इस्तीफा देकर मंत्री बनना राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा, सुप्रीम कोर्ट ने AIADMK के 6 बागी विधायकों को दी बड़ी राहत

तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक छोड़कर सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल होने वाले छह विधायकों के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस्तीफा देकर मंत्री पद संभालना राजनीति का सामान्य हिस्सा है।

सुप्रीम कोर्ट से बागी विधायकों को मिली बड़ी राहत

तमिलनाडु की सियासत में हलचल मचाने वाले अन्नाद्रमुक (AIADMK) के छह बागी विधायकों को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी और महत्वपूर्ण राहत मिली है। इन विधायकों ने अपनी मूल पार्टी का साथ छोड़कर सत्तारूढ़ दल 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) का दामन थाम लिया था। इस दल-बदल और इस्तीफे की प्रक्रिया के खिलाफ दायर की गई याचिका को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया है। याचिका में मांग की गई थी कि व्हिप का उल्लंघन करने वाले और इस्तीफा देने वाले इन नेताओं को पांच साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाए, जिसे अदालत ने सिरे से नकार दिया है।

क्या है अदालत की टिप्पणी

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने वकील के. सुथन द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के पूर्ववर्ती फैसले को चुनौती दी गई थी। पीठ ने अत्यंत स्पष्ट शब्दों में कहा कि, इस्तीफा देना और उसके बाद मंत्री पद की शपथ लेना यह पूरी तरह से राजनीतिक प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा है। अदालत ने यह भी साफ किया कि विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का अधिकार संवैधानिक व्यवस्था के दायरे में आता है और न्यायिक हस्तक्षेप के जरिए इस पर कानून से इतर कोई अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जा सकती।

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर

इससे पहले, 24 सितंबर को मद्रास हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका को खारिज कर दिया था। उस याचिका में 'चुनाव व्यय सुरक्षा' तंत्र को विकसित करने और बागी विधायकों को पांच साल के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने का अनुरोध किया गया था। बाद में 13 अक्टूबर को मद्रास हाईकोर्ट ने एक अन्य आदेश में तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर द्वारा छह विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार करने के निर्णय को भी सही ठहराया था। हाईकोर्ट ने उस समय विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिए थे कि वे अन्नाद्रमुक के सचेतक कृष्णमूर्ति की याचिका पर दो महीने के भीतर निर्णय लें, जिसमें एस जयकुमार, मारागथम कुमारवेल, पी सत्यभामा और एसक्की सुबैया को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी।

बागी विधायकों और इस्तीफों का पूरा विवरण

ये सभी विधायक अप्रैल में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक के टिकट पर निर्वाचित हुए थे। इस्तीफे और दल-बदल की समयरेखा इस प्रकार है:

  • एस जयकुमार (पेरुंदुरई), मारागथम कुमारवेल (मदुरांतकम) और पी सत्यभामा (धारापुरम) ने 25 मई, 2026 को इस्तीफा सौंपा था।
  • एसक्की सुबैया (अंबासमुद्रम) ने इसके ठीक अगले दिन यानी 26 मई, 2026 को अपना इस्तीफा दिया।
  • सी. विजयभास्कर (विरालिमालाई) और एम. आर. विजयभास्कर (करूर) ने क्रमशः 16 जून और 29 जून को विधानसभा की सदस्यता छोड़ी।

इन सभी नेताओं ने इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी।

उपचुनाव के परिणाम और संवैधानिक स्थिति

राजनीतिक घटनाक्रम के बाद 6 अक्टूबर को उपचुनाव आयोजित किए गए। इन उपचुनावों में टीवीके के उम्मीदवार के तौर पर लड़ते हुए मारागथम कुमारवेल ने मदुरांतकम सीट से और सत्यभामा ने धारापुरम विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की। शीर्ष अदालत ने कृष्णमूर्ति की याचिका के साथ-साथ 'देसिया मक्कल शक्ति काची' की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया कि विधायकों द्वारा दिए गए इस्तीफे पूरी तरह से स्वेच्छा से थे। अदालत के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुरूप ही रही है।

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