बेगूसराय के लोक गायक टिंकू की कामयाबी की कहानी: रामधुनी के मुफ्त गायन से महीने में 50 हजार तक की कमाई का सफर

बिहार के बेगूसराय के नयागांव से ताल्लुक रखने वाले लोक गायक अमितेश कुमार दीपू उर्फ टिंकू ने साल 1993-94 में बिना किसी पारिश्रमिक के रामधुनी से अपने करियर की शुरुआत की थी। आज वे अपनी गायकी के दम पर हर महीने 50 हजार रुपये से अधिक कमा रहे हैं।

रामधुनी से शुरू हुआ गायकी का सफर

बिहार की सांस्कृतिक विरासत में लोक संगीत और धार्मिक आयोजन हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहे हैं। बेगूसराय जिले के मटिहानी प्रखंड के नयागांव जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से निकलकर एक व्यक्ति का प्रसिद्ध लोक गायक बन जाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। आज हम आपको अमितेश कुमार दीपू, जिन्हें लोग प्यार से टिंकू के नाम से जानते हैं, की प्रेरणादायक यात्रा के बारे में बता रहे हैं। टिंकू ने वर्ष 1993-94 के दौरान अपने गायकी के सफर की शुरुआत की थी। उस समय उन्होंने गांव में होने वाली रामधुनी के कार्यक्रमों में गाना शुरू किया था। शुरुआती दिनों में यह केवल एक धार्मिक सेवा की तरह था, जिसमें गायकों को कोई आर्थिक लाभ या फीस नहीं मिलती थी।

बिना फीस के गायकी का दौर

टिंकू बताते हैं कि उस दौर में रामधुनी गायन पूरी तरह से निस्वार्थ भाव से किया जाता था। हालांकि, समय बीतने के साथ-साथ जब गांव में बाढ़ की विभीषिका आती थी, तब भी वे इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे। उन कठिन परिस्थितियों में कभी-कभी आशीर्वाद के रूप में उन्हें महज 100 रुपये ही प्राप्त होते थे, जो उनके लिए एक छोटी सी आर्थिक सहायता बन जाती थी। उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि गांव की गलियों में गाई गई यह रामधुनी भविष्य में उनकी पहचान और आजीविका का मुख्य जरिया बन जाएगी।

बदलते वक्त के साथ बढ़ी मांग

समय के साथ लोगों का जुड़ाव टिंकू की कला के प्रति बढ़ता गया। धीरे-धीरे उनके गायन की चर्चा होने लगी और उन्हें शादियों, मुंडन, जनेऊ संस्कार और श्राद्ध जैसे कार्यक्रमों में बुलाया जाने लगा। टिंकू का संघर्ष रंग लाया और आज स्थिति यह है कि मटिहानी प्रखंड के लगभग 20 गांवों में उनके कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। बीते 33 वर्षों से अधिक समय से वे निरंतर गायकी की दुनिया से जुड़े हुए हैं। अब उन्हें लोगों का भरपूर स्नेह और सम्मान मिलता है, और वे एक स्थापित लोक गायक के रूप में पहचाने जाते हैं।

आज एक कार्यक्रम की फीस 30 हजार रुपये तक

टिंकू के करियर में अब एक बड़ा बदलाव आया है। आज उनकी गायकी की मांग काफी अधिक बढ़ चुकी है, जिसके चलते कई आयोजक पहले से ही उनके कार्यक्रमों की एडवांस बुकिंग करवाते हैं। उन्होंने बताया कि अब वे एक कार्यक्रम के लिए लगभग 25 हजार से 30 हजार रुपये तक का शुल्क लेते हैं। इसके अलावा, कार्यक्रमों के दौरान मिलने वाले पुरस्कारों से भी उनकी अतिरिक्त आय हो जाती है। टिंकू के अनुसार, एक कार्यक्रम के खर्चों को निकाल देने के बाद उन्हें लगभग 10 हजार से 15 हजार रुपये तक की शुद्ध बचत हो जाती है। महीने भर में कार्यक्रमों की व्यस्तता के अनुसार उनकी कुल कमाई 50 हजार रुपये के आंकड़े को पार कर जाती है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

टिंकू का मानना है कि लोक गायकी महज मनोरंजन का एक साधन नहीं है, बल्कि यदि इसे पूरी ईमानदारी, मेहनत और जुनून के साथ किया जाए, तो यह रोजगार का एक बेहतरीन माध्यम बन सकती है। उन्होंने दिखाया है कि एक साधारण गांव से निकलकर भी व्यक्ति अपनी कला के दम पर सम्मान और आर्थिक स्वावलंबन हासिल कर सकता है। गांव की गलियों से शुरू हुआ उनका यह सफर आज एक सफल करियर की मिसाल बन चुका है।

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