कॉलेज के दिनों का सपना बना बड़ा स्टार्टअप
बिहार के मधुबनी जिले में रहने वाली तीन सहेलियों ने कॉलेज के दौरान ही एक ऐसा सपना देखा जिसे आज पूरे देश में सराहा जा रहा है। मिथिला चित्रकला संस्थान में पढ़ाई के दौरान पूर्णिमा, नायाब और साक्षी सिंह के मन में यह विचार आया कि क्यों न मिथिला पेंटिंग जैसी समृद्ध कला को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यावसायिक रूप दिया जाए। इसी सोच के साथ उन्होंने 'चित्रकार्ट' नाम के स्टार्टअप की नींव रखी। आज यही स्टार्टअप न केवल अपनी कला को दुनिया तक पहुंचा रहा है, बल्कि 50 लोगों के परिवारों का भरण-पोषण करने का जरिया भी बन गया है।
मात्र 75 हजार रुपये से हुई थी शुरुआत
किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है। जब इन तीनों दोस्तों ने अपना सफर शुरू करने का फैसला लिया, तो उनके पास बहुत अधिक धन नहीं था। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपने दोस्तों से पैसे उधार लेकर कुल 75 हजार रुपये जुटाए। यह निवेश बराबर-बराबर यानी 25-25 हजार रुपये के रूप में तीनों दोस्तों ने किया था। 2025 में उन्होंने एक छोटी सी दुकान से 'चित्रकार्ट' की शुरुआत की। उस समय उनके पास मिथिला पेंटिंग से जुड़े केवल 10 से 12 उत्पाद ही उपलब्ध थे। हालांकि, उनकी मेहनत का असर महज दो दिनों में ही दिखने लगा, जब उन्होंने 30 हजार रुपये की बिक्री कर ली।
50 लाख का टर्नओवर और व्यापार का विस्तार
शुरुआती सफलता ने तीनों दोस्तों का उत्साह दोगुना कर दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और पूरे जोश के साथ अपने ब्रांड को आगे बढ़ाया। महज दो साल के भीतर ही 'चित्रकार्ट' का टर्नओवर 50 लाख रुपये के प्रभावशाली आंकड़े तक पहुंच गया है। आज यह स्टार्टअप न केवल मधुबनी पेंटिंग के लिए मशहूर है, बल्कि एक ऐसा मंच बन गया है जहां बिहार की हस्तनिर्मित यानी हैंडमेड वस्तुएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। इनका व्यापार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से तेजी से बढ़ रहा है।
50 कलाकारों को मिला रोजगार
चित्रकार्ट की सफलता की सबसे बड़ी उपलब्धि सामाजिक स्तर पर इसका प्रभाव है। वर्तमान में इस स्टार्टअप के साथ 50 कलाकार जुड़े हुए हैं। इन कलाकारों को प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये के बीच वेतन प्रदान किया जाता है। दरभंगा में इनके पास एक स्टोर है, साथ ही मिथिला हाट में भी इनके दो स्टोर संचालित हैं, जहां से बिक्री का अच्छा आंकड़ा प्राप्त होता है। इसके अलावा, ये विभिन्न प्रदर्शनियों में भी भाग लेते हैं। नियमित बिक्री और प्रदर्शनियों से ये हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपये तक की कमाई कर लेते हैं।
भविष्य की योजनाएं
अपनी इस यात्रा के बारे में बात करते हुए संस्थापक बताती हैं कि शुरुआत में उनका उद्देश्य केवल कुछ पैसे कमाना और अपना नाम बनाना था, लेकिन आज उनका दृष्टिकोण काफी व्यापक हो गया है। पहले साल की सफलता के बाद दूसरे साल में उन्होंने और भी ज्यादा तरक्की की है। आने वाले समय में उनकी योजना बिहार की कलाओं को ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की पारंपरिक कलाकृतियों को एक ही प्लेटफार्म पर लाने की है। उनका सपना है कि 'चित्रकार्ट' भारतीय कला का एक बड़ा केंद्र बने, जिससे देश भर के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने और कमाई करने का अवसर मिल सके।
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