सीमा पर हमला और ट्रकों में आगजनी
पाकिस्तान और ईरान के बीच स्थित सीमावर्ती इलाके में तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब रिमदान के ट्रेड गेट 250 के पास हथियारबंद लोगों ने हमला कर दिया। इस हिंसक घटना में ताजे फलों से लदे हुए कई भारी ट्रकों को आग के हवाले कर दिया गया। हमलावरों और सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी की भी खबरें हैं, जिससे पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। स्थानीय व्यापारिक समुदाय के लिए यह घटना किसी बड़े आर्थिक झटके से कम नहीं है, क्योंकि इससे करोड़ों रुपये के निर्यात का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
तेहरान की कड़ी चेतावनी
इस हमले से पहले ही ईरान ने पाकिस्तान को सख्त लहजे में चेतावनी दी थी। ईरान के एक सांसद ने साफ कहा था कि यदि पाकिस्तान की ओर से ईरानी ट्रकों को रोकने का सिलसिला जारी रहा, तो तेहरान अपने छोर से सीमा को पूरी तरह से बंद कर देगा। रिपोर्ट के अनुसार, हमलावरों ने न केवल ट्रकों को निशाना बनाया, बल्कि वहां मौजूद व्यावसायिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया। फिलहाल, पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेरकर सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है ताकि हमलावरों का पता लगाया जा सके। साथ ही, खुफिया एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या इस हमले का संबंध प्रांत में सक्रिय उग्रवादी समूहों से है।
आसिम मुनीर की यात्रा और विफल कोशिशें
यह पूरा विवाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की हालिया ईरान यात्रा के बाद भी सुलझता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। बताया जा रहा है कि अपनी तेहरान यात्रा के दौरान मुनीर ने अमेरिका का संदेश ईरान तक पहुंचाया था। इस दौरे पर सीमा के रास्ते व्यापार और ट्रकों की आवाजाही का मुद्दा भी मुख्य रूप से उठा था। ईरान-पाकिस्तान संसदीय मैत्री समूह के प्रमुख फदाहोसैन मलिकी ने ईरानी समाचार एजेंसी ILNA को बताया कि मुनीर ने तेहरान से ही सीमा खोलने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, जमीनी हकीकत में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। पाकिस्तान की ओर से ईरान जाने वाले वाहनों को तो अनुमति मिल गई, लेकिन ईरान से पाकिस्तान में प्रवेश करने वाले ट्रकों पर रोक अब भी बरकरार है।
ईरान का अमेरिकी दबाव का दावा
फदाहोसैन मलिकी ने इस मामले को लेकर काफी नाराजगी जताई है। उन्होंने पाकिस्तान के राजदूत को संसद में तलब करने की मांग की है। मलिकी का यह भी आरोप है कि पाकिस्तान की यह हरकत ईरान पर बनाए जा रहे अमेरिकी राजनीतिक दबाव का ही एक हिस्सा हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह गतिरोध बना रहा तो ईरान के पास सीमा बंद करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा।
ड्राइवरों की दुर्दशा और व्यापारिक संकट
गबद-रिमदान और ताफ्तान की सीमा चौकियों पर 20 अक्टूबर से ही वाणिज्यिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हैं। पाकिस्तान प्रशासन का तर्क है कि सुरक्षा बढ़ाने और तस्करी पर लगाम लगाने के लिए यह एक अस्थायी कदम है, जबकि ईरान का कहना है कि यह तकनीकी समस्याओं और एहतियाती सुरक्षा उपायों के कारण हुआ है। सीमा के दोनों ओर फंसे सैकड़ों ट्रकों के कारण स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। समाचार एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, फंसे हुए ट्रक ड्राइवरों को पीने के पानी और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। ड्राइवर अब्दुल गनी ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि चालक इस समय बेहद मुश्किल और असुरक्षित परिस्थितियों में दिन गुजारने को मजबूर हैं।
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