Aaj Ka Mausam: अगले 7 दिनों तक झमाझम बारिश, 50 KMPH की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, IMD ने जारी किया अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दक्षिण भारत के राज्यों के लिए सात दिनों के भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

देशभर में मौसम का बदला मिजाज

भारत में मौसम का मिजाज तेजी से करवट ले रहा है। उत्तर भारत के पर्वतीय अंचलों में हुई ताजा बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों में भी साफ महसूस किया जाने लगा है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हवाओं में ठंडक घुल गई है, जिससे लोगों को हल्की गुलाबी ठंड का एहसास होने लगा है। वहीं दूसरी ओर, मौसम विभाग यानी IMD ने दक्षिण भारत के लिए चेतावनी जारी की है कि अगले 7 दिनों तक वहां बारिश का दौर जारी रहेगा।

दक्षिण भारत में भारी बारिश की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण भारत के अधिकांश इलाकों में अगले सात दिनों तक बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। विभाग ने साफ किया है कि कुछ विशेष क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान हवाओं की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। गोवा, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में पिछले कुछ घंटों में 12 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कई जिलों में भी भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है।

किन राज्यों में कब होगी बारिश

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, 23 अक्टूबर तक तटीय कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कई स्थानों पर रुक-रुक कर बारिश होने का अनुमान है। इसके साथ ही तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा के क्षेत्रों में 18 अक्टूबर को व्यापक स्तर पर वर्षा हो सकती है। इन क्षेत्रों में न केवल भारी बारिश, बल्कि गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने का भी खतरा बना हुआ है।

बीते 24 घंटों का मौसम आंकड़ा

IMD द्वारा 17 अक्टूबर को सुबह 8:30 बजे तक दर्ज किए गए पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर गौर करें, तो गोवा, तमिलनाडु और केरल में बहुत भारी बारिश हुई है। इन इलाकों में 12 से 20 सेंटीमीटर के बीच वर्षा दर्ज की गई। साथ ही तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 7 से 11 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से अधिक है।

आगामी दिनों का विस्तृत पूर्वानुमान

आने वाले दिनों के लिए मौसम विभाग ने विशेष अलर्ट जारी किए हैं:

  • तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 18-19 अक्टूबर तथा 21-23 अक्टूबर के बीच भारी बारिश की संभावना है। 20 अक्टूबर को इन क्षेत्रों में बहुत भारी बारिश हो सकती है।
  • केरल और माहे में 18 से 23 अक्टूबर तक भारी बारिश का दौर बने रहने का अनुमान है।
  • तटीय कर्नाटक में 20 से 22 अक्टूबर तक भारी वर्षा होगी।
  • दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 18 से 23 अक्टूबर तक और उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 18 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
  • तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में 18 से 21 अक्टूबर के बीच भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।

तूफानी हवाओं और बिजली गिरने का खतरा

मौसम विभाग ने सलाह दी है कि लोग स्थानीय चेतावनी पर विशेष ध्यान दें और जलभराव वाले इलाकों में सतर्कता बरतें। केरल, माहे और लक्षद्वीप में गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है, जिनके झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भी 18 अक्टूबर को ऐसी ही चुनौतीपूर्ण मौसमी स्थितियां बन सकती हैं। वहीं, कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों में 21 अक्टूबर तक 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है, जिसके झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकते हैं।

पश्चिम भारत और महाराष्ट्र का हाल

मौसम का असर पश्चिम भारत में भी देखने को मिलेगा। गोवा, कोंकण और मराठवाड़ा में 19 अक्टूबर तक गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। मध्य महाराष्ट्र में 20 अक्टूबर तक ऐसी ही गतिविधियां जारी रह सकती हैं। कोंकण क्षेत्र में 18 अक्टूबर को गर्मी और उमस भरे मौसम का सामना भी करना पड़ सकता है।

पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण का असर

मौसम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर हरियाणा और उसके आसपास के क्षेत्रों में निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर एक पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के रूप में सक्रिय है। इसी तरह, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान, दक्षिण-पश्चिमी मध्य प्रदेश और उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पास भी चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। उत्तर तमिलनाडु और तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर भी चक्रवाती परिसंचरण की स्थिति है। बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से तक एक टर्फ लाइन और अरब सागर में कर्नाटक तट से कोमोरिन तक एक अन्य टर्फ लाइन बनी हुई है। इन सभी मौसमी प्रणालियों के सम्मिलित प्रभाव से दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

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