मेघालय की राजनीति में भारी हलचल
पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय के राजनीतिक गलियारे से एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के प्रमुख क्षेत्रीय दल यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के 12 में से 11 विधायकों ने अचानक पाला बदल लिया है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद राज्य में नए राजनीतिक समीकरण बनने लगे हैं।
बीजेपी और एनपीपी में बंटे बागी विधायक
यूडीपी से नाता तोड़ने वाले इन बागियों में से 8 विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। वहीं, बचे हुए 3 विधायक राज्य के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) में शामिल हो गए हैं। इस बड़े दलबदल ने मेघालय की विधानसभा स्थिति को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
विधानसभा में यूडीपी के पास बचा सिर्फ एक विधायक
इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद अब विधानसभा के भीतर यूडीपी के पास केवल 1 विधायक ही बचा है। पार्टी में अकेले बचे यह विधायक खुद यूडीपी के अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह हैं।
अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह का मंत्री पद से स्वैच्छिक इस्तीफा
पार्टी के 11 विधायकों के एक साथ बागी होकर चले जाने और उत्पन्न हुई नई राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यूडीपी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने मेघालय कैबिनेट के मंत्री पद से अपना स्वैच्छिक इस्तीफा दे दिया है।
ईसाई बहुल राज्य में किसे मिलेगा सबसे बड़ा फायदा?
रातोंरात हुए इस दलबदल के बाद ईसाई बहुल राज्य मेघालय में राजनीतिक गणित को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 8 नए विधायकों के जुड़ने से जहां बीजेपी को मजबूती मिली है, वहीं 3 विधायकों के आने से मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की एनपीपी का भी आधार बढ़ा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे तगड़ा राजनीतिक लाभ किस दल के खाते में जाता है।
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