पीएम मोदी के खिलाफ राहुल गांधी की सियासी चालें, क्या वाकई बदल रहा है विपक्ष का मिजाज?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया राजनीतिक दांव और बीजेपी के पलटवार के बीच दिल्ली की सियासत गरमा गई है। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के हलफनामे और कांग्रेस अध्यक्ष के बयानों पर मचे बवाल के बीच विपक्ष के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।

सड़क से संसद तक राहुल गांधी की नई रणनीति

इस समय देश की राजनीति में एक बेहद दिलचस्प दौर चल रहा है। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने 1 नवंबर को लेकर दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन की बड़ी तैयारी की है। राहुल गांधी सड़क पर जनसुनवाई करने से लेकर अपने घर में संसद चलाने जैसी प्रतीकात्मक गतिविधियों के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस का लक्ष्य दिल्ली की सड़कों पर लाखों लोगों को इकट्ठा करना है, लेकिन इस उत्साह के बीच पार्टी को लगातार झटकों का सामना भी करना पड़ रहा है।

बीजेपी का आक्रामक पलटवार और नया कैंपेन

जिस तरह से राहुल गांधी ने अतीत में चौकीदार को लेकर बयान दिया था और बीजेपी ने उसे 'मैं भी चौकीदार' कैंपेन के रूप में बदलकर पूरे नैरेटिव को पलट दिया था, वैसा ही कुछ इस बार भी देखने को मिल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री मोदी पर दिए गए विवादित बयान को बीजेपी ने हथियार बना लिया है। भारतीय जनता पार्टी ने खरगे के बयान को आधार बनाकर एक नया कैंपेन लॉन्च किया है, जिसे 2029 के आम चुनाव के नारे के रूप में देखा जा रहा है। बीजेपी इस मामले में फ्रंट फुट पर आकर पूरी तरह से आक्रामक खेल रही है, जिससे कांग्रेस रक्षात्मक मुद्रा में नजर आ रही है।

सहयोगी दलों की नाराजगी

मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर न केवल बीजेपी हमलावर है, बल्कि कांग्रेस के अपने सहयोगी दल भी उनसे दूरी बनाते हुए दिख रहे हैं। विपक्षी गठबंधन के भीतर से ही नेताओं को संयम बरतने की नसीहत दी जा रही है। समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने खुलकर असहमति जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के पिता के खिलाफ की गई टिप्पणी से वे बिल्कुल सहमत नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि राजनीति में भाषा की मर्यादा बनाए रखना बेहद जरूरी है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने चिंता जताई कि भारतीय राजनीति का स्तर लगातार गिर रहा है और शीर्ष नेताओं द्वारा इस्तेमाल की जा रही भाषा माहौल को जहरीला बना रही है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हो रहा है

एक तरफ सड़कों पर सियासी प्रदर्शन की तैयारी है, तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में चुनावी प्रक्रिया को लेकर बड़ी कानूनी लड़ाई चल रही है। कांग्रेस और विपक्षी दलों का 'वोट चोरी' वाला नैरेटिव सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के हलफनामे के बाद सवालों के घेरे में है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट रूप से अदालत को बताया है कि SIR और फॉर्म 6 से जुड़े फैसले आपसी सहमति से लिए गए थे। हालांकि, विपक्ष अभी भी इसमें विवाद खोजने की कोशिश में लगा है।

अभिषेक मनु सिंघवी की मांग

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इंडी गठबंधन का पक्ष रखते हुए अदालत से एक विशेष मांग की है। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि वह चुनाव आयोग को चुनाव से जुड़ी सभी फाइल नोटिंग्स और इंटरनल कम्युनिकेशन को सुरक्षित रखने का निर्देश दे। विपक्ष का मानना है कि इन दस्तावेजों से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आयोग के फैसले एकतरफा थे या फिर उनमें सच में आम सहमति शामिल थी। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि 10 दिन के भीतर दूध का दूध और पानी का पानी किस तरह होता है।

  • कांग्रेस का 1 नवंबर का बड़ा दिल्ली प्लान।
  • खरगे के बयान पर बीजेपी का नया चुनावी कैंपेन।
  • सहयोगी दलों द्वारा भाषा पर संयम की चेतावनी।
  • चुनाव आयोग का हलफनामा और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई।

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