इंडोनेशिया का दम घुट रहा है: AQI 1000 के पार, लोगों को ऑक्सीजन के लिए बस का सहारा

इंडोनेशिया के बोर्नियो द्वीप पर जंगलों में लगी भीषण आग के चलते हवा बेहद जहरीली हो गई है। आसमान नारंगी नजर आ रहा है और प्रदूषण का स्तर 1000 तक पहुंच जाने के बाद सरकार ने मरीजों के लिए विशेष ऑक्सीजन बस सेवा शुरू की है।

बोर्नियो में भीषण संकट

इंडोनेशिया के बोर्नियो द्वीप पर जंगलों में लगी आग ने भयानक रूप ले लिया है, जिससे वहां की हवा पूरी तरह से जहरीली हो गई है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि वायु प्रदूषण सूचकांक यानी AQI 1000 के आंकड़े को पार कर गया है। इस प्रदूषण के कारण आसमान का रंग नारंगी और पीला दिखाई दे रहा है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। धुएं की मोटी परत की वजह से लोगों को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है और खांसी तथा आंखों में जलन की समस्याएं चरम पर हैं।

ऑक्सीजन बस से राहत की कोशिश

सेंट्रल कालीमंतन प्रांत के पलंगका राया शहर में स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एक अनोखी पहल की है। वहां प्रशासन ने ऑक्सीजन सिलेंडरों और मेडिकल स्टाफ से लैस खास बसों की तैनाती की है। इन बसों का उद्देश्य उन लोगों को राहत देना है, जो जहरीली हवा के कारण सांस लेने में अक्षम महसूस कर रहे हैं। यहां लोगों को पूरी तरह से मुफ्त ऑक्सीजन मुहैया कराई जा रही है। मेडिकल टीम बस में आने वाले मरीजों का विवरण दर्ज करती है और उनकी स्थिति के अनुसार उन्हें 5 से 10 मिनट तक ऑक्सीजन सपोर्ट देती है। इसके लिए मरीजों को नाक में एक छोटी ट्यूब लगाई जाती है, ताकि उन्हें तत्काल राहत मिल सके। स्वास्थ्य विभाग ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया है कि यह सेवा मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है, जिन्हें वायु प्रदूषण के कारण सांस लेने में गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

बीमारियों की चपेट में लाखों लोग

इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल अगस्त महीने से लेकर रविवार तक धुएं के कारण होने वाली सांस की बीमारियों के करीब 3.5 लाख मामले दर्ज किए गए हैं। केवल सेंट्रल कालीमंतन क्षेत्र में ही लगभग 31,000 लोग स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। प्रभावित इलाकों के निवासियों का कहना है कि घर से बाहर निकलना किसी सजा से कम नहीं है। 44 साल की ओक्टाविना, जो खुद इस आपदा का शिकार हुई हैं, ने बताया कि यह एक प्राकृतिक आपदा है जिस पर इंसानी नियंत्रण बहुत सीमित है। वहीं, 31 साल की पुरनासारी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि सुबह के समय धुआं इतना घना और पीला होता है कि घर के बाहर निकलते ही सीने में जकड़न महसूस होने लगती है। सिटी जुमियाती नामक एक अन्य स्थानीय महिला ने बताया कि लंबे समय से आंखों में लालिमा और गले में दर्द जैसी समस्याओं ने उन्हें जकड़ लिया है और अस्पताल के बजाय ऑक्सीजन बस उनके लिए बड़ी मददगार साबित हो रही है।

क्यों बिगड़ रहे हैं हालात

इंडोनेशिया में जंगलों में आग लगना एक सालाना समस्या बनी हुई है, लेकिन इस साल इसकी तीव्रता पिछले एक दशक के रिकॉर्ड को तोड़ चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, भीषण गर्मी और अल नीनो मौसमी घटना ने जंगलों के साथ-साथ जमीन के नीचे मौजूद पीट की परतों को आग के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना दिया है। इस आग से निकलने वाला जहर सिर्फ इंडोनेशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मलेशिया और सिंगापुर तक देखा जा रहा है। नुसंतारा एटलस की एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर तक के नौ महीनों में करीब 19 लाख हेक्टेयर जमीन आग की भेंट चढ़ चुकी है, जो कि लगभग 47 लाख एकड़ का क्षेत्र है। हालांकि, इंडोनेशिया की सरकार ने इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है।

विरोध और प्रशासनिक कदम

बढ़ते प्रदूषण और सरकारी तंत्र की धीमी कार्रवाई से स्थानीय लोगों में नाराजगी का माहौल है। पिछले सप्ताह सैकड़ों छात्रों ने प्रांतीय गवर्नर के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर आग पर काबू पाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की। लोगों का धैर्य अब धीरे-धीरे टूट रहा है। इस स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने पूरे देश में करीब 500 स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए हैं, जहां धुएं से प्रभावित मरीजों को मुफ्त ऑक्सीजन और आवश्यक चिकित्सा उपचार मिल सके। इनमें से अकेले 300 केंद्र सेंट्रल कालीमंतन में स्थित हैं, जो बताता है कि वहां की स्थिति कितनी गंभीर बनी हुई है। प्रशासन फिलहाल जंगलों की आग बुझाने और लोगों को सांस लेने योग्य हवा उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है, लेकिन प्रकृति के इस कहर ने पूरे क्षेत्र को संकट में डाल दिया है।

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