डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- G-20 में व्लादिमीर पुतिन का स्वागत करने को तैयार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी-20 शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आने पर स्वागत करने की बात कही है, जिससे रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

जी-20 में पुतिन के स्वागत के लिए तैयार ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस वक्त सवाल यह उठ रहा है कि क्या ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर अमेरिकी नीतियों को पूरी तरह से बदल रहे हैं या फिर उनका नजरिया पूरी तरह से अलग है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपने संबंधों को लेकर ट्रंप का रुख काफी स्पष्ट और नरम नजर आ रहा है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि वह जी-20 शिखर सम्मेलन में पुतिन का स्वागत करने के लिए तैयार हैं, यदि वे इसमें शामिल होने का निर्णय लेते हैं।

रूसी भागीदारी पर ट्रंप का सकारात्मक रुख

व्हाइट हाउस में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान जब ट्रंप से यह पूछा गया कि क्या व्लादिमीर पुतिन आगामी जी-20 सम्मेलनों में हिस्सा लेंगे, तो उन्होंने बताया कि रूस ने इस समूह की बैठकों में अपनी भागीदारी की इच्छा जाहिर की है। हालांकि, अभी यह निश्चित नहीं है कि रूसी राष्ट्रपति खुद इस शिखर सम्मेलन में उपस्थित होंगे या रूस की ओर से किसी अन्य प्रतिनिधि को भेजा जाएगा। ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि अगर पुतिन आते हैं, तो उन्हें उनका स्वागत करने में खुशी होगी। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रूस के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है।

अमेरिका करेगा जी-20 की मेजबानी

वर्ष 2026 में अमेरिका जी-20 समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इस श्रृंखला