साइबर जालसाजों पर पुलिस का बड़ा प्रहार
राजस्थान के अजमेर में साइबर ठगी करने वाले एक सक्रिय गिरोह के खिलाफ पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने ऑपरेशन मूल हंट के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए करीब 14 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में मुख्य आरोपी सबरे आलम को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। पुलिस ने आरोपी को प्रोडक्शन वारंट के जरिए हिरासत में लिया है और अब उससे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की कोशिश की जा रही है।
ठगी का अनोखा और शातिर तरीका
पुलिस की शुरुआती जांच और पूछताछ में साइबर अपराधियों के काम करने का एक व्यवस्थित तरीका सामने आया है। यह गिरोह सबसे पहले आम लोगों को अपने झांसे में लेता था। धोखे से उनसे उनके आधार कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल किए जाते थे। इन दस्तावेजों का उपयोग करके अलग-अलग बैंकों में फर्जी खाते खुलवाए जाते थे। मुख्य आरोपी सबरे आलम और उसके साथी इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को जमा करने और उसे आगे ट्रांसफर करने के लिए करते थे। एक बार ठगी की गई राशि इन खातों में आने के बाद, उसे तुरंत अलग-अलग जगहों पर भेज दिया जाता था ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।
कैसे शुरू हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले की जड़ें मुरादाबाद के निवासी रोहित के साथ हुई 14 लाख रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ी हैं। पीड़ित की शिकायत के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और छानबीन शुरू की। पुलिस ने सबसे पहले इस मामले में घुघरा निवासी मुकेश और राकेश को गिरफ्तार किया था। इन दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को सबरे आलम की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले। जांच में पता चला कि मुकेश ठगी के माध्यम से जुटाई गई सारी रकम सबरे आलम तक पहुंचाता था। इसी कड़ी को जोड़ते हुए पुलिस ने सबरे आलम तक अपनी पहुंच बनाई और उसे गिरफ्तार किया।
नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
पुलिस फिलहाल गिरफ्तार मुख्य आरोपी को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि सबरे आलम से मिलने वाली जानकारियों के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सकेगी। पुलिस इस बात की बारीकी से पड़ताल कर रही है कि यह जालसाज किन-किन बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे थे और इस पूरी प्रक्रिया में और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं।
जनता के लिए चेतावनी
पुलिस ने आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अपनी व्यक्तिगत जानकारी, आधार कार्ड या बैंक संबंधी दस्तावेज किसी भी अनजान व्यक्ति को साझा न करें। साइबर अपराधी इसी तरह की दस्तावेजों का इस्तेमाल करके फर्जी खाते खुलवाते हैं और फिर उन्हीं के नाम पर अपराध को अंजाम देते हैं। पुलिस का कहना है कि पूछताछ पूरी होने के बाद इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ सकती है। जांच टीम इस बात पर भी जोर दे रही है कि ठगी गई 14 लाख रुपये की पूरी राशि की रिकवरी कैसे की जाए और इस नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं को किस तरह से जड़ से खत्म किया जाए।
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