करियर में सही दिशा का चुनाव और ज्योतिष
जीवन में करियर की ऊंचाई छूने के लिए हर कोई जी-तोड़ मेहनत करता है। बावजूद इसके, कई बार तमाम कोशिशों के बाद भी मनचाहे परिणाम हाथ नहीं लगते। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि असफलता का एक बड़ा कारण करियर के लिए गलत भौगोलिक स्थान का चुनाव हो सकता है। हमारी जन्म कुंडली इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि हमारी उन्नति जन्मस्थान के पास रहने में निहित है या फिर हमें अपनी तरक्की के लिए घर से दूर जाना होगा। आइए समझते हैं कि कुंडली के किन ग्रहों के योग आपकी दिशा तय करते हैं।
घर से दूर जाने पर कब मिलती है अपार सफलता
ज्योतिष में कुछ विशेष ग्रह स्थितियां ऐसी होती हैं जो व्यक्ति को अपनी जन्मभूमि से दूर ले जाकर ही नई पहचान दिलाती हैं। इनमें से प्रमुख संकेत निम्नलिखित हैं:
- कुंडली का द्वादश भाव यात्रा और विदेश का कारक माना जाता है। यदि आपके दसवें भाव (कर्म स्थान) और द्वादश भाव के स्वामी आपस में संबंध बना रहे हों या एक साथ बैठे हों, तो यह स्पष्ट इशारा है कि आपको घर से दूर जाकर ही करियर में कामयाबी मिलेगी।
- यदि नवम भाव (भाग्य स्थान) का स्वामी और द्वादश भाव का स्वामी युति में हों, तो आपका भाग्य आपके जन्मस्थान से दूर जाकर ही चमकने की संभावना अधिक होती है।
- जब कुंडली का द्वादश भाव शक्तिशाली हो और इसके स्वामी की स्थिति मजबूत हो, जबकि चतुर्थ भाव या उसका स्वामी कमजोर पड़ रहा हो, तो विदेश या दूरस्थ स्थानों पर करियर बनाना अधिक फलदायी होता है।
- कुंडली के दसवें भाव में यदि मेष, कर्क, तुला या मकर जैसी चर राशियां मौजूद हों, तो व्यक्ति के स्वभाव में स्थिरता की कमी होती है। ऐसे जातकों को अक्सर घर से दूर जाकर ही पेशेवर स्थिरता मिलती है।
जन्मस्थान के पास ही क्यों है आपकी तरक्की
कई बार सितारे व्यक्ति को अपनी जड़ों के पास रहकर ही नाम और शोहरत दिलाने का संकेत देते हैं। इसकी गणना इन आधारों पर की जाती है:
- कुंडली में चतुर्थ भाव सुख का स्थान होता है। यदि यह भाव बेहद मजबूत स्थिति में हो, तो व्यक्ति को अपने घर के आसपास रहकर ही करियर में बड़ी सफलता मिलती है। इसके अलावा, यदि चतुर्थ भाव पर गुरु या शुक्र जैसे शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो जन्मस्थान के पास कार्य करना ही सबसे उत्तम रहता है।
- यदि आपकी कुंडली के प्रथम भाव या दशम भाव में वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ जैसी स्थिर राशियां विराजमान हैं, तो आपको घर के पास रहने से करियर में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त होती है। ऐसे लोग अक्सर अपना खुद का व्यापार शुरू करके भी खूब नाम कमाते हैं।
- जब कुंडली के चतुर्थ भाव (सुख स्थान) और दशम भाव (कर्म स्थान) के स्वामी आपस में कोई भी संबंध या युति बनाते हैं, तो यह योग व्यक्ति को अपने जन्मस्थान पर ही मान-सम्मान और उन्नति दिलाने में सक्षम होता है।
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