संघर्ष से सफलता तक का सफर
बिहार के पूर्णिया में बतौर सदर एसडीपीओ यानी डीएसपी पद पर तैनात अभिनव परासर की कामयाबी की दास्तां उन तमाम युवाओं के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे अभिनव ने साबित कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों और सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। बीपीएससी परीक्षा में 17वीं रैंक प्राप्त करना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिसने उन्हें प्रशासनिक सेवा में ऊंचे मुकाम पर पहुँचाया।
बड़े भाई का मार्गदर्शन और प्रेरणा
अभिनव परासर के पिता एक सामान्य किसान हैं और उनकी माताजी गृहणी हैं। अपने इस सफर के बारे में बात करते हुए अभिनव बताते हैं कि उनके जीवन में प्रशासनिक सेवा में जाने का विचार और उसके प्रति जुनून पैदा करने का सबसे बड़ा श्रेय उनके बड़े भाई को जाता है। उनके बड़े भाई हमेशा से ही उन्हें वर्दी वाली नौकरी के प्रति आकर्षित करते थे और उन्हें प्रेरित करते रहते थे। भाई का यह प्रोत्साहन ही था जिसने अभिनव के मन में सिविल सेवा में जाकर समाज की सेवा करने की इच्छा को मजबूत किया।
शिक्षा और करियर का सफर
अभिनव की शुरुआती शिक्षा पश्चिम बंगाल में पूरी हुई। अपनी अकादमिक यात्रा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कंप्यूटर साइंस विषय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। दिलचस्प बात यह है कि अपनी पढ़ाई के दौर में ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में आयोजित कई सिविल सेवा परीक्षाएं पास की थीं, लेकिन उनका मन हमेशा बिहार की माटी से जुड़ा रहा। उनका सपना स्पष्ट था कि उन्हें अपने गृह राज्य बिहार में रहकर ही अपनी सेवाएं देनी हैं। परीक्षा के पैटर्न को गहराई से समझने के बाद उन्होंने प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू की तैयारी की रणनीति बनाई, जिसके फलस्वरूप BPSC 2022 में उन्हें 17वीं रैंक प्राप्त हुई और उनका चयन डीएसपी के पद पर हुआ।
नियमित पढ़ाई और पढ़ाने का अनुभव
अभिनव अपनी सफलता के लिए अनुशासित दिनचर्या को जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने तैयारी के दौरान रोजाना कम से कम 8 घंटे की नियमित पढ़ाई की। उनकी तैयारी की एक अनोखी शैली थी, जिसमें वे खुद पढ़ने के साथ-साथ एक संस्थान में अन्य छात्रों को पढ़ाया भी करते थे। उनका मानना है कि किसी विषय को दूसरों को समझाने से उस विषय पर पकड़ और बेहतर हो जाती है। जब वे पढ़ाते थे, तो उनका पूरा सिलेबस फिर से रिवाइज हो जाता था, जिससे उन्हें परीक्षा में बहुत मदद मिली। निरंतरता और कठिन परिश्रम के माध्यम से उन्होंने अपने लक्ष्यों को साकार किया।
परिवार का अटूट सहयोग
सफलता के इस सफर में परिवार की भूमिका पर चर्चा करते हुए अभिनव भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि माता-पिता का सहयोग और भाई का लगातार मार्गदर्शन उनके लिए ढाल की तरह रहा। जब आपके पास परिवार का साथ होता है, तो अपने लक्ष्य पर एकाग्र होना बहुत सरल हो जाता है। उन्होंने अपनी पूरी सफलता को अपने परिवार के त्याग और अपनी मेहनत का संयुक्त परिणाम बताया है।
युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश
आज की पीढ़ी को सलाह देते हुए डीएसपी अभिनव परासर कहते हैं कि असफलता से कभी भी हताश नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि अगर आप पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ प्रयास कर रहे हैं, तो आज नहीं तो कल सफलता आपके कदम जरूर चूमेगी। एक हार मिलने का अर्थ यह नहीं है कि आपको अपना लक्ष्य छोड़ देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि निरंतर मेहनत करना ही उनकी सफलता का असली मूलमंत्र रहा है। आज उनकी यह कहानी न केवल पूर्णिया बल्कि पूरे बिहार के युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
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