सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल
मध्य प्रदेश के हरदा जिले में विजयादशमी का त्योहार सांप्रदायिक सद्भाव की एक बेहतरीन कहानी लेकर आया है। शहर में होने वाले रावण दहन के मुख्य आयोजन के लिए इस बार भी स्थानीय नेहरू स्टेडियम में 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि इस पुतले को तैयार करने की जिम्मेदारी शहर के खेड़ीपुरा मोहल्ले में रहने वाले शेख जहूर खान और शेख सत्तार खान के परिवार ने उठाई है।
तीन पीढ़ियों से जारी परंपरा
यह कोई पहली बार नहीं है जब यह मुस्लिम परिवार रावण का पुतला बना रहा है। खान परिवार पिछले कई दशकों से इस परंपरा को निभाता आ रहा है। वर्तमान में इस काम में परिवार की दूसरी और तीसरी पीढ़ी के सदस्य भी कंधे से कंधा मिलाकर जुटे हुए हैं। पीढ़ियों से चला आ रहा यह सिलसिला इस बात का गवाह है कि कला और आस्था के मामले में धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत और भाईचारा कायम है।
कैसे तैयार हो रहा है 51 फीट का पुतला
रावण के विशालकाय पुतले को आकार देने के लिए परिवार के सदस्य पिछले 8 दिनों से दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। पुतले को मजबूती और सही ढांचा देने के लिए वैज्ञानिक और पारंपरिक सामग्रियों का मिश्रण किया गया है। निर्माण प्रक्रिया के बारे में बताते हुए परिवार के सदस्यों ने जानकारी दी कि इसमें मुख्य रूप से इन चीजों का उपयोग किया जा रहा है:
- बांस की मजबूत खपच्चियां
- धातु के बने सांचे
- अमाड़ी के पौधों से तैयार की गई विशेष रस्सियां
नगर पालिका द्वारा आयोजित इस मुख्य कार्यक्रम में रावण का पुतला आकर्षण का केंद्र रहता है, जिसे तैयार करने में खान परिवार की मेहनत हर साल रंग लाती है।
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