नगर परिषद कार्यालय की दयनीय स्थिति
राजस्थान के करौली में शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने की जिम्मेदारी जिस नगर परिषद पर है, उसका अपना ही कार्यालय दुर्दशा का शिकार बना हुआ है। बाहर से देखने पर कार्यालय की इमारत व्यवस्थित और ठीक-ठाक लगती है, लेकिन अंदर के हालात प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल रहे हैं। सरकारी दफ्तर में घुसते ही सबसे पहले दीवारों पर गुटखे की पीक के गहरे निशान और बदबू का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही, आम नागरिकों की सुविधा के लिए बनवाए गए सार्वजनिक शौचालय महीनों से ताले में बंद पड़े हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
दीवारों पर गंदगी का अंबार
नगर परिषद कार्यालय में रोजाना शहर भर से सैकड़ों लोग अपने महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पहुंचते हैं। कोई अपने मकान का पट्टा बनवाने आता है, तो कोई जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र या अन्य शासकीय दस्तावेजों के निपटारे के लिए घंटों कतार में खड़ा रहता है। ऐसे में यह कार्यालय जनसुविधा का प्रमुख केंद्र है। हालांकि, यहां की हकीकत यह है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने वाले कमरों की दीवारें तक गुटखे की पीक से सनी हुई हैं। दीवारों पर जगह-जगह मौजूद ये लाल निशान कार्यालय की साफ-सफाई के दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। फरियादियों का कहना है कि कार्यालय की ऐसी गंदगी देखकर उन्हें बेहद असहज महसूस होता है और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगते हैं।
लोगों में भारी नाराजगी
जब जमीनी स्तर पर इस बदहाली की पड़ताल की गई, तो वहां मौजूद लोगों ने अपनी पीड़ा साझा की। कार्यालय में आए कई लोगों ने कहा कि जब नगर परिषद शहर की स्वच्छता व्यवस्था को दुरुस्त करने का ढिंढोरा पीटती है, तो फिर अपने ही कार्यालय को स्वच्छ क्यों नहीं रख पा रही है? लोगों का साफ कहना है कि जो संस्थान खुद को साफ नहीं रख सकता, उससे पूरे शहर की सफाई की उम्मीद करना बेमानी है। दीवारों पर फैली गंदगी इस बात का सबूत है कि यहां के प्रबंधन को स्वच्छता से कोई सरोकार नहीं है।
जुर्माने की चेतावनी का कोई असर नहीं
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि नगर परिषद कार्यालय के अंदर ही दीवारों पर गुटखा खाकर थूकने पर जुर्माना लगाने और ऐसा न करने की सख्त चेतावनी के निर्देश चस्पा किए गए हैं। हालांकि, इन चेतावनियों के बावजूद दीवारों पर ताजी और पुरानी पीक के निशान यह दर्शाते हैं कि प्रशासन के अपने ही नियमों का मजाक बनाया जा रहा है। सवाल यह है कि यदि नियमों का पालन सरकारी कर्मचारी नहीं करेंगे, तो आम जनता से अनुपालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है? यह स्थिति अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है।
बंद शौचालय और नागरिकों की मुसीबत
नगर परिषद कार्यालय में व्याप्त गंदगी केवल दीवारों तक ही सीमित नहीं है। आम नागरिकों की सुविधा के लिए निर्मित सार्वजनिक शौचालय भी पिछले कई महीनों से ताले में बंद हैं। इस कारण कार्यालय के जरूरी कामों से आने वाले लोगों को शौचालय की तलाश में इधर-उधर भटकने को मजबूर होना पड़ता है। वृद्ध लोगों और महिलाओं के लिए यह स्थिति सबसे अधिक कष्टदायक है। हैरानी इस बात की है कि जो संस्था शहर में सार्वजनिक शौचालयों की निगरानी करती है, वही अपने परिसर में बने शौचालयों को चालू रखने में नाकाम साबित हो रही है।
प्रशासन का जवाब और भविष्य की योजना
इस पूरे मामले पर जब नगर परिषद के आयुक्त कालूराम से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि यह समस्या उनके संज्ञान में है। उन्होंने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने कुछ समय पहले ही अपना पदभार ग्रहण किया है और जल्द ही स्थिति में सुधार किया जाएगा। आयुक्त ने आश्वासन दिया कि आने वाले दिवाली के त्योहार से पहले पूरे नगर परिषद कार्यालय की रंगाई-पुताई करवाई जाएगी, ताकि परिसर का स्वरूप बदला जा सके। साथ ही, उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में यदि कार्यालय में गंदगी पाई गई या किसी कर्मचारी द्वारा स्वच्छता नियमों की अनदेखी की गई, तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अब यह देखने वाली बात होगी कि क्या आयुक्त का यह आश्वासन केवल दावों तक ही सीमित रहेगा या वास्तव में करौली नगर परिषद का कार्यालय अपनी बदहाली से मुक्ति पाएगा।
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