अंतरिक्ष में चीन का कमाल: धरती से 400 KM ऊपर तियांगोंग स्टेशन पर उगाई चावल की नई फसल

चीन के तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर अंतरिक्ष यात्रियों ने बिना मिट्टी के चावल की फसल सफलतापूर्वक उगाई है और अब दूसरी पीढ़ी के बीजों पर शोध किया जा रहा है। यह प्रयोग भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए भोजन आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अंतरिक्ष में खेती: एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि

धरती की सतह से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर, जहां न तो परंपरागत खेत मौजूद हैं और न ही मिट्टी का वह पोषण जो पौधों को जीवन देता है, वहां चीन ने धान की एक सफल फसल लहलहाकर दुनिया को चौंका दिया है। चीन के तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर तैनात अंतरिक्ष यात्रियों ने धान उगाने के इस अनूठे प्रयोग के एक महत्वपूर्ण चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। 18 अक्टूबर 2026 को सामने आई विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, अंतरिक्ष में चावल की एक नई खेप की न केवल कटाई की गई है, बल्कि उन बीजों को बोकर अगली पीढ़ी के विकास की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह उपलब्धि भविष्य के उन अंतरिक्ष अभियानों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है, जो महीनों या सालों तक पृथ्वी से दूर रहेंगे।

फसल चक्र और माइक्रोग्रैविटी का प्रभाव

इस शोध की शुरुआत पृथ्वी से भेजे गए धान के चुनिंदा बीजों के साथ हुई थी। अंतरिक्ष स्टेशन पर इन बीजों को बेहद सावधानी के साथ बोया गया, जिसके बाद वैज्ञानिकों ने माइक्रोग्रैविटी यानी नगण्य गुरुत्वाकर्षण वाले माहौल में इनके अंकुरण से लेकर पौधे के बढ़ने, फूल आने और अंततः बीज बनने तक की पूरी प्रक्रिया का गहन अध्ययन किया। वर्तमान में, इसी स्टेशन पर तैयार हुए बीजों का उपयोग दूसरी पीढ़ी की फसल उगाने के लिए किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि क्या चावल का जैविक चक्र अंतरिक्ष में भी पृथ्वी की तरह सुचारू रूप से चल सकता है। चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के आंकड़ों के मुताबिक, यह महत्वाकांक्षी प्रयोग 2026 में प्रारंभ हुआ था, जिसका लक्ष्य बीज से लेकर पुनः बीज बनने तक के दो पूर्ण चक्रों को संपन्न करना है।

जेनेटिक स्टेबिलिटी और अंतरिक्ष का असर

एक बड़ा सवाल जो वैज्ञानिकों के सामने है, वह यह है कि क्या अंतरिक्ष का माहौल पौधों की अनुवंशिक स्थिरता यानी जेनेटिक स्टेबिलिटी को प्रभावित करता है। पृथ्वी पर मौजूद जीव और वनस्पतियां लाखों वर्षों से यहां के गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल विकसित हुई हैं। अंतरिक्ष की स्थिति पूरी तरह भिन्न है, जहां पौधों को धरती जैसा गुरुत्वाकर्षण अनुभव नहीं होता। शोधकर्ता इस बात की बारीकी से जांच कर रहे हैं कि क्या बार-बार पीढ़ी दर पीढ़ी अंतरिक्ष में उगने से पौधों के जीन या उनके एपिजेनेटिक्स में कोई मौलिक परिवर्तन आता है। इसके लिए अंतरिक्ष में तैयार बीजों की तुलना उन बीजों से की जा रही है जो 2022 में अंतरिक्ष में उगाए गए थे और जिन्हें शोध के लिए पृथ्वी पर वापस लाया गया था। उस समय के बीजों से धरती पर तीन अतिरिक्त पीढ़ियां उगाई गई थीं, जिससे मिलने वाले डेटा से यह तय करने में मदद मिलेगी कि अंतरिक्ष में रहने का प्रभाव अगली पीढ़ियों तक कितना और किस हद तक बना रहता है।

भविष्य के अंतरिक्ष मिशन और आत्मनिर्भरता

वर्तमान में, अंतरिक्ष यात्रियों को अपने भोजन की हर जरूरत के लिए पृथ्वी से होने वाली सप्लाई पर निर्भर रहना पड़ता है। यह निर्भरता लंबे मिशनों के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि वैज्ञानिक यह तकनीक पूरी तरह विकसित कर लेते हैं कि अंतरिक्ष में ही फसल उगाई जा सके, तो यह अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक बड़ा सहारा साबित होगा। तियांगोंग स्टेशन पर चल रहा यह प्रयोग सिर्फ एक वैज्ञानिक जिज्ञासा नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक ऐसी तकनीक विकसित करने का प्रयास है, जिससे अंतरिक्ष की यात्राएं अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सकें।

तियांगोंग स्पेस स्टेशन का परिचय

तियांगोंग, जिसका चीनी भाषा में अर्थ ‘स्वर्ग में बना महल’ होता है, चीन द्वारा निर्मित एक आधुनिक अंतरिक्ष स्टेशन है। वर्ष 2021 से ही यह पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित है और लगातार पृथ्वी का चक्कर लगा रहा है। यह स्टेशन तीन मुख्य मॉड्यूलों से बना है, जिनके नाम तियानहे, वेंटियन और मेंगटियन हैं। ये तीनों मॉड्यूल मिलकर अंतरिक्ष में एक टी-आकार की संरचना बनाते हैं। यह स्टेशन पृथ्वी से लगभग 340 से 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करने में लगभग 90 मिनट का समय लगता है। यहां यात्रियों के आवागमन के लिए शेनझोउ अंतरिक्ष यान का उपयोग किया जाता है, जबकि खाद्य सामग्री और जरूरी सामान तियानझोउ कार्गो यान के माध्यम से भेजे जाते हैं।

चीन ने अपना स्टेशन क्यों विकसित किया?

चीन द्वारा अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण करने के पीछे कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक और तकनीकी कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) कई देशों के सहयोग का परिणाम है, लेकिन चीन इसका हिस्सा नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका के कानूनों, विशेष रूप से ‘वुल्फ अमेंडमेंट’ जैसी सुरक्षा नीतियों के कारण नासा और चीन के बीच अंतरिक्ष सहयोग अत्यंत सीमित रहा है। इन पाबंदियों ने चीन को अपना स्वतंत्र अंतरिक्ष कार्यक्रम विकसित करने के लिए प्रेरित किया। तियांगोंग अब चीन के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम का केंद्र बिंदु है, जो उसे पृथ्वी की कक्षा में लंबी अवधि तक वैज्ञानिक अनुसंधान करने और अपने अंतरिक्ष यात्रियों को वहां सुरक्षित रखने की क्षमता प्रदान करता है। हालांकि आकार में ISS काफी विशाल है, लेकिन तियांगोंग भी अपनी उन्नत तकनीकों और जीव विज्ञान से लेकर पदार्थ विज्ञान तक के प्रयोगों के लिए वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुका है।

https://hindi.news18.com/world/china-tiangong-space-station-rice-harvest-second-generation-experiment-400-km-above-earth-10921119.html