क्या पाकिस्तान के सरकारी तंत्र से पलायन कर रहे हैं अफसर?
पाकिस्तान की बदहाल होती अर्थव्यवस्था और अस्थिर राजनीतिक स्थिति के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया है कि पाकिस्तान के संघीय सरकार में तैनात 2,500 से अधिक अधिकारियों के पास दोहरी नागरिकता है और वे पाकिस्तान को छोड़कर विदेशों में स्थायी रूप से बसने की योजना बना रहे हैं। यह स्थिति पाकिस्तान के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा रही है, क्योंकि ये अधिकारी एक तरफ सरकारी पदों पर रहकर सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनका भविष्य विदेश की धरती पर सुरक्षित दिख रहा है।
दोहरी नागरिकता और विदेशों में बसावट
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से इस गंभीर मुद्दे को उठाया है। रिपोर्टों के अनुसार, संघीय सरकार के ये अधिकारी कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और विभिन्न यूरोपीय देशों में अपने ठिकाने बना चुके हैं। हालांकि, रक्षा मंत्री के दावों और आधिकारिक जांच रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने अधिकारी वर्तमान में देश छोड़कर जा चुके हैं, लेकिन 2,500 अधिकारियों का आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि सरकारी तंत्र के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
पुर्तगाल क्यों है अधिकारियों की पहली पसंद?
मौजूदा समय में पाकिस्तानी नौकरशाहों और रईस वर्ग के लिए पुर्तगाल एक पसंदीदा डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। सवाल यह है कि आखिर पुर्तगाल ही क्यों? इसका मुख्य कारण वहां की रेजिडेंसी-बाय-इन्वेस्टमेंट नीति है। यह नीति उन लोगों को बेहद आसान तरीके से वहां बसने और निवेश करने की अनुमति देती है, जो पुर्तगाल में संपत्ति खरीदते हैं। इसके माध्यम से उन्हें पूरे EU यानी यूरोपीय संघ में कहीं भी आने-जाने की आजादी मिल जाती है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट्स की मानें, तो पाकिस्तानी अधिकारी धड़ल्ले से पुर्तगाल में संपत्तियां खरीद रहे हैं। आम जनता के मन में अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि एक सरकारी वेतन पाने वाला अफसर विदेश में आलीशान घर खरीदने के लिए इतना पैसा कहां से ला रहा है?
डूबते जहाज से भागने की कोशिश
इस पूरे घटनाक्रम पर विशेषज्ञों की राय काफी तीखी है। पाकिस्तान के मामलों के जानकार और पूर्व भारतीय खुफिया अधिकारी तिलक देवाशेर ने इसे लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि पाकिस्तान के भीतर का सिस्टम अंदर ही अंदर बुरी तरह सड़ रहा है। उन्होंने इसे डूबते हुए जहाज से भागने वाले चूहों की संज्ञा दी है। उनका मानना है कि नौकरशाहों को जमीन पर मची राजनीतिक उथल-पुथल की भनक सबसे पहले लगती है, इसलिए वे समय रहते अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए देश छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
पब्लिक अकाउंट्स कमेटी की जांच
सरकारी अधिकारियों की इस संदिग्ध कार्यशैली पर लगाम लगाने के लिए साल 2025 से ही PAC यानी पब्लिक अकाउंट्स कमेटी जांच कर रही है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि सरकारी पदों पर बैठकर लोगों ने घोटालों और भ्रष्टाचार के जरिए विदेशों में अपार संपत्ति कैसे बनाई है। इन सरकारी अधिकारियों की विदेशों में निवेश की यह प्रवृत्ति पाकिस्तान की आर्थिक और नैतिक स्थिति पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। एक ऐसे देश में, जहां जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है, वहां अधिकारियों का इस तरह से विदेशों में अपनी संपत्ति और नागरिकता सुरक्षित करना उनकी देश के प्रति निष्ठा पर भी सवालिया निशान लगाता है।
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