यूपी में वोटर लिस्ट विवाद पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा का बड़ा बयान, एसआईआर और फर्जी नामों पर दी स्थिति साफ

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची और एसआईआर प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने समाजवादी पार्टी की लिस्ट, डुप्लीकेट वोटर और फॉर्म 7 के गलत इस्तेमाल पर बड़ा खुलासा किया है।

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर गरमाया माहौल

उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) की पूरी प्रक्रिया पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी इस पूरी कवायद पर लगातार सवाल उठा रही है और निष्पक्षता पर गंभीर आरोप लगा रही है। इन तमाम विवादों, 16 लाख रहस्यमयी मतदाताओं, 80 हजार से अधिक ऑटो जनरेटेड फॉर्म और सपा द्वारा कराए गए एसआईआर ऑडिट के दावों के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने स्थिति स्पष्ट की है। एक विस्तृत बातचीत के दौरान उन्होंने अखिलेश यादव के गंभीर आरोपों से लेकर वोटर लिस्ट में मौजूद डुप्लीकेट नामों तक, हर बड़े सवाल पर सिलसिलेवार जवाब दिए।

वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नाम की समस्या और एसएसआर की तैयारी

मतदाता सूची में एसआईआर प्रक्रिया के बाद भी डुप्लीकेट नाम शामिल रहने के सवाल पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्वीकार किया कि अभी भी दोहराव की कुछ समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग हर दो से तीन महीने में वोटर लिस्ट से दोहराए गए नामों को हटाने और उन्हें दुरुस्त करने का काम लगातार करता रहता है।

नवदीप रिणवा ने आगामी योजना की जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 12 नवम्बर से नया एसएसआर (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) अभियान शुरू होने जा रहा है। इस संबंध में जो नए निर्देश जारी किए गए हैं और जिस आधुनिक सिस्टम को स्वीकृति दी गई है, उसका असर आने वाले दिनों में स्पष्ट तौर पर दिखाई देगा। चुनाव से ठीक पहले आगामी 4 जनवरी को एसएसआर की अंतिम वोटर लिस्ट का प्रकाशन किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अगर इस बार तय दिशा निर्देशों के अनुसार सही ढंग से काम पूरा किया गया, तो डुप्लीकेसी की समस्या समाप्त हो जाएगी और किसी को भी निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाने का अवसर नहीं मिलेगा।

एक व्यक्ति का 10 जगह नाम होना सामान्य नहीं, जांच के बाद होगी सख्त कार्रवाई

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा मतदाता सूची में गड़बड़ी और 3 लाख फर्जी वोटरों की मौजूदगी के आरोपों पर सीईओ ने स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी एक ही व्यक्ति का 10 अलग-अलग स्थानों पर नाम दर्ज होना किसी भी दृष्टिकोण से सामान्य बात नहीं है। ऐसे सभी मामलों की गहराई से जांच करवाई जाएगी।

नवदीप रिणवा ने कहा कि जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस तरह की चूक के लिए कौन जिम्मेदार है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने समाजवादी पार्टी की ओर से कराए गए एसआईआर ऑडिट की पहल का स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि सपा द्वारा सौंपी गई फर्जी मतदाताओं की सूची चुनाव आयोग को मिल चुकी है और उसे आधिकारिक जांच प्रक्रिया के लिए भेज दिया गया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और फॉर्म 6 का सच

दिल्ली में विपक्षी दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शनों और उसके उत्तर प्रदेश पर पड़ने वाले असर पर भी नवदीप रिणवा ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर चल रही ऐसी खबरों और चर्चाओं से आम लोगों के बीच मतदाता सूची और फॉर्म 6 को लेकर जागरूकता में बढ़ोतरी होती है, जो कि लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक पहलू है।

वही फॉर्म 6 को लेकर पैदा हुए भ्रम पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि केवल फॉर्म जमा होना और असल में नया वोटर बनना, दो अलग-अलग बातें हैं। जमा किए गए हर आवेदन को सीधे स्वीकार नहीं कर लिया जाता, बल्कि उसकी पूरी पड़ताल होती है। आयोग वर्तमान में एक ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहा है जिससे प्राप्त आवेदनों की सूची को पूरी तरह सार्वजनिक किया जा सके ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

फॉर्म 7 में गलत जानकारी दी तो भुगतनी होगी एक साल की सजा

विपक्ष की ओर से 85,854 ऑटो जनरेटेड वोटरों और फॉर्म 7 के कथित गलत इस्तेमाल पर उठाए गए सवालों का मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने खंडन किया। उन्होंने साफ किया कि आयोग के स्तर पर अपने आप या बिना सोचे-समझे कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सभी कदम अधिकृत अधिकारियों द्वारा कानून के मुताबिक लिए गए निर्णयों के आधार पर ही उठाए गए हैं।

इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति फॉर्म 7 में जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी दर्ज करता है, तो इसे कानूनन अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 1 साल की सजा हो सकती है।

एसआईआर के आंकड़ों का पूरा गणित और नए मतदाताओं के लिए अवसर

एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से 2.89 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने के दावों पर नवदीप रिणवा ने पूरा आंकड़ा सामने रखा। उन्होंने आंकड़ों का गणित समझाते हुए बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को राज्य की मतदाता सूची में कुल 15.44 करोड़ नाम दर्ज थे। इसके बाद जब 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट सूची जारी की गई, तो उसमें वैध मतदाताओं की संख्या 12.55 करोड़ से अधिक पाई गई।

उन्होंने यह भी बताया कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब एसएसआर की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। इस नए अभियान के जरिए युवा नागरिकों को मतदाता बनने का शानदार मौका मिलेगा। जिन युवाओं ने अक्टूबर में अपने 18 साल पूरे कर लिए हैं, वे इस प्रक्रिया में हिस्सा लेकर अपना नाम नई वोटर लिस्ट में जुड़वा सकते हैं।

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