कम पानी में बंपर मुनाफे की खेती
बुंदेलखंड के कई इलाकों में पानी की किल्लत एक पुरानी समस्या है। आलम यह है कि सिंचाई के लिए तो दूर, लोगों को पीने के पानी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। अलनीनो के प्रभाव के कारण इस बार मानसून ने भी साथ नहीं दिया, जिससे नदी, तालाब और बांध तक खाली रह गए हैं। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने उन किसानों के लिए खास सलाह दी है जो रबी के सीजन में पानी की कमी से जूझ रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, कम पानी और कम लागत में सरसों की खेती किसानों की तकदीर बदल सकती है और उन्हें आर्थिक तंगी से राहत दिला सकती है।
सिर्फ 5 हजार की लागत और 50 हजार की कमाई
खेती-किसानी को जीवन का मुख्य आधार मानने वाले किसानों के लिए यह मौसम काफी महत्वपूर्ण है। जिन किसानों के पास जल संसाधन बेहद सीमित हैं और जो रबी की फसल में बमुश्किल एक सिंचाई ही कर सकते हैं, उनके लिए सरसों एक आदर्श विकल्प है। सरसों की बुआई से लेकर कटाई तक का कुल खर्च लगभग 5 हजार से 7 हजार रुपये के बीच आता है। यदि सही तकनीक और उन्नत बीजों का चयन किया जाए, तो किसान प्रति एकड़ 6 से 10 क्विंटल तक का उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। बाजार भाव के अनुसार, इतनी पैदावार से किसान आसानी से 50 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।
बुआई का सही समय और उन्नत किस्में
सागर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र, बिजोरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर आशीष त्रिपाठी के अनुसार, मिट्टी की प्रकृति के अनुसार बुआई का निर्णय लेना चाहिए। जिन किसानों के पास हल्की रेतीली या मध्यम उपजाऊ मिट्टी है, उनके लिए अक्टूबर के अंतिम दिनों से 5 नवंबर तक का समय बुआई के लिए सबसे उपयुक्त है। बेहतर उत्पादन पाने के लिए बाजार में उपलब्ध कुछ उन्नत किस्मों का चुनाव करना चाहिए:
- गिरिराज
- RH-761
- RH-726
- RBM 1 और RBM 2
- TR MR 1165
- उपलब्ध हाइब्रिड किस्में
उर्वरक प्रबंधन और सिंचाई की तकनीक
खेती को सफल बनाने के लिए बुआई की प्रक्रिया को सही ढंग से करना अनिवार्य है। किसान प्रति एकड़ 1 से 1.5 किलोग्राम बीज का प्रयोग कर सकते हैं। खेत तैयार करते समय उर्वरकों का उचित मात्रा में उपयोग करना जरूरी है। बुआई के बाद पहली सिंचाई लगभग 20 से 25 दिन की अवधि में की जानी चाहिए। इस समय 25 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ की दर से देने पर पौधों की बढ़वार शानदार होती है, जो अंततः बेहतर उत्पादन में मददगार साबित होती है।
माहू कीट से बचाव के उपाय
सरसों की खेती में माहू (Aphid) का प्रकोप किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि अगर किसान समय रहते बुआई पूरी कर लेते हैं, तो माहू का खतरा काफी कम हो जाता है। यदि बुआई में देरी होती है, तो दिसंबर के महीने में माहू का हमला बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
- सबसे पहले खेत के किनारों पर लगे पौधों का नियमित निरीक्षण करें, क्योंकि माहू का संक्रमण अक्सर बाहरी पौधों से ही शुरू होता है।
- प्रभावित पत्तियों को समय रहते तोड़कर नष्ट कर दें ताकि संक्रमण पूरे खेत में न फैले।
- यदि स्थिति अधिक गंभीर हो, तो रस चूसने वाले कीटों के लिए स्वीकृत सर्वांगी कीटनाशकों का प्रयोग करें। इसमें इमिडाक्लोप्रिड या थायमेथोक्सम का छिड़काव किया जा सकता है।
मौसम की अनिश्चितताओं के बीच भी सरसों की फसल एक सुरक्षित विकल्प है जो छोटे और बड़े दोनों प्रकार के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बना सकती है।
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