हिमाचल कैबिनेट विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री सुक्खू ने दी बड़ी जानकारी, तय हो गई समय-सीमा

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि सरकार के चार साल पूरे होने से पहले ही कैबिनेट में बदलाव और विस्तार कर दिया जाएगा।

कैबिनेट विस्तार पर सीएम ने दिया बड़ा बयान

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चल रही मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक नई समय-सीमा साझा की है। 18 अक्तूबर को दिल्ली दौरे से वापस लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार के चार साल का कार्यकाल पूर्ण होने से पहले ही राज्य मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल और विस्तार देखने को मिलेगा। सीएम सुक्खू ने जोर देकर कहा कि इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए अब केवल केंद्रीय हाईकमान की अंतिम मंजूरी यानी हरी झंडी का इंतजार है। जैसे ही पार्टी नेतृत्व से स्वीकृति प्राप्त होती है, मंत्रिमंडल के विस्तार को लागू कर दिया जाएगा।

लंबे समय से है अटकलें

प्रदेश में कैबिनेट विस्तार को लेकर बीते कई महीनों से कयासों का दौर जारी है। सितंबर माह में दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद से ही मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावनाएं काफी प्रबल हो गई थीं, लेकिन किन्हीं कारणों से उस समय इसे टाल दिया गया था। अब सीएम सुक्खू के इस ताजा बयान ने फिर से राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए हैं कि केवल मंत्रियों की संख्या में वृद्धि नहीं होगी, बल्कि मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव किया जाएगा।

सुंदर सिंह की दावेदारी और खाली पद

हिमाचल प्रदेश के मौजूदा मंत्रिमंडल में इस समय एक पद रिक्त है, जो पिछले करीब पौने चार साल से खाली पड़ा है। गौरतलब है कि राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि सरकार बनने के बाद से इतने लंबे समय तक कैबिनेट का कोई पद खाली रखा गया हो। कुल्लू से विधायक सुंदर सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल करने की बात मुख्यमंत्री सुक्खू पहले ही सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं। हालांकि, सुंदर सिंह का इंतजार अब तक समाप्त नहीं हो पाया है, लेकिन नई घोषणा के बाद उनके समर्थकों में उम्मीद की किरण जगी है।

क्षेत्रीय संतुलन और मंत्रिमंडल की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान क्षेत्रीय संतुलन साधना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल मंडी संसदीय क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, जबकि किन्नौर से केवल एक मंत्री ही सुक्खू कैबिनेट का हिस्सा हैं। अब देखना यह है कि दिसंबर से पहले प्रस्तावित इस बदलाव में किसे जगह मिलती है और किसे बाहर का रास्ता दिखाया जाता है, क्योंकि एक खाली पद के बावजूद मंत्रियों को ड्रॉप किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

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