सर्दियों में पशुओं के पोषण की चुनौती
सर्दियों के दौरान पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मवेशियों के लिए पर्याप्त और पौष्टिक हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना होती है। चारे की कमी का सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे दूध उत्पादन में भी गिरावट देखी जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए धान की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों का उपयोग करना एक बेहतरीन विकल्प है।
बरसीम और जई की खेती का महत्व
लखीमपुर के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सचान का कहना है कि ठंड के दिनों में पशुओं को केवल सूखा चारा देना पर्याप्त नहीं होता, उन्हें संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। किसान खाली पड़े खेतों में बरसीम और जई की बुवाई कर सकते हैं।
- बरसीम: इसकी खासियत यह है कि एक बार बुवाई करने के बाद इसकी कई बार कटाई की जा सकती है, जिससे लंबे समय तक पशुओं को हरा चारा मिलता रहता है।
- जई: यह भी पशुओं के लिए एक अत्यंत लाभकारी और पौष्टिक चारा फसल मानी जाती है।
इन फसलों को उगाकर किसान न केवल अपने खर्च में कटौती कर सकते हैं, बल्कि अपने पशुओं को अधिक स्वस्थ भी रख सकते हैं। धान की कटाई के बाद तुरंत इन फसलों की तैयारी करना पशुपालकों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है।
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