।
सफलता की कुंजी: भरोसा और ईमानदारी
जब विक्की से उनकी पार्टनरशिप के लंबे समय तक चलने का राज पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि किसी भी साझेदारी का आधार आपसी विश्वास और स्पष्टता होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टनरशिप में पैसों का हिसाब हमेशा पारदर्शी होना चाहिए। इसी ईमानदारी के कारण सालों के काम के बावजूद उनके बीच कभी पैसों को लेकर विवाद नहीं हुआ। हालांकि, कामकाज की भागदौड़ और समय-सारणी को लेकर छोटी-मोटी बहस कभी-कभार होती है, लेकिन वे तुरंत आपसी सूझबूझ से उसे हल कर लेते हैं। उन्होंने यह भी सलाह दी कि बिजनेस में बाहर के लोगों द्वारा पैदा की गई गलतफहमियों से हमेशा बचकर रहना चाहिए। आपस में अटूट विश्वास ही उनकी पार्टनरशिप की सबसे बड़ी पूंजी है।
अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर
इन दो दोस्तों की यह पहल केवल उनके खुद के लिए ही नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी लाभकारी साबित हुई है। अपनी इस स्टार्टअप यात्रा में उन्होंने चार अन्य लोगों को भी अपने साथ काम पर रखा है। इस तरह, उनका सफल बिजनेस मॉडल अब दूसरों की आजीविका का जरिया भी बन चुका है। विक्की और खालिद की यह कहानी साबित करती है कि यदि सही नीयत और दृढ़ निश्चय के साथ काम किया जाए, तो छोटी उम्र में ही बड़े सपने सच किए जा सकते हैं।
https://hindi.news18.com/news/business/success-story-school-friendship-business-partnership-turns-into-50-lakh-enterprise-local18-ws-l-10961809.html