दिल्ली में 3.93 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़: पुलिस ने 7 को दबोचा, हवाला और क्रिप्टोकरेंसी लिंक की जांच

दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ इकाई ने 3.93 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपी ठगी की रकम को म्यूल खातों के जरिए घुमाकर हवाला और यूएसडीटी के माध्यम से ठिकाने लगाते थे।

साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 3.93 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि ठगी की गई भारी रकम को सीधे एक खाते में रखने के बजाय उसे कई बैंक खातों में भेजा जाता था। इसके बाद नकदी निकालकर उसे आगे के नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था। जांच में इस गिरोह के तार विदेशी मनी एक्सचेंज ऐप और हवाला के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी USDT खरीदने से जुड़े पाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी दिल्ली पुलिस की उत्तर-पश्चिम जिला साइबर सेल ने 7.36 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया था, जिसमें बैंक मैनेजर समेत 6 लोग पकड़े गए थे।

भारी मात्रा में सामग्री बरामद

पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। इनमें 45 चेकबुक, 25 बैंक पासबुक, 45 एटीएम कार्ड और 13 मोबाइल फोन शामिल हैं। फिलहाल पुलिस इन बरामद मोबाइल फोन और बैंक दस्तावेजों का गहन विश्लेषण कर रही है, ताकि इस पूरे संगठित अपराध में शामिल अन्य लोगों और उनके तौर तरीकों का पता लगाया जा सके।

149 बार में उड़ाए पैसे

इस पूरे मामले की शिकायत दिल्ली निवासी प्रिंस बंसल ने दर्ज कराई थी। बंसल एनबीएफसी और लोन से जुड़े कारोबार करते हैं। उनकी शिकायत के अनुसार, 5 अक्टूबर 2026 को उनके आईसीआईसीआई बैंक खाते से बिना उनकी जानकारी और सहमति के कुल 149 ट्रांजेक्शन किए गए। इन अवैध लेनदेन के जरिए उनके खाते से 3 करोड़ 93 लाख 59 हजार रुपये उड़ा लिए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल सेल की आईएफएसओ पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके अलावा, साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की गई, जिस पर कार्रवाई करते हुए करीब 1.78 करोड़ रुपये की राशि को होल्ड पर रखने में सफलता मिली।

राजस्थान में सात दिन तक तलाशी

मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए दिल्ली पुलिस की टीम ने राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर और आसपास के इलाकों में 7 दिनों तक डेरा जमाया। पुलिस ने उन बैंक खातों की ट्रेल खंगाली जिनमें ठगी की रकम का आदान-प्रदान हुआ था। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने बीकानेर निवासी पीयूष तलानिया और विपिन चंवरिया समेत कुल 7 आरोपियों को दबोच लिया। अन्य गिरफ्तार आरोपियों में बृज लाल, सुनील, विक्रम, राकेश और हेमंत सिंह शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन सभी की भूमिका बैंक खातों के दुरुपयोग, रकम की निकासी और उसे आगे पहुंचाने में अलग-अलग थी।

म्यूल अकाउंट्स के जरिए धोखाधड़ी

पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी साइबर अपराधियों की शब्दावली में 'म्यूल अकाउंट्स' का इस्तेमाल कर रहे थे। इन खातों के जरिए रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर घुमाया जाता था ताकि जांच एजेंसियों के लिए पैसों का स्रोत और अंतिम ठिकाना ढूंढना मुश्किल हो जाए। पीयूष तलानिया के बैंक खाते से 9.50 लाख रुपये निकाले गए, जो कथित तौर पर बृज लाल को दिए गए थे। वहीं, विपिन चंवरिया ने कबूल किया कि उसने 12 अक्टूबर को बृज लाल के निर्देश पर 7 लाख रुपये निकाले थे। इस पूरे नेटवर्क में बृज लाल की भूमिका मास्टरमाइंड जैसी लग रही है।

विदेशी ऐप और हवाला कनेक्शन

पूछताछ के दौरान बृज लाल ने 'यू होम' नामक एक विदेशी मनी एक्सचेंज ऐप पर अपना वॉलेट आईडी होने की जानकारी दी। जांच में उसके विदेशी साइबर नेटवर्क के साथ संपर्क और हवाला के माध्यम से रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने के संबंध सामने आए हैं। पुलिस को संदेह है कि बैंक खातों से नकदी निकालने के बाद उसे हवाला ऑपरेटरों को सौंपा जाता था, जो इसे USDT में तब्दील कर देते थे। बृज लाल ने यह भी बताया कि हवाला ऑपरेटर के कहने पर नकदी को खन्ना में एक अज्ञात व्यक्ति को सुपुर्द किया गया था। अब पुलिस उस व्यक्ति की तलाश कर रही है।

पुराने मामलों में भी बृज लाल का रिकॉर्ड

गिरफ्तार आरोपी बृज लाल का इतिहास भी दागी रहा है। वह दिल्ली में पहले से दर्ज 95 लाख रुपये की एक अन्य साइबर ठगी के मामले में भी वांछित था। उसके खिलाफ बीएनएसएस की धारा 84 के तहत अदालत में कानूनी कार्यवाही लंबित है। दिल्ली पुलिस अब दोनों घटनाओं के बीच कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। बरामद डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच के जरिए नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है और पुलिस का कहना है कि जांच का दायरा अभी और बढ़ने की संभावना है।

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