इमरान खान की राह चलने से बचे शहबाज शरीफ, तोशाखाने में जमा कराए 36 महंगे तोहफे, पाकिस्तान में बदले नियम

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जुलाई से सितंबर 2026 के बीच विदेशों से मिले 36 कीमती तोहफे तोशाखाने में जमा करा दिए हैं। वहीं पाकिस्तान सरकार ने तोशाखाने के नियमों को सख्त बनाते हुए उपहारों की खुली नीलामी और पारदर्शिता के नए प्रावधान लागू किए हैं।

इमरान खान के विवादों से सबक, शहबाज शरीफ ने तोशाखाने को सौंपे कीमती तोहफे

पाकिस्तान की राजनीति में सरकारी उपहारों और तोशाखाने का मुद्दा लंबे समय से गर्म रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर तोशाखाने के तोहफों को लेकर चली कानूनी कार्रवाई और उनकी जेल यात्रा के बाद अब वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ किसी भी तरह के कानूनी पचड़े में फंसने से बचते दिख रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार शहबाज शरीफ ने जुलाई से सितंबर 2026 के बीच विदेशी दौरों और मुलाकातों के दौरान मिले अपने दर्जनों कीमती उपहारों को तोशाखाने में जमा करा दिया है।

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इन उपहारों की संख्या 34 से 36 या उससे ज्यादा बताई जा रही है। पाकिस्तान के कैबिनेट डिवीजन ने इन सभी उपहारों का आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक कर दिया है, जबकि विशेषज्ञों और मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा इनकी वास्तविक कीमत का आकलन किया जा रहा है। इमरान खान पर तोशाखाने से मिले कीमती सामान को अपने पास रखने और उनकी खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके आधार पर वे अब भी सेना की हिरासत और जेल में हैं। शहबाज शरीफ ने ऐसे विवादों से दूर रहने के लिए मिले सभी महंगे तोहफों को तुरंत सरकारी खजाने को सौंप दिया है।

उपहारों में एक किलो सोना, लग्जरी घड़ियां और गिलाफ-ए-काबा का टुकड़ा शामिल

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा तोशाखाने में जमा कराए गए उपहारों की सूची काफी लंबी और बेहद कीमती है। इसमें कई दुर्लभ तथा महंगे सामान शामिल हैं:

  • 1000 ग्राम सोना: यह शुद्ध सोना किर्गिस्तान की सरकार की ओर से भेंट किया गया था, जिसे 8 सितंबर 2026 को तोशाखाने में आधिकारिक रूप से जमा कराया गया।
  • महंगी और लग्जरी घड़ियां: तोशाखाने को सौंपी गई घड़ियों में विश्व प्रसिद्ध ब्रांड्स के मॉडल शामिल हैं, जिनमें Rolex Day-Date, Rolex Lady Datejust, Rolex GMT-Master II और Patek Philippe Nautilus जैसी अत्यंत कीमती घड़ियां शामिल हैं।
  • पवित्र धार्मिक स्मृतियां: उपहारों में धार्मिक महत्व की कई अनमोल वस्तुएं भी हैं। इनमें काबा का एक सुंदर मॉडल, 36×29 इंच आकार का गिलाफ-ए-काबा का एक टुकड़ा तथा मस्जिद-ए-नबवी का मॉडल शामिल है।
  • अन्य कीमती व सजावटी सामान: इन मुख्य वस्तुओं के अलावा सूची में कश्मीरी व अन्य कीमती कालीन, कफलिंक, महंगे पेन, अंगूठियां, तस्बीह (प्रार्थना की माला), खजूर के सजावटी बॉक्स, पवित्र जमजम का पानी, पारंपरिक ऊद वाले परफ्यूम, चांदी के केस में रखा एक विशेष चाकू, कई पेंटिंग्स और स्मृति चिन्ह शील्ड शामिल हैं।

तोशाखाना नियम 2026: पाकिस्तान सरकार ने प्रक्रिया को बनाया सख्त

उपहार जमा कराने के साथ-साथ पाकिस्तान सरकार ने तोशाखाने से जुड़े नियमों में व्यापक फेरबदल किए हैं। सितंबर 2026 में नए Toshakhana (Management and Regulation) Rules, 2026 लागू किए गए हैं, जिन्होंने वर्ष 2023 की पुरानी नियमावली का स्थान ले लिया है। इन नए प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य सरकारी उपहारों के रिकॉर्ड, उनके सही मूल्यांकन और नीलामी की पूरी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

