सीकर के रायपुरा की अनूठी दास्तान, सात पीढ़ियों तक रहा ब्राह्मणों का दबदबा, उजड़ने के बाद फिर से आबाद हुआ गांव

सीकर जिले के पलसाना ब्लॉक का रायपुरा गांव करीब 400 साल पुराना ऐतिहासिक गांव है, जिसकी बसावट दो बार हुई। पहले यहां ब्राह्मण समाज का प्रभाव रहा और बाद में संवत 1817 में राजपूतों व जाट समाज के सहयोग से इसे दोबारा बसाया गया।

सीकर जिले के पलसाना ब्लॉक में बसा रायपुरा गांव अपने आप में इतिहास का एक जीवंत पन्ना है। तकरीबन 400 साल पुराना यह गांव अपनी स्थापना के समय से लेकर आज तक सामाजिक एकजुटता और परंपराओं की मजबूत पहचान के लिए जाना जाता है। यहां की मिट्टी में सहयोग और भाईचारे की वह भावना रची-बसी है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती चली आई है।

दो बार बसा यह गांव

ग्रामीणों का कहना है कि रायपुरा की बसावट एक नहीं बल्कि दो बार हुई, और यही बात इसके इतिहास को और अधिक रोचक बना देती है। एक बार उजड़ने के बाद दोबारा आबाद होना अपने आप में इस गांव की जिजीविषा और लोगों की आपसी एकता को दर्शाता है।

पहली बसावट और ब्राह्मण समाज का प्रभाव

गांव की पहली नींव धोद क्षेत्र के पुरोहित गौत्र ब्राह्मण रायसल पुरोहित ने रखी थी। लंबे समय तक यहां ब्राह्मण समाज का प्रभाव बना रहा और सात पीढ़ियों तक इसी समाज का शासन कायम रहा। यह दौर गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को आकार देने वाला रहा।

प्राकृतिक आपदा और पुनर्निर्माण

समय के साथ एक प्राकृतिक आपदा ने गांव को उजाड़ दिया और कभी आबाद रहा यह स्थान वीरान हो गया। लेकिन यह सूनापन ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सका। इसके बाद संवत 1817 में राजपूतों और जाट समाज के सहयोग से रायपुरा को फिर से बसाया गया। दोबारा बसने के बाद गांव ने नई ऊर्जा के साथ अपनी पुरानी परंपराओं और एकजुटता को बरकरार रखा।

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