12वीं बायोलॉजी के बाद पशु चिकित्सक बनने का मौका: जानें कोर्स, कॉलेज और करियर की राह

अगर आपने 12वीं में बायोलॉजी विषय से पढ़ाई की है और एमबीबीएस के अलावा किसी अन्य क्षेत्र में डॉक्टर बनना चाहते हैं, तो वेटरनरी साइंस एक शानदार विकल्प है।

पशु चिकित्सा के क्षेत्र में सुनहरा करियर

आज के समय में छात्र डॉक्टर बनने के लिए केवल एमबीबीएस तक ही सीमित नहीं हैं। जो विद्यार्थी बायोलॉजी के साथ 12वीं की परीक्षा पास कर चुके हैं, उनके लिए पशु चिकित्सक यानी वेटरनरी डॉक्टर बनना एक बेहतरीन करियर विकल्प बनकर उभर रहा है। इस क्षेत्र में न केवल सरकारी नौकरियों के ढेरों अवसर उपलब्ध हैं, बल्कि निजी प्रैक्टिस शुरू करने और पालतू जानवरों के बढ़ते क्रेज के कारण कमाई के भी अच्छे विकल्प मौजूद हैं। एक अनुभवी पशु चिकित्सक सालाना 10 से 12 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।

प्रवेश प्रक्रिया और योग्यता

पशु चिकित्सक बनने की राह के बारे में जानकारी देते हुए सीधी वेटरनरी अस्पताल के डॉक्टर सलिल कुमार पाठक बताते हैं कि पहले वेटरनरी साइंस में दाखिले के लिए अलग से ऑल इंडिया प्री वेटरनरी टेस्ट आयोजित किया जाता था। हालांकि, अब इस प्रक्रिया में बदलाव आ चुका है। वर्तमान में संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश नीट-यूजी के स्कोर के आधार पर ही सुनिश्चित किया जाता है। इसके लिए शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषयों का होना अनिवार्य है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना जरूरी है।

पाठ्यक्रम की अवधि और विवरण

इस क्षेत्र में मुख्य डिग्री पाठ्यक्रम का नाम बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री है। इस पूरे कोर्स की अवधि साढ़े पांच साल निर्धारित की गई है, जिसमें पढ़ाई के साथ-साथ एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप भी शामिल है। जो छात्र आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं, वे दो वर्षीय मास्टर ऑफ वेटरनरी साइंस का विकल्प भी चुन सकते हैं। इसके अलावा पशुपालन और वेटरनरी फार्मेसी से जुड़े डिप्लोमा कोर्स भी उपलब्ध हैं। मास्टर डिग्री में प्रवेश के लिए स्नातक की डिग्री पूरी होना और विश्वविद्यालय के नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।

प्रमुख शैक्षणिक संस्थान

मध्य प्रदेश में वेटरनरी साइंस की पढ़ाई करने के लिए कई प्रतिष्ठित केंद्र मौजूद हैं। बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री की शिक्षा के लिए जबलपुर, महू और रीवा में प्रमुख कॉलेज संचालित किए जा रहे हैं। ये सभी संस्थान नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर से संबद्ध हैं। इसके अलावा, यदि कोई विद्यार्थी पशुपालन के क्षेत्र में दो वर्षीय डिप्लोमा करना चाहता है, तो इसके लिए जबलपुर, महू, रीवा, भोपाल और मुरैना में वेटरनरी पॉलिटेक्निक कॉलेज उपलब्ध हैं। छात्र अपनी रुचि और शैक्षणिक योग्यता के अनुसार डिग्री या डिप्लोमा कोर्स का चयन कर सकते हैं।

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