ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी, एनआईए की तीसरी चार्जशीट से खुला बड़ा नेटवर्क

एनआईए ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियार और ड्रग्स तस्करी करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ जयपुर की अदालत में तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। यह गैंग ड्रोन की मदद से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में अवैध सामान भेज रहा था।

सीमा पार से हो रही साजिश का खुलासा

राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले एक खतरनाक गिरोह के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस सिलसिले में एजेंसी ने 17 अक्टूबर 2026 को जयपुर की एनआईए विशेष अदालत में तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। एनआईए की विस्तृत जांच में यह बात सामने आई है कि उत्तर भारत के राज्यों को निशाना बनाने के लिए एक बहुत ही संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था, जिसके तार सीधे सीमा के उस पार बैठे आकाओं से जुड़े हुए थे।

ड्रोन का इस्तेमाल और सप्लाई का नेटवर्क

जांच में खुलासा हुआ है कि ये तस्कर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए बेहद आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे थे। तस्करों का गिरोह सीमा पार से ड्रोन के जरिए भारी मात्रा में विदेशी हथियार, गोला-बारूद और बड़ी खेप में हेरोइन भारतीय सीमा में गिरा रहा था। जैसे ही आसमान से यह सामग्री भारतीय क्षेत्र में गिरती, सीमा के अंदर पहले से सक्रिय उनके गुर्गे तुरंत मुस्तैदी से उस खेप को इकट्ठा कर लेते थे। इसके बाद, इन हथियारों और नशीले पदार्थों को राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के विभिन्न हिस्सों में फैला दिया जाता था। एनआईए ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि ये तीन राज्य तस्करों के मुख्य केंद्र बिंदु थे।

चार्जशीट में दो नए आरोपियों के नाम

जयपुर स्थित एनआईए की अदालत में पेश की गई इस तीसरी चार्जशीट में दो नए आरोपियों, सत्यनारायण मेघवाल और साहिल गोदारा को नामजद किया गया है। इन दोनों को एजेंसी ने बीते जुलाई महीने में गिरफ्तार किया था। एनआईए ने इन दोनों के खिलाफ यूएपीए (UAPA), आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न कठोर धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। इतना ही नहीं, एजेंसी ने इस मामले में पहले से शामिल छह अन्य आरोपियों के खिलाफ भी यूएपीए की अतिरिक्त धाराएं जोड़ी हैं। गौरतलब है कि एनआईए इस हाई-प्रोफाइल मामले में इससे पहले 14 अगस्त 2025 और 5 फरवरी 2026 को दो अलग-अलग चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

युवाओं को नशे की लत और अराजकता फैलाने की साजिश

एनआईए की पड़ताल में केवल तस्करी का नेटवर्क ही सामने नहीं आया, बल्कि इसके पीछे के नापाक मंसूबे भी बेनकाब हुए हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि इस सिंडिकेट का एकमात्र उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ कमाना नहीं था। इसके पीछे की असली साजिश भारत के युवाओं को नशे के दलदल में धकेलकर उन्हें खोखला करना था। साथ ही, ड्रग्स की तस्करी से होने वाली कमाई का इस्तेमाल देश में अशांति और अराजकता फैलाने के लिए किया जा रहा था।

हाई-टेक तरीके और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का उपयोग

अपनी अवैध गतिविधियों को सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से छिपाने के लिए ये तस्कर पूरी तरह से हाई-टेक तकनीकों का सहारा ले रहे थे। एनआईए के अनुसार, आपस में संपर्क करने और साजिश को अंजाम देने के लिए ये लोग एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते थे ताकि किसी भी डिजिटल सुराग का पता न चल सके। हालांकि, एनआईए की तकनीकी शाखा ने उनके हर डिजिटल पदचिह्न को डिकोड कर लिया है। फिलहाल, जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने और इस सिंडिकेट के हर एक मोहरे को गिरफ्तार करने के लिए गहन छानबीन कर रही है।

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