झारखंड की पारंपरिक मिठाई देहरी: घर पर चावल और गुड़ से तैयार करें यह लाजवाब स्वाद

झारखंड के देवघर सहित पूरे प्रदेश में लोकप्रिय पारंपरिक मिठाई 'देहरी' को चावल, गुड़ और दही के मिश्रण से आसानी से घर पर बनाया जा सकता है। यह न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि लंबे समय तक खराब भी नहीं होती।

झारखंड का पारंपरिक मिठास भरा व्यंजन

झारखंड की संस्कृति और खानपान में पारंपरिक पकवानों का एक विशेष स्थान है। जब भी घर में कुछ खास मीठा बनाने की बात होती है, तो यहां के गांवों की पारंपरिक मिठाइयां सबसे पहले याद आती हैं। ऐसी ही एक शानदार मिठाई है 'देहरी', जो विशेष रूप से देवघर और आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक लोकप्रिय है। यह मिठाई न केवल स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि इसे बनाना भी काफी सरल है। किसी भी शुभ अवसर, तीज-त्योहार या शादी-ब्याह के मौके पर झारखंड के अनेक घरों में देहरी बनाने की परंपरा आज भी जीवंत है। इस मिठाई की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बनाने के लिए आपको बाजार से कोई महंगी सामग्री खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। आपके घर की रसोई में मौजूद बुनियादी चीजों से ही आप इस लाजवाब मिठाई को तैयार कर सकते हैं। पुराने समय में जब बाजार में आज जैसी मिठाइयों की भरमार नहीं थी, तब घर की महिलाएं अपनी कुशलता से देहरी तैयार करती थीं। आज भी कई स्थानों पर इसे देवी-देवताओं को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। देहरी बाहर से कुरकुरी और अंदर से बेहद नरम होती है, जिसे बच्चे और बुजुर्ग समान रूप से चाव से खाते हैं।

देहरी बनाने के लिए जरूरी सामग्री

देहरी को बनाने की प्रक्रिया बहुत ही सीधी है और इसके लिए बहुत कम सामान की जरूरत होती है। सबसे पहले आपको अच्छी गुणवत्ता वाले चावल की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही आपको दही, घी, थोड़ा इलायची पाउडर, गुड़ और स्वाद के अनुसार थोड़ी चीनी की जरूरत होगी। तलने के लिए आप अपनी पसंद के अनुसार घी या रिफाइंड तेल का उपयोग कर सकते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपकी देहरी देखने में और अधिक आकर्षक और सुनहरी लगे, तो आप घोल में एक चुटकी हल्दी भी मिला सकते हैं। ये सभी सामग्रियां लगभग हर भारतीय रसोई में आसानी से उपलब्ध होती हैं, इसलिए इस मिठाई को बनाने में न तो अधिक खर्च आता है और न ही किसी विशेष प्रकार की भागदौड़ करने की जरूरत पड़ती है।

देहरी बनाने की विस्तृत विधि

देहरी तैयार करने की प्रक्रिया को कुछ चरणों में विभाजित किया गया है। सबसे पहले, आपको चावल को अच्छी तरह से साफ कर लेना है। चावल को धोने के बाद उसे एक या दो घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख दें। जब चावल पूरी तरह से फूल जाए, तो उसका अतिरिक्त पानी निकाल दें। अब इस भीगे हुए चावल को मिक्सी या पारंपरिक सिलबट्टे की मदद से बिल्कुल बारीक पीस लें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि चावल का पेस्ट एकदम चिकना हो और उसमें चावल के दाने बिल्कुल भी शेष न रहें।

पिसे हुए चावल के पेस्ट में अब दही, थोड़ा सा घी और खुशबू के लिए इलायची पाउडर डालें। इन सभी चीजों को अच्छी तरह से मिलाएं और एक गाढ़ा घोल तैयार कर लें। ध्यान रहे कि घोल न तो बहुत ज्यादा पतला होना चाहिए और न ही बहुत ज्यादा गाढ़ा। इस घोल को कम से कम एक घंटे के लिए ढककर छोड़ दें, ताकि मिश्रण अच्छी तरह से सेट हो जाए।

तलने और चाशनी तैयार करने की प्रक्रिया

एक बार घोल तैयार हो जाने के बाद, एक कड़ाही में घी या तेल गरम करें। जब तेल मध्यम आंच पर गर्म हो जाए, तो कलछी की मदद से थोड़ा-थोड़ा घोल तेल में डालें। इसे धीमी से मध्यम आंच पर तब तक तलें जब तक कि दोनों तरफ से इसका रंग सुनहरा न हो जाए।

देहरी तलने के साथ-साथ दूसरी तरफ चाशनी तैयार करना भी जरूरी है। एक अलग कड़ाही में गुड़, थोड़ी सी चीनी और आवश्यकतानुसार पानी डालकर मध्यम आंच पर पकाएं। लगभग 5 मिनट तक इसे पकाते रहें ताकि गुड़ पूरी तरह से घुल जाए और चाशनी हल्की गाढ़ी हो जाए। जब चाशनी सही स्थिति में आ जाए, तो गैस की आंच धीमी कर दें और तली हुई देहरी को इसमें डाल दें। करीब 1 से 2 मिनट तक इसे धीरे-धीरे चलाएं, ताकि चाशनी की परत हर देहरी पर अच्छी तरह चढ़ जाए। इसके बाद गैस बंद कर दें और देहरी को ठंडा होने दें। ठंडा होने पर यह मिठाई खाने के लिए पूरी तरह तैयार है। सही तरीके से बनाकर इसे साफ और सूखे बर्तन में रखने से आप इसका स्वाद कई दिनों तक ले सकते हैं।

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