अमेरिकी राजनीति में भारतीयों का बढ़ता दबदबा
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने जा रहे मिडटर्म चुनाव का माहौल काफी गरमाया हुआ है। इस चुनाव में भारतीय मूल के कई नेता गवर्नर, अमेरिकी संसद, अटॉर्नी जनरल और मेयर जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए जोर-आजमाइश कर रहे हैं। इन उम्मीदवारों में कुछ ऐसे दिग्गज शामिल हैं जो पहले से ही निर्वाचित पदों पर कार्यरत हैं, वहीं कुछ नए चेहरे भी इस बार बड़ी चुनावी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इन भारतीय मूल के उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या अमेरिकी राजनीति में बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट संकेत है। आइए उन 10 प्रमुख चेहरों पर नजर डालते हैं जो इस चुनाव की दशा और दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विवेक रामास्वामी
विवेक रामास्वामी भारतीय मूल के एक जाने-माने अमेरिकी कारोबारी और राजनेता हैं। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल करने के बाद रामास्वामी ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2024 में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। इस चुनावी दौड़ में उन्हें पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सक्रिय समर्थन प्राप्त है। वर्ष 2026 के इन चुनावों में वह ओहायो के गवर्नर पद के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन को टक्कर दे रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि रामास्वामी अब तक किसी भी निर्वाचित सार्वजनिक पद पर नहीं रहे हैं, इसलिए यह चुनाव उनके लिए काफी महत्वपूर्ण है।
रो खन्ना
रो खन्ना अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के वर्तमान सदस्य हैं। उन्होंने 2016 में जीत हासिल कर 2017 में कांग्रेस में प्रवेश किया था और तब से वे लगातार अपना पद बनाए रखने में कामयाब रहे हैं। उनका निर्वाचन क्षेत्र कैलिफोर्निया का जिला 17 है, जो सिलिकॉन वैली का एक बड़ा हिस्सा है। यह क्षेत्र स्टार्टअप और तकनीकी उद्योगों का केंद्र माना जाता है। रो खन्ना अपने पूरे कार्यकाल में आर्थिक असमानता, श्रमिकों के अधिकारों और तकनीकी उद्योग से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए जाने जाते हैं। 2026 के इस चुनाव में वे एक बार फिर प्रतिनिधि सभा की सीट के लिए मैदान में हैं। उनके सामने रिपब्लिकन पार्टी से भारतीय मूल के ही रितेश टंडन चुनौती पेश कर रहे हैं।
प्रमिला जयपाल
चेन्नई में जन्मी प्रमिला जयपाल अमेरिकी राजनीति में एक चर्चित नाम हैं। वे 2016 में पहली बार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी गई थीं और 2017 से लगातार सांसद के रूप में सेवा दे रही हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर वे प्रगतिशील धड़े की एक प्रमुख आवाज मानी जाती हैं। प्रमिला मुख्य रूप से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, आव्रजन सुधार, आर्थिक असमानता और श्रमिकों के अधिकारों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सक्रिय रही हैं। 2026 के मिडटर्म चुनावों में वे वॉशिंगटन के सातवें कांग्रेसनल जिले से दोबारा चुनाव लड़ रही हैं। दिलचस्प यह है कि उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी निरव शेठ भी भारतीय मूल के ही हैं।
अमी बेरा
पेशे से एक डॉक्टर रहे अमी बेरा अमेरिकी राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भारतीय मूल के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। उन्होंने पहली बार 2012 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीता था और 2013 से वे संसद का हिस्सा हैं। अपने लंबे संसदीय करियर में उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहरा काम किया है। 2026 में वे कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल जिले से अपनी किस्मत दोबारा आजमा रहे हैं। उनका व्यापक अनुभव उन्हें उन चुनिंदा भारतीय मूल के नेताओं की श्रेणी में खड़ा करता है, जिन्होंने अमेरिकी संसद में लंबे समय तक अपनी सेवा दी है।
सुहास सुब्रमण्यम
