पाकिस्तान: इमरान खान की तीन बहनों की जेल में बढ़ी अवधि, सरकार ने 30 दिन के लिए बढ़ाई हिरासत

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तीन बहनों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। पंजाब सरकार ने लाहौर की जेल में बंद अलीमा खान, नोरीन नियाजी और डॉ. उज्मा खान की हिरासत अवधि को और 30 दिनों के लिए बढ़ा दिया है।

पाकिस्तान में इमरान खान के परिवार पर बढ़ा दबाव

पाकिस्तान में सत्ता के गलियारों में चल रही हलचल और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के परिजनों पर कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इमरान खान पहले ही लंबी कानूनी लड़ाई का सामना करते हुए जेल में बंद हैं, वहीं अब उनकी तीन बहनों की रिहाई की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है। पंजाब प्रांत की सरकार ने अलीमा खान, नोरीन नियाजी और डॉ. उज्मा खान की हिरासत अवधि को बढ़ाकर उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ये तीनों महिलाएं पिछले एक महीने से अधिक समय से लाहौर की कुख्यात कोट लखपत जेल में कैद हैं।

क्यों बढ़ाई गई हिरासत?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तीनों बहनों को पाकिस्तान के पंजाब सार्वजनिक व्यवस्था अध्यादेश, 1960 के तहत हिरासत में रखा गया है। यह कानून विशेष रूप से राज्य में शांति और सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने के नाम पर लागू किया जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि इन तीनों ने जेल में बंद इमरान खान के समर्थन में लोगों को एकत्रित करने और प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी, जिसे देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर उनकी हिरासत जारी रखना जरूरी है। पंजाब सरकार का यह कदम ऐसे संवेदनशील दौर में आया है जब उनकी रिहाई की कानूनी संभावनाओं पर चर्चाएं तेज थीं।

हिरासत का पूरा घटनाक्रम

मामले की शुरुआत 20 सितंबर को हुई थी, जब अलीमा खान को पहली बार हिरासत में लिया गया। इसके तुरंत बाद, 21 सितंबर को डॉ. उज्मा खान और नोरीन नियाजी को भी अधिकारियों द्वारा पकड़ लिया गया। इन तीनों के खिलाफ यह कार्रवाई पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान के पक्ष में माहौल तैयार करने के आरोपों के कारण की गई। पीटीआई समर्थकों का लगातार यह कहना है कि उन्हें राजनीतिक बदले की भावना से निशाना बनाया जा रहा है, जबकि सरकार ने इसे कानून-व्यवस्था का सामान्य मामला बताया है।

लाहौर हाई कोर्ट में सुनवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए, अलीमा खान के बेटे शहरेज ने लाहौर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी मौसियों की गिरफ्तारी को गैर-कानूनी बताते हुए अदालत से उनकी तत्काल रिहाई की गुहार लगाई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को पंजाब के सहायक महाधिवक्ता ने कोर्ट को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाहौर के उपायुक्त की विशेष सिफारिश पर ही सरकार ने कानून के दायरे में रहते हुए उनकी हिरासत को 30 दिन और आगे बढ़ा दिया है।

कोर्ट का रुख और आगे की कानूनी स्थिति

सरकारी पक्ष की दलीलें सुनने के बाद लाहौर हाई कोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला सुनाया। सरकारी वकील की ओर से हिरासत बढ़ाए जाने की पुष्टि होने के बाद, अदालत ने रिहाई की मांग वाली याचिका का निपटारा कर दिया। इसका सीधा सा अर्थ यह है कि फिलहाल कानूनी रूप से वे तीनों महिलाएं जेल से बाहर नहीं आ सकेंगी। इस निर्णय के साथ ही उनके परिवार के लिए आने वाले दिन और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।

रिहाई पर अनिश्चितता के बादल

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या अगले 30 दिनों के बाद उनकी रिहाई संभव हो पाएगी? अभी तक की स्थिति को देखते हुए, इमरान खान के परिवार और उनकी पार्टी के समर्थकों की उम्मीदें धुंधली नजर आ रही हैं। कोट लखपत जेल में बंद तीनों बहनें अब सरकारी तंत्र की अगली चाल का इंतजार कर रही हैं। यह घटनाक्रम पाकिस्तान की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है, जहां परिवार के सदस्यों को भी राजनीतिक सक्रियता की बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। देश की न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच चल रही इस रस्साकशी पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें बनी हुई हैं।

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