पश्चिम बंगाल में ईसाई परिवारों पर हमले का आरोप
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में तीन ईसाई परिवारों को निशाना बनाने और उन्हें अपना धर्म बदलने के लिए मजबूर करने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया है और राजनीतिक गलियारों में इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और लोक लेखा समिति के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल ने इस मामले को लेकर सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उन्होंने शाह को दो पन्नों का पत्र लिखकर 13 नामजद आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी और इस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
घटना का विवरण और आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना चंद्रकोणा थाने के अंतर्गत आने वाले पटलापुर गांव से संबंधित है। केसी वेणुगोपाल द्वारा किए गए दावे के मुताबिक, दुर्गा पूजा के उत्सव के दौरान 18 से 20 अक्टूबर के बीच इन तीन ईसाई परिवारों को लगातार निशाना बनाया गया। आरोप है कि इन परिवारों के साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित भी किया गया। मुख्य उद्देश्य उन्हें ईसाई धर्म त्यागने और अन्य धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाना था।
पत्र में विस्तार से बताया गया है कि जब परिवारों ने धर्म परिवर्तन करने से साफ इनकार कर दिया, तो उनके खिलाफ हिंसा का सहारा लिया गया। वेणुगोपाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि इस दौरान एक महिला के सिर पर चोट पहुंचाई गई, जिसकी वजह से वह बेहोश तक हो गई थी। इसके अलावा, एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को भी निशाना बनाया गया। उसे गला दबाने और अपहरण करके बलात्कार करने की भयानक धमकियां दी गई हैं।
जबरन अनुष्ठान और धमकियों का सिलसिला
कांग्रेस सांसद ने अपने पत्र में यह भी दावा किया है कि 19 अक्टूबर को इन तीनों परिवारों को जबरन उनके घर से ले जाया गया और पड़ोसी डिंगल गांव के एक दुर्गा पूजा पंडाल में ले जाया गया। वहां लोगों की भारी भीड़ के सामने उन्हें जबरदस्ती अंजलि अर्पित करने और 'शुद्धीकरण' की रस्म निभाने के लिए विवश किया गया। परिवारों को यह भी धमकाया गया कि अगर उन्होंने इस घटना की सूचना पुलिस को दी, तो उन्हें जिंदा जला दिया जाएगा।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
केसी वेणुगोपाल ने पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, घटना के पहले दिन ही शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। काफी दबाव और एक वकील के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार 20 अक्टूबर को 13 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई।
सांसद ने गृह मंत्री को दी गई जानकारी में बताया कि इन धाराओं के तहत हत्या का प्रयास, आपराधिक अतिचार, निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला, आपराधिक धमकी, महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना और चोरी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। उन्होंने आग्रह किया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत लागू सख्त प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
धार्मिक स्वतंत्रता का संवैधानिक मुद्दा
वेणुगोपाल ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने और उसका प्रचार करने की पूर्ण स्वतंत्रता है। उन्होंने उन संगठनों और व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है जो नफरत फैलाने या धार्मिक आस्थाओं पर दबाव बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा जैसा पर्व बंगाल की संस्कृति में सभी धर्मों के लोगों के स्वागत के लिए जाना जाता है। ऐसे कृत्य न तो हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व करते हैं और न ही बंगाल की समावेशी संस्कृति का।
पुलिस का पक्ष
इस पूरे मामले पर पुलिस प्रशासन ने भी अपना बयान दिया है। इस सप्ताह की शुरुआत में पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तीन परिवारों के कुल नौ सदस्यों की ओर से शिकायत मिली है। शिकायत में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि 18 और 19 अक्टूबर को उन्हें धमकाया गया, उन पर हमले किए गए और उनकी मर्जी के बिना धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। पुलिस का कहना है कि दर्ज शिकायतों के आधार पर मामला आगे बढ़ाया जा रहा है और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए इलाके में सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया है। हालांकि, जांच प्रक्रिया के बीच में होने का हवाला देते हुए पुलिस ने अभी तक किसी भी आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।
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