फिल्म रिव्यू: तू है मेरी किरण, सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की यह फिल्म समय और पैसों की बर्बादी

सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल अभिनीत फिल्म तू है मेरी किरण अपनी कमजोर पटकथा और खराब निर्देशन के कारण दर्शकों को निराश करती है। यह फिल्म साइकोलॉजिकल सस्पेंस और टाइम ट्रैवल जैसे विषयों को संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।

एक बेहतरीन कॉन्सेप्ट जो कहानी में हुआ फेल

सिनेमा जगत में जब कोई अनोखा और शानदार विचार एक मजबूत पटकथा के बिना पर्दे पर उतरता है, तो उसका परिणाम बेहद निराशाजनक होता है। निर्देशक करण रावल की फिल्म तू है मेरी किरण इसका एक सटीक उदाहरण बनकर सामने आई है। इस फिल्म में टाइम ट्रैवल और मनोवैज्ञानिक सस्पेंस जैसे दिलचस्प विषयों को चुना गया था, लेकिन कमजोर लेखन के चलते यह पूरी तरह से प्रभावित करने में नाकाम रही है।

एक्टर्स की मेहनत पर फिरा पानी

फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल जैसे बेहतरीन कलाकारों ने मुख्य भूमिका निभाई है। इन एक्टर्स ने अपनी तरफ से दमदार अभिनय करने की भरपूर कोशिश की है, लेकिन फिल्म की दिशाहीन कहानी और बेहद साधारण स्क्रीनप्ले के कारण उनका अभिनय भी दर्शकों को फिल्म से जोड़े रखने में असमर्थ रहा है।

क्यों देखें या न देखें

एकतरफा कहानी और बिना किसी ठोस आधार के आगे बढ़ती यह फिल्म दर्शकों का मनोरंजन करने में विफल रहती है। अगर आप एक अच्छी कहानी और सस्पेंस की तलाश में हैं, तो यह फिल्म आपके लिए समय और पैसे की बर्बादी साबित हो सकती है। पटकथा की खामियों ने इस फिल्म के शानदार विषयों को पूरी तरह से दबा दिया है।

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