नेपाल प्रीमियर लीग के लिए पीसीबी ने मांगी मोटी रकम, एनओसी विवाद में फंसे कई पाकिस्तानी खिलाड़ी

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने नेपाल प्रीमियर लीग में खेलने वाले अपने खिलाड़ियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र देने के लिए प्रति खिलाड़ी 25,000 अमेरिकी डॉलर की मांग की है, जिससे काठमांडू पहुंचे क्रिकेटर संकट में हैं।

एनओसी को लेकर नया बखेड़ा

नेपाल प्रीमियर लीग यानी एनपीएल के आगाज से ठीक पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला खिलाड़ियों को जारी किए जाने वाले नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी से जुड़ा है। आयोजकों का दावा है कि बोर्ड ने अपने खिलाड़ियों को इस टी20 टूर्नामेंट में शामिल होने की अनुमति देने के बदले में भारी-भरकम राशि की मांग रखी है। इस मांग के कारण टूर्नामेंट की तैयारियों के बीच हड़कंप मच गया है और कई खिलाड़ी नेपाल में ही फंस कर रह गए हैं।

प्रति खिलाड़ी 25,000 अमेरिकी डॉलर की मांग

आयोजकों की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, पीसीबी ने प्रति खिलाड़ी 25,000 अमेरिकी डॉलर की फीस तय की है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 23.73 लाख रुपये के बराबर बैठती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बोर्ड ने अब तक कई खिलाड़ियों को एनओसी नहीं दी है। स्थिति तब और बिगड़ गई जब जिन खिलाड़ियों को पहले से एनओसी मिल चुकी थी, उन्हें भी बोर्ड ने सूचना भेज दी कि उनकी अनुमति को फिलहाल के लिए होल्ड पर डाल दिया गया है। इस अचानक आए मोड़ से फ्रेंचाइजी और खिलाड़ी दोनों ही असमंजस की स्थिति में हैं।

खिलाड़ियों का करियर खतरे में

इस पूरे घटनाक्रम के चलते खिलाड़ियों के पेशेवर करियर पर अनिश्चितता के काले बादल छा गए हैं। एनपीएल में हिस्सा लेने वाले कई बड़े पाकिस्तानी नाम इस विवाद की चपेट में हैं। इनमें टी20 कप्तान साहिबजादा फरहान, आक्रामक बल्लेबाज हैदर अली, हुनैन शाह, हुसैन तलत, अनुभवी इफ्तिखार अहमद, तेज गेंदबाज हसन अली और स्पिनर उसामा मीर जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन खिलाड़ियों में से जो काठमांडू पहुंच चुके थे, वे अब वहां बिना एनओसी के फंस गए हैं। वहीं, जो खिलाड़ी अभी यात्रा पर निकलने वाले थे, उन्होंने बोर्ड का रुख स्पष्ट होने तक अपनी योजनाओं पर रोक लगा दी है।

अमेरिका की लीग का पुराना विवाद

भले ही एनपीएल आयोजकों द्वारा की गई इस मांग की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन यह कोई पहली बार नहीं है जब पीसीबी पर इस तरह के आरोप लगे हों। इससे पहले अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) के दौरान भी ठीक ऐसा ही विवाद देखने को मिला था। उस समय भी फ्रेंचाइजी मालिकों ने आरोप लगाया था कि पीसीबी ने खिलाड़ियों को एनओसी जारी करने के लिए प्रति खिलाड़ी 25,000 अमेरिकी डॉलर की मांग की थी। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस समय पीसीबी ने खिलाड़ियों के भर्ती प्रक्रिया या ड्राफ्ट के दौरान इस फीस का कहीं कोई जिक्र नहीं किया था। यह मांग टूर्नामेंट के बिल्कुल करीब आने पर रखी गई थी, जब टीमों के पास खिलाड़ियों को बदलने का कोई विकल्प नहीं बचा था।

फ्रेंचाइजी की नाराजगी और मोहसिन नकवी का रुख

एमएलसी के दौरान ही यह बात सामने आई थी कि पीसीबी दुनिया का शायद अकेला ऐसा क्रिकेट बोर्ड है जो विदेशी लीगों से इस तरह का मुआवजा मांग रहा है। बोर्ड की किसी भी सार्वजनिक नीति में इस तरह के किसी शुल्क का उल्लेख नहीं मिलता है। इस रवैये से नाराज होकर फ्रेंचाइजी मालिकों ने पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी से संपर्क किया था और इस कदम की कड़ी आलोचना की थी। इसे अनुचित दबाव बनाने की रणनीति बताया गया था। उस सत्र में तेज गेंदबाज हारिस रऊफ एकमात्र पाकिस्तानी खिलाड़ी थे जो सैन फ्रांसिस्को यूनिकॉर्न्स की तरफ से खेले थे, और अंत में उनकी फ्रेंचाइजी को यह फीस चुकाने पर मजबूर होना पड़ा था।

वादों के बावजूद समाधान से दूर पीसीबी

विदेशी लीगों में खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर पीसीबी और क्रिकेटरों के बीच का यह विवाद पुराना है। कड़े केंद्रीय अनुबंधों की वजह से अक्सर खिलाड़ी दुनियाभर की लीगों में खेलने से वंचित रह जाते हैं। इस समस्या के स्थाई हल का वादा करते हुए पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने हाल ही में नई अनुबंध प्रणाली यानी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा की थी। इस नई नीति में टी20 विशेषज्ञों के लिए एक अलग श्रेणी बनाई गई थी, जिसमें यह आश्वासन दिया गया था कि उन्हें विदेशी लीगों के लिए बार-बार एनओसी मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। हालांकि, इस घोषणा के कई महीने बीत जाने के बाद भी खिलाड़ियों को नए अनुबंध पत्र नहीं सौंपे गए हैं, जिसकी वजह से स्थिति जस की तस बनी हुई है और खिलाड़ी एक बार फिर पुराने नियमों के बोझ तले दबे हैं।

https://hindi.news18.com/cricket/pakistan-cricket-board-demand-fee-of-25000-dollar-each-for-allowing-pakistani-players-permission-to-participate-in-nepal-premier-league-ws-n-10936609.html