फरीदाबाद: मंदिरों से निकले फूलों से अब बन रहे अगरबत्ती और खाद, जर्मनी से पहुंचे विशेषज्ञ

फरीदाबाद में नगर निगम और विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन ने मंदिरों के कचरे के प्रबंधन के लिए एक अनूठी पहल शुरू की है। इस मॉडल को समझने के लिए जर्मनी से 11 सदस्यों का एक दल फरीदाबाद पहुंचा है।

फूलों के कचरे का हो रहा बेहतर प्रबंधन

फरीदाबाद में धार्मिक स्थलों से निकलने वाले फूलों के कचरे को अब बेकार नहीं समझा जाएगा। शहर के विभिन्न मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों का सही उपयोग करने के लिए एक विशेष मुहिम चलाई जा रही है। इस काम में नगर निगम और विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन ने मिलकर जिम्मेदारी उठाई है। अब मंदिरों से निकलने वाले इन फूलों को फेंकने के बजाय उनसे अगरबत्ती, हवन सामग्री, जैविक खाद और गुलाल तैयार किया जा रहा है।

सात महीनों का बड़ा आंकड़ा

इस परियोजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 7 महीनों में शहर के 15 मंदिरों से 20 टन से ज्यादा पूजन सामग्री का संग्रहण किया गया है। यह वह सामग्री है जो पहले सीधे कचरे में जाकर प्रदूषण का कारण बनती थी, लेकिन अब इसे पुनर्चक्रण के जरिए उपयोगी वस्तुओं में बदल दिया गया है।

जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने किया दौरा

इस अनूठी पहल ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में जर्मनी से आए 11 अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल फरीदाबाद पहुंचा। इस दल ने वहां के काम को करीब से देखा और कचरा प्रबंधन की इस तकनीक को समझने का प्रयास किया।

क्या कहते हैं फाउंडेशन के अध्यक्ष

विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के अध्यक्ष एसएस बांगा का मानना है कि आस्था के इन फूलों को नदियों, नालों या कचरे के ढेर में फेंकना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि इन फूलों का उपयोग करके न केवल कचरे की समस्या को कम किया जा सकता है, बल्कि कई तरह के उपयोगी उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा फूलों के बाद जो सामग्री शेष बचती है, उससे उच्च गुणवत्ता वाली खाद का निर्माण भी किया जाता है, जो पर्यावरण के लिए काफी लाभदायक साबित हो रही है।

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