मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच मक्का में फंसे मध्य प्रदेश के 300 से ज्यादा श्रद्धालु, सरकार से स्पेशल फ्लाइट की मांग

पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट के कारण सऊदी अरब के मक्का में उमराह करने गए भारत के हजारों नागरिक फंस गए हैं। इनमें मध्य प्रदेश के भी लगभग 300 श्रद्धालु शामिल हैं, जिनकी सुरक्षित वापसी के लिए राज्य में प्रशासनिक व राजनीतिक स्तर पर प्रयास शुरू हो गए हैं।

पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष का असर अब धार्मिक यात्राओं पर भी साफ तौर पर दिखने लगा है। सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में उमराह की नीयत से गए हजारों भारतीय नागरिक वहां जारी अनिश्चितता और उड़ानों के रद्द होने की वजह से फंस गए हैं। दावों के मुताबिक, मक्का में इस समय भारत के करीब 3000 श्रद्धालु अटके हुए हैं, जिनमें अकेले मध्य प्रदेश के लगभग 300 से अधिक यात्री शामिल हैं। मध्य पूर्व में युद्ध जैसे बिगड़ते हालात के बीच वतन वापसी के रास्ते बंद होने से इन श्रद्धालुओं के परिजन भारत में बेहद चिंतित हैं और सरकार से जल्द हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

श्रद्धालुओं की वतन वापसी के लिए प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल

मक्का में फंसे नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए मध्य प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेता अब्बास हफीज ने इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश की अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कृष्णा गौर से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मंत्री के समक्ष मक्का में फंसे लोगों की विकट स्थिति को रखा और केंद्र सरकार के माध्यम से उन्हें अविलंब भारत लाने का मार्ग प्रशस्त करने की मांग उठाई।

मंत्री कृष्णा गौर के साथ हुई चर्चा के बाद अब्बास हफीज ने बताया कि मध्य प्रदेश समेत पूरे देश से बड़ी तादाद में मुस्लिम श्रद्धालु उमराह की धार्मिक यात्रा के लिए सऊदी अरब गए थे। हालांकि, युद्ध की विभीषिका और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में आ रही अड़चनों की वजह से उनकी वापसी का कार्यक्रम पूरी तरह बाधित हो गया है।

15 दिनों से ठप हैं उड़ानें, बढ़ रहा आर्थिक बोझ

स्थिति की गंभीरता को बयां करते हुए कांग्रेस नेता अब्बास हफीज ने कहा कि मक्का गए श्रद्धालुओं की परेशानियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। वहां फंसे यात्रियों की मौजूदा दिक्कतों को मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं के जरिए समझा जा सकता है:

  • लंबे समय से फंसे यात्री: देश भर से गए लगभग 4000 नागरिक और मध्य प्रदेश के करीब 300 से 400 लोग पिछले 15 दिन से वहां फंसे हुए हैं।
  • आर्थिक तंगी: तय समय से अधिक समय तक रुकने के कारण यात्रियों का दैनिक खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे उन्हें रहने और खाने-पीने में भारी तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
  • उड़ानों का अभाव: नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं। भारतीय एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया, इंडिगो और अकासा एयर की उड़ानों की स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है, जबकि एयरपोर्ट्स के सही ढंग से काम न करने से यात्री हवाई अड्डों पर परेशान हो रहे हैं।
  • महंगे टिकटों की मार: वहां फंसे अधिकतर लोग मध्यम वर्गीय परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। एयरलाइंस के अचानक बढ़े किराए और अतिरिक्त खर्चों को वहन करना उनके लिए मुमकिन नहीं हो पा रहा है।

विशेष विमान भेजने और केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखने की मांग

अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री कृष्णा गौर के साथ बातचीत में अब्बास हफीज ने आग्रह किया कि चूंकि वह राज्य में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, इसलिए उनका यह दायित्व बनता है कि वह संकट में फंसे नागरिकों की मदद करें। उन्होंने मंत्री से मांग की कि वह तुरंत केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्री और विदेश मंत्री को आधिकारिक पत्र लिखें। उन्होंने सुझाव दिया कि मक्का में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए भारत सरकार की ओर से विशेष विमान अथवा विशेष उड़ानों का इंतजाम किया जाना चाहिए।

मंत्री कृष्णा गौर ने दिया मदद का भरोसा

कांग्रेस नेता से मुलाकात के बाद मंत्री कृष्णा गौर ने पीड़ित परिवारों को आश्वस्त किया है कि सरकार इस मामले को पूरी संवेदनशीलता से ले रही है। उन्होंने भरोसा दिया कि वह केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री और विदेश मंत्री को तुरंत पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराएंगी। मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से हर संभव मदद मांगी जाएगी ताकि मक्का में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित और बिना किसी देरी के स्वदेश वापस लाया जा सके। विपक्ष और परिजनों को उम्मीद है कि सरकार के इन कदमों से जल्द ही कोई सकारात्मक समाधान निकल सकेगा।

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