नए नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि 300 डॉलर तक की कीमत वाले गिफ्ट को एक तय राशि चुकाकर अपने पास रखने का पुराना विकल्प पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। अब यदि कूटनीतिक या सांस्कृतिक शिष्टाचार के कारण किसी उपहार को लेने से मना नहीं किया जा सकता, तो उसे हर हाल में तोशाखाने में जमा कराना ही होगा। इसके अलावा समयसीमा को लेकर भी कड़े नियम बनाए गए हैं:

  • कोई भी उपहार प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर उसे तोशाखाने में जमा कराना अनिवार्य होगा। यदि प्रधानमंत्री या कोई अधिकारी विदेश यात्रा पर है, तो स्वदेश लौटने के बाद से यह 30 दिनों की समयसीमा प्रभावी होगी।
  • यदि कोई उपहार अलग से या डाक/कार्गो के जरिए भेजा जाता है, तो उसे तोशाखाने में जमा कराने के लिए अधिकतम 60 दिन का समय निर्धारित किया गया है।

नीलामी की प्रक्रिया और मूल्यांकन के लिए नई शर्तें

तोशाखाने में जमा होने वाले सामान की सार्वजनिक नीलामी को लेकर भी नए नियम तय किए गए हैं। नए प्रावधानों के अनुसार अब तोशाखाने के उपहारों की खुली और सार्वजनिक नीलामी की जाएगी, जिसका लाइव मीडिया कवरेज करना अनिवार्य होगा। हालांकि, किसी भी विवाद से बचने के लिए सरकारी पदाधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों के इस नीलामी में भाग लेने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

नीलामी प्रक्रिया से कुछ खास चीजों को अलग रखा जा सकता है। पुरातन ऐतिहासिक वस्तुओं, सांस्कृतिक महत्व की चीजों या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद संवेदनशील उपहारों के मामले में एक विशेष समिति नीलामी से छूट प्रदान कर सकती है। उपहारों की सही कीमत तय करने के लिए एक बहुस्तरीय प्रक्रिया अपनाई जाएगी:

  • मूल्यांकन का काम पाकिस्तान के FBR (फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू) और निजी स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।
  • यदि FBR और निजी मूल्यांकनकर्ता के आकलन में 25 प्रतिशत से अधिक का अंतर पाया जाता है, तो मामले के समाधान के लिए एक तीसरे मूल्यांकनकर्ता की सेवाएं ली जाएंगी।
  • मूल्यांकन की वैधता अवधि भी तय की गई है। तीन महीने से पुराना मूल्यांकन नीलामी के लिए न्यूनतम रिजर्व प्राइस तय करने में मान्य नहीं होगा।
  • नीलामी के लिए तय किया गया रिजर्व प्राइस किसी भी स्थिति में आंकी गई बाजार दर से कम नहीं हो सकता।

नीलामी से मिलने वाले पैसे का कहां होगा इस्तेमाल?

पाकिस्तान सरकार ने नए नियमों में यह प्रावधान किया है कि तोशाखाने के सभी रिकॉर्ड को एक ऑनलाइन पोर्टल पर हर महीने अपडेट किया जाएगा। हालांकि, कूटनीतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए उपहार देने वाले व्यक्ति का नाम और उसके देश की जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त तोशाखाने के खातों का हर साल किसी तीसरे पक्ष से ऑडिट कराया जाना भी कानूनी रूप से अनिवार्य बना दिया गया है।

तोशाखाने की वस्तुओं की नीलामी से जो भी राजस्व प्राप्त होगा, उसे एक अलग सरकारी खाते में जमा किया जाएगा। सरकार ने फैसला किया है कि इस पूरी धनराशि का उपयोग पाकिस्तान के पिछड़े और सुदूर इलाकों में लड़कियों की प्राथमिक शिक्षा के सुधार एवं विकास पर खर्च किया जाएगा।

इमरान खान के तोशाखाना मामले की पृष्ठभूमि

पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में तोशाखाना हमेशा से विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों का केंद्र रहा है। वहां के कानून के मुताबिक विदेशों से मिलने वाले सभी आधिकारिक तोहफे देश की संपत्ति होते हैं जिन्हें तोशाखाने में दर्ज करना होता है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के कार्यकाल के दौरान तोशाखाने से मिले कीमती तोहफों को अपने पास रखने और उनकी खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।

इमरान खान के खिलाफ तोशाखाना मामले में अदालती और कानूनी कार्रवाई शुरू हुई, जिसके बाद उन्हें जेल में रखा गया है। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए शहबाज शरीफ ने अपने कार्यकाल में मिले सभी 36 उपहारों को बिना किसी देरी के तोशाखाने को सौंपने का कदम उठाया है, ताकि वे अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जैसी कानूनी मुश्किलों में न फंसें।

https://hindi.news18.com/world/pakistan-shahbaz-sharif-return-36-gifts-in-toshakhana-new-rules-2026-imran-khan-news-10940492.html