ब्रिटिश संसद में जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय का समर्थन, आतंकवाद पर जताई गई गहरी चिंता

ब्रिटेन की संसद में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर पर भारत की संप्रभुता को मान्यता देते हुए 26 अक्टूबर को विलय दिवस के रूप में सराहा गया है।

विलय दिवस के उपलक्ष्य में ब्रिटिश संसद में प्रस्ताव

जम्मू-कश्मीर के भारतीय संघ में संवैधानिक विलय की वर्षगांठ करीब आते ही ब्रिटेन की संसद में एक विशेष प्रस्ताव लाया गया है। इस प्रस्ताव के माध्यम से जम्मू-कश्मीर पर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और पूर्ण संप्रभुता का स्पष्ट समर्थन दर्ज किया गया है। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य 26 अक्टूबर 1947 के उस ऐतिहासिक घटनाक्रम को रेखांकित करना है, जब महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय के दस्तावेजों यानी इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर किए थे। ब्रिटिश सांसदों ने इस दिन को उन सभी समुदायों के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और महत्वपूर्ण माना है, जो इस विलय की सालगिरह मनाते हैं।

आतंकवादी हिंसा और नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता

इस संसदीय दस्तावेज में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। प्रस्ताव में उन सभी निर्दोष नागरिकों के प्रति संवेदना जाहिर की गई है जिन्होंने क्षेत्र में हुई आतंकवादी घटनाओं में अपनी जान गंवाई या जो गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसमें विशेष रूप से पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में आतंकवाद से प्रभावित लोगों की स्थिति का उल्लेख किया गया है। प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि हिंसा के कारण केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों के जांबाज जवान भी शहीद हुए हैं, जिसका व्यापक और दुखद असर पूरे समाज पर पड़ रहा है।

कश्मीरी पंडितों के खिलाफ टारगेट किलिंग का उल्लेख

ब्रिटिश संसद में पेश इस प्रस्ताव का एक बड़ा हिस्सा कश्मीरी पंडित समुदाय की दुर्दशा पर केंद्रित है। इसमें कश्मीरी पंडितों को चुन-चुनकर निशाना बनाने की घटनाओं यानी टारगेट किलिंग का कड़ा संज्ञान लिया गया है। प्रस्ताव में यह चिंता जताई गई है कि जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों में यह समुदाय आज भी दहशत और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर है। समुदाय की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रस्ताव में उनके सम्मानजनक जीवन की वकालत की गई है। साथ ही, भारत और ब्रिटेन के बीच मौजूद मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को दोहराते हुए जम्मू-कश्मीर मूल के उन ब्रिटिश नागरिकों के योगदान की सराहना की गई है जो दोनों देशों को जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

संवाद और शांतिपूर्ण कार्यक्रमों का आह्वान

ब्रिटिश सांसदों ने ब्रिटेन की धरती पर आयोजित होने वाले जम्मू-कश्मीर से संबंधित शांतिपूर्ण कार्यक्रमों और स्मरण सभाओं का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इस तरह के आयोजन इतिहास की बेहतर समझ विकसित करने, सांस्कृतिक मेलजोल बढ़ाने और नागरिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए जरूरी हैं। प्रस्ताव में जोर दिया गया है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े जटिल मुद्दों को हल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों और संप्रभु सीमाओं का सम्मान करते हुए रचनात्मक संवाद की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

प्रस्ताव लाने वाले सांसदों का विवरण

यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन द्वारा पेश किया गया है, जो हैरो ईस्ट संसदीय क्षेत्र से चुनकर आते हैं। प्रस्ताव की आधिकारिक प्रति पर अन्य प्रमुख सांसदों का भी समर्थन दर्ज है, जिनमें डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी के सांसद जिम शैनन और लेबर पार्टी की सांसद गिल फर्निस शामिल हैं। ब्रिटिश संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, बॉब ब्लैकमैन ने 12 अक्टूबर 2026 को इस पर हस्ताक्षर किए थे, जबकि जिम शैनन और गिल फर्निस ने 13 अक्टूबर 2026 को इस प्रस्ताव को अपना समर्थन दिया। इससे पहले अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर द्वारा जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताए जाने के बाद पाकिस्तान में खासी खलबली मची थी, और अब ब्रिटिश संसद का यह कदम भारत के रुख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती प्रदान करता है।

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