मंडी का यह पिता बेटे की जान बचाने के लिए कर्ज में डूबा, इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक पिता अपने 6 वर्षीय बेटे की दोनों किडनियां खराब होने के बाद इलाज के लिए आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और उसने समाज से मदद की गुहार लगाई है।

सराज के एक परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कलहणी पंचायत में एक परिवार इस समय भीषण संकट के दौर से गुजर रहा है। यहां के निवासी योगराज के परिवार पर अचानक मुसीबतों का ऐसा साया पड़ा है कि उनकी पूरी जमा-पूंजी और हिम्मत जवाब दे गई है। योगराज के 6 वर्षीय बेटे दिव्यांशु की दोनों किडनियां खराब हो गई हैं, जिसके कारण पूरा परिवार गहरे सदमे और आर्थिक तंगी में है। दिहाड़ी-मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालने वाले योगराज के लिए यह स्थिति किसी पहाड़ से कम नहीं है, क्योंकि उनके कंधों पर न केवल बेटे का इलाज है, बल्कि पूरे परिवार की जिम्मेदारियां भी हैं।

बीमारी का लंबा संघर्ष

योगराज बताते हैं कि उन्हें करीब तीन साल पहले इस गंभीर बीमारी का पता चला था। उस समय दिव्यांशु केवल दो साल का था। डॉक्टरों ने शुरुआती जांच में ही स्पष्ट कर दिया था कि बच्चे की एक किडनी पूरी तरह से डैमेज हो चुकी है और उसे शरीर से निकालना ही एकमात्र विकल्प है। चिकित्सकों ने चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते ऐसा नहीं किया गया, तो संक्रमण दूसरी किडनी पर भी बुरा असर डालेगा। बेटे को बचाने की उम्मीद में योगराज ने हर संभव कोशिश की और रिश्तेदारों, परिचितों के साथ-साथ बैंक से भी लोन लिया। अब तक वे इलाज के नाम पर कुल 15 लाख रुपये का कर्ज ले चुके हैं, लेकिन बदकिस्मती से बच्चे की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है।

इलाज का खर्च और नई चुनौतियां

लगभग एक साल पहले, योगराज इलाज के लिए अपने बेटे को लेकर पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि वहां से बेटा स्वस्थ होकर लौटेगा, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें और भी बुरी खबर दी। पता चला कि दिव्यांशु की दूसरी किडनी भी अब काम करना बंद कर रही है। अब मासूम को जीवित रखने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट की अनिवार्य आवश्यकता है, जिसमें चिकित्सकों ने 8 से 10 लाख रुपये तक के खर्च का अनुमान जताया है। इसी बीच, दिव्यांशु एक और गंभीर दिमागी बीमारी की चपेट में आ गया है, जिसका उपचार भी चंडीगढ़ में ही चल रहा है। इस दोहरी मार ने पिता की आर्थिक कमर तोड़ दी है।

सरकारी सहायता और सामाजिक मदद की गुहार

योगराज के घर में दिव्यांशु के अलावा दो बेटियां भी हैं, जो क्रमश: दूसरी और चौथी कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं। वर्तमान में उनकी पत्नी कृष्णा देवी लगातार पीजीआई चंडीगढ़ में रहकर बेटे की देखरेख कर रही हैं, जबकि दोनों बेटियों को उन्होंने पड़ोसियों के भरोसे छोड़ा हुआ है। योगराज ने बताया कि उन्होंने उपायुक्त मंडी को एक औपचारिक पत्र लिखकर सरकारी सहायता की मांग की है, लेकिन अभी तक उन्हें कोई मदद नहीं मिल पाई है। अब यह असहाय पिता मीडिया के माध्यम से समाज के सक्षम और दानशील व्यक्तियों से गुहार लगा रहा है कि उनके बेटे की जान बचा ली जाए।

दिव्यांशु की मदद कैसे करें

डॉक्टरों के अनुसार, यदि जल्द से जल्द किडनी ट्रांसप्लांट नहीं किया गया तो बच्चे की जान पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है। यदि आप इस मासूम बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए आर्थिक सहयोग करना चाहते हैं, तो नीचे दी गई जानकारी के माध्यम से मदद भेज सकते हैं:

  • खाता धारक का नाम: योगराज
  • बैंक का नाम: स्टेट बँक ऑफ इंडिया, ब्रांच पंडोह
  • खाता संख्या: 40710783188
  • IFSC कोड: SBIN0014693
  • गूगल पे नंबर: 82199-95377

आपकी छोटी सी मदद इस पिता के लिए एक बड़ा सहारा बन सकती है और एक नन्ही जान को नई जिंदगी दे सकती है।

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