सिम बाइंडिंग नियम का आम लोगों और कारोबार पर क्या असर होगा? नई रिपोर्ट में किए गए बड़े खुलासे

दूरसंचार विभाग के सिम बाइंडिंग आदेश को लेकर एक नई रिपोर्ट में चिंता जताई गई है, जिसमें कहा गया है कि यह नियम साइबर धोखाधड़ी रोकने के बजाय आम उपयोगकर्ताओं और छोटे व्यवसायों की परेशानी का कारण बन सकता है।

सिम बाइंडिंग के मायने और चुनौतियां

भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा प्रस्तावित सिम बाइंडिंग का नियम चर्चा में है। इस नियम का मूल उद्देश्य यह है कि जो मोबाइल नंबर किसी मैसेजिंग ऐप के साथ पंजीकृत है, उसी नंबर का सिम कार्ड उस विशिष्ट मोबाइल फोन में लगा होना चाहिए। इसका सरल अर्थ है कि ऐप का संचालन करने वाले व्यक्ति का उस सिम कार्ड पर सीधा नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए। हालांकि, इसका उद्देश्य सुरक्षा बढ़ाना और फर्जीवाड़े को नियंत्रित करना है, लेकिन एक हालिया रिपोर्ट में इस पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। एस्या सेंटर द्वारा प्रकाशित 'रीथिंकिंग इंडियाज सिम-बाइंडिंग मैनडेट: एन एम्पिरिकल असेसमेंट' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभावों का व्यापक विश्लेषण किया गया है।

शोध का दायरा और रिपोर्ट के निष्कर्ष

इस विस्तृत अध्ययन के लिए देश भर के 18 भारतीय शहरों से 2,033 मोबाइल उपभोक्ताओं का फीडबैक लिया गया है। इसके साथ ही 17 शहरों के 353 कारोबारियों को भी इस सर्वे में शामिल किया गया। रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि सिम बाइंडिंग से साइबर धोखाधड़ी पर लगाम लगाने की क्षमता काफी सीमित है। इसके विपरीत, सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए दैनिक जीवन में डिजिटल सेवाओं का उपयोग करना और छोटे एवं मझोले स्तर के व्यवसायों के लिए अपना कामकाज जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह नियम प्रभावी रूप से आम जनता की डिजिटल स्वतंत्रता को सीमित करने वाला साबित हो सकता है।

दूरसंचार विभाग का निर्देश

नवंबर 2025 में दूरसंचार विभाग ने इंटरनेट आधारित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए सिम बाइंडिंग अनिवार्य करने का फरमान जारी किया था। इसके पीछे मुख्य मंशा यह थी कि यूजर्स के खातों को उनके रजिस्टर्ड सिम से जोड़कर सुरक्षित रखा जाए। शुरुआती ड्राफ्ट में यह भी प्रावधान था कि वेब पर सक्रिय रहने वाले मैसेजिंग ऐप्स को हर 6 घंटे में अनिवार्य रूप से बंद कर दिया जाए, हालांकि बाद में इसे लचीला बनाते हुए जोखिम के आधार पर इसे लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके बावजूद, यह अनिवार्यता उपयोगकर्ताओं के लिए एक नई परेशानी का सबब बनती दिख रही है।

विदेश यात्रा करने वालों के लिए बड़ा संकट

सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि जो भारतीय नागरिक अक्सर विदेश यात्रा करते हैं, उन पर इसका असर सबसे अधिक होगा। शोध में शामिल केवल 33 फीसदी लोगों ने ही पुष्टि की कि वे विदेश में अपने भारतीय सिम पर रोमिंग सेवाओं का उपयोग करते हैं। इसके विपरीत, 67.1 फीसदी यात्री स्थानीय सिम कार्ड का उपयोग करना, केवल वाई-फाई पर निर्भर रहना या दूसरे सिम कार्ड का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। ऐसी स्थिति में, यदि मुख्य भारतीय सिम कार्ड फोन से हटता है या उसे बंद किया जाता है, तो मैसेजिंग ऐप्स काम करना बंद कर देंगे। सर्वे में शामिल 98.88 फीसदी लोगों ने स्पष्ट कहा कि मुख्य सिम बंद होने से संचार सेवाएं बाधित होने पर उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। कई लोगों ने यह भी चिंता व्यक्त की कि आपातकालीन स्थिति में वे इंटरनेट के जरिए कॉल करने में भी असमर्थ हो जाएंगे।

बार-बार लॉग-आउट होने की समस्या

सिम बाइंडिंग के नियम से डिजिटल सुरक्षा और उपयोगिता के बीच एक संघर्ष पैदा हो गया है। सर्वे के अनुसार, 97.7 फीसदी लोगों का मानना है कि यदि वे किसी दूसरे उपकरण पर अपना ऐप इस्तेमाल करते हैं और वह बार-बार लॉग-आउट होता है, तो यह उनके लिए बेहद कष्टदायक होगा। इसके अलावा, 97 फीसदी उपयोगकर्ताओं ने माना कि यात्रा के दौरान लगातार भारतीय सिम के जरिए बार-बार लॉगिन करना व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन कार्य है।

कारोबारी जगत पर असर

छोटे और मझोले व्यवसायों पर सिम बाइंडिंग की मार सबसे अधिक पड़ेगी। सर्वे में शामिल 78 फीसदी कारोबारियों का मानना है कि इस प्रकार की पाबंदी से उनके काम पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ेगा। 83.5 फीसदी व्यापारियों ने आशंका जताई है कि इससे काम में गलतियां बढ़ेंगी और समय पर कार्य पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। करीब 82 फीसदी कारोबारियों का कहना है कि बार-बार लॉग-आउट होने की स्थिति में जानकारी साझा करने में बाधा आएगी, जिससे रोजमर्रा का कामकाज प्रभावित होगा।

उपभोक्ताओं के संभावित विकल्प

इस नियम के लागू होने के बाद उपयोगकर्ताओं के व्यवहार में भी बदलाव आ सकता है। रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि अपनी सुविधा को बरकरार रखने के लिए लगभग 41 फीसदी लोग एक अतिरिक्त सिम कार्ड खरीदने पर विचार करेंगे, जबकि 30.3 फीसदी लोग इस समस्या से बचने के लिए एक नया मोबाइल फोन खरीदने की संभावना तलाशेंगे। कुल मिलाकर, यह नियम डिजिटल सुरक्षा के दावों के बीच आम आदमी की जेब और उनकी कार्यक्षमता पर भारी दबाव डालने वाला साबित हो सकता है।

https://hindi.news18.com/news/business/latest-sim-binding-rule-will-effect-on-mobile-users-and-businesses-new-report-revealed-10956405.html