बर्फ की सफेद चादर के बीच सैलानियों का आकर्षण
हिमाचल प्रदेश की ऊंची चोटियों पर हुई ताजा बर्फबारी के बाद लाहौल-स्पीति के प्रसिद्ध शिंकुला दर्रे पर कुदरत का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर बिछी होने के बावजूद यह मार्ग पर्यटकों के लिए पूरी तरह से खुला हुआ है। कड़ाके की ठंड और कड़ाके की बर्फबारी के बीच भी बड़ी संख्या में लोग इन बर्फीली वादियों का आनंद लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
माइनस 8 डिग्री में सैलानियों का जोश
इस समय शिंकुला दर्रे के आसपास का तापमान माइनस 6 से लेकर माइनस 8 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। अत्यधिक ठंड का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्थानीय नालों में बहने वाला पानी भी जमने लगा है। हालांकि, प्रकृति के इस खूबसूरत और चुनौतीपूर्ण नजारों को कैमरे में कैद करने के लिए सैलानियों का उत्साह किसी भी तरह कम होता नहीं दिख रहा है। पर्यटक भीषण ठंड की परवाह किए बिना इस दुर्गम इलाके की प्राकृतिक सुंदरता को निहारने के लिए लगातार यहां आ रहे हैं।
सड़क मार्ग और यात्रा से जुड़ी सावधानियां
फिलहाल शिंकुला दर्रे की ओर जाने वाला सड़क मार्ग सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही के लिए सुरक्षित और खुला है। प्रशासन ने जानकारी दी है कि अक्टूबर महीने के अंत तक यह मार्ग आमतौर पर बर्फबारी के कारण बंद कर दिया जाता है और फिर अगले छह माह तक बंद रहने के बाद गर्मियों के मौसम में ही खुल पाता है। दारचा से शिंकुला जाने वाला यह रास्ता आगे जाकर लद्दाख के जांस्कर और कारगिल को जोड़ने का काम करता है। ऊंचाई वाला क्षेत्र होने के कारण यहां मौसम कभी भी तेजी से बदल सकता है, इसलिए पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले स्थानीय स्तर पर सड़क और मौसम के हाल की पूरी जानकारी जरूर ले लें।
मनाली से कितनी दूर है शिंकुला पास?
शिंकुला दर्रा हिमाचल और लद्दाख की सीमा पर समुद्र तल से 16,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। भौगोलिक रूप से यह एक अत्यंत ऊंचाई वाला क्षेत्र है, जहां हवा में ऑक्सीजन की कमी महसूस हो सकती है। मनाली से शिंकुला पास की कुल दूरी लगभग 180 किलोमीटर है। यदि कोई पर्यटक सुबह मनाली से अपनी यात्रा शुरू करता है, तो वह 3 से 4 घंटे के सफर के बाद यहां पहुंचकर शाम तक वापस मनाली लौट सकता है। इस लिहाज से एक दिन में इस पूरी यात्रा को पूरा करना बिल्कुल संभव है। फिलहाल भारत सरकार इस दर्रे के पास एक टनल का निर्माण भी कर रही है, जिससे भविष्य में आवागमन और अधिक सुगम हो जाएगा।
गैंबो रंजन और सावधानी के सुझाव
शिंकुला पास से लद्दाख की सीमा की दिशा में आगे बढ़ने पर महज 5 किलोमीटर की दूरी पर गैंबो रंजन पर्वत स्थित है। यह स्थान भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है और यहां ठहरने के लिए कैंपिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। पर्यटकों के लिए कुछ विशेष सुझाव दिए गए हैं:
- साथ में पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी जरूर रखें।
- हाई एल्टीट्यूड सिकनेस यानी ऊंचाई वाली बीमारी से बचने के लिए जरूरी दवाइयां साथ रखें।
- ऑक्सीजन कम होने के कारण सिरदर्द या चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है, इसलिए अपना स्वास्थ्य ध्यान रखें।
इस तरह से शिंकुला पास न केवल रोमांच के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन स्थान है, बल्कि यह मनाली से सुलभ होने के कारण पर्यटकों की पहली पसंद भी बनता जा रहा है।
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