हिमाचल प्रदेश में बिगड़ती आर्थिक स्थिति का हवाला देकर राज्य सरकार ने कुछ समय पहले मुख्यमंत्री, मंत्रियों और सरकारी कर्मचारियों के एक वर्ग के वेतन में छह माह की कटौती का फैसला किया था। अब इस फैसले को स्थगित कर दिया गया है और सभी का वेतन बहाल कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला में यह जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि वेतन कटौती का निर्णय अब केवल उन्हीं पर लागू रहेगा।
केवल मुख्यमंत्री पर लागू रहेगी अधिसूचना
वित्त विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की और इसके बाद इस मामले में ताजा जानकारी साझा की। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि वेतन स्थगन से जुड़ी अधिसूचना केवल उन पर ही लागू रहेगी, जबकि अन्य सभी के लिए इसे वापस ले लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन कर्मचारियों का वेतन स्थगित हुआ था, उनका बकाया अगले महीने पूर्ण वेतन के साथ जारी कर दिया जाएगा।
वित्तीय स्थिति में सुधार का दावा
सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार की व्यावहारिक नीतियों और निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में उत्साहजनक बदलाव देखने को मिले हैं और हिमाचल प्रदेश लगातार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकार की गलत नीतियों में सुधार किया गया और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को समाप्त किया गया, जिससे राज्य की वित्तीय हालत और मजबूत हुई है।
पेंशनभोगियों को राहत
मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग को 65 से 70 वर्ष आयु वर्ग के सभी पेंशनभोगियों के लंबित पेंशन एरियर जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह एरियर अगले महीने वितरित किया जाएगा और इस उद्देश्य के लिए आवश्यक धनराशि राज्य सरकार उपलब्ध करवाएगी।
कर्मचारियों के हित में प्रतिबद्धता
कर्मचारियों के लंबित एरियर और महंगाई भत्ते की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी कर्मचारी राज्य की रीढ़ हैं और सरकार उनके कल्याण तथा हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि मौजूदा सरकार ने कर्मचारियों की सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल किया है।
उन्होंने कहा कि ओपीएस की बहाली के बाद केंद्र सरकार ने राज्य को मिलने वाली लगभग 1,200 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता पर रोक लगा दी है। उनका कहना था कि यदि यह सहायता नहीं रोकी जाती, तो राज्य सरकार कर्मचारियों के लंबित एरियर का भुगतान करने की स्थिति में होती। इसके बावजूद सरकार कर्मचारियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर रही है।
बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, वित्त विभाग के विशेष सचिव सौरभ जस्सल सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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