सुहास सुब्रमण्यम भारतीय मूल के एक ऐसे नेता हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में आने से पहले वर्जीनिया की राज्य विधायिका में अपना योगदान दिया। वे राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन में तकनीकी नीति सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं। 2024 में जीत हासिल करने के बाद 2025 में उनका कार्यकाल शुरू हुआ था। राज्य स्तरीय राजनीति के बाद संसद पहुँचना उनके राजनीतिक अनुभव को और अधिक मजबूती देता है। 2026 में वे वर्जीनिया के दसवें कांग्रेसनल जिले से दोबारा चुनावी मैदान में हैं, जहाँ उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ से है।
अमिश शाह
अमिश शाह पेशे से एक आपातकालीन चिकित्सा चिकित्सक हैं और राजनीति में आने से पहले पूरी तरह चिकित्सा सेवा में समर्पित थे। उन्होंने एरिजोना की राज्य विधायिका में सदस्य के रूप में काम किया है। वर्ष 2024 में उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सीट के लिए प्रयास किया था, लेकिन तब उन्हें सफलता नहीं मिली। अब 2026 में वे एरिजोना के पहले कांग्रेसनल जिले से फिर से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने रिपब्लिकन उम्मीदवार के रूप में पूर्व पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी जे फील्ली खड़े हैं। शाह का चुनावी संघर्ष यह दर्शाता है कि राज्य स्तर पर सफल होने के बाद भी राष्ट्रीय स्तर की जीत हासिल करना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पिया दंडिया
पिया दंडिया इस बार के मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की उम्मीदवार हैं। वे फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल जिले से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने के लिए तैयार हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वे पहली बार इस बड़े स्तर पर चुनावी दौड़ में शामिल हुई हैं और उनसे पहले किसी निर्वाचित सार्वजनिक पद पर उनके बैठने का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है। उनके खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी के केसी अस्कर चुनाव लड़ रहे हैं। दंडिया की यह दावेदारी उस बढ़ते रुझान को दर्शाती है जिसमें भारतीय मूल के युवा नेता अमेरिकी संसद में अपनी जगह बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
सरिता कोमातिरेड्डी
पेशे से वकील सरिता कोमातिरेड्डी 2026 में न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल बनने के लिए चुनाव लड़ रही हैं। वे वर्तमान डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स को टक्कर दे रही हैं। सरिता कोमातिरेड्डी को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त है। इससे पहले साल 2020 में ट्रंप ने उन्हें न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले की संघीय अदालत में न्यायाधीश के तौर पर नामित किया था, हालांकि उस पद पर उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी थी। अब वे सीधे तौर पर राज्य के सर्वोच्च कानूनी पद के लिए मुकाबले में हैं। उनका पिछला कोई निर्वाचित अटॉर्नी जनरल का रिकॉर्ड नहीं है, जो इस चुनाव को और भी अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।
नित्या रमन
भारत में जन्मी नित्या रमन वर्तमान में लॉस एंजिलिस की सिटी काउंसिल की सदस्य हैं। उन्होंने 2020 में पहली बार सिटी काउंसिल का चुनाव जीत कर सबको प्रभावित किया था। अपनी स्थानीय राजनीति के दौरान उन्होंने बेघर लोगों की समस्या, आवास और शहरी विकास जैसे अहम मुद्दों पर प्रभावी काम किया है। 2026 में वे लॉस एंजिलिस की मेयर बनने की कोशिश कर रही हैं और वर्तमान मेयर करेन बास को चुनौती दे रही हैं। यह मुकाबला इसलिए भी खास है क्योंकि नित्या स्थानीय प्रशासन के गहरे अनुभव के साथ शहर के सर्वोच्च पद तक पहुँचने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही हैं।
अरुणा मिलर
हैदराबाद में जन्मी अरुणा मिलर वर्तमान में मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में कार्यरत हैं। वे 2026 में गवर्नर वेस मूर के साथ दोबारा चुनाव मैदान में हैं। इससे पहले वे मैरीलैंड की राज्य प्रतिनिधि सभा की सदस्य भी रह चुकी हैं। उनके पास राज्य विधायिका और राज्य सरकार, दोनों ही स्तरों पर काम करने का लंबा अनुभव है। अमेरिकी राज्य सरकार में लेफ्टिनेंट गवर्नर का पद गवर्नर के बाद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। अरुणा मिलर उन भारतीय मूल के नेताओं के लिए एक बड़ा उदाहरण हैं, जिन्होंने स्थानीय राजनीति से शुरुआत करके राज्यव्यापी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को कुशलतापूर्वक संभाला है।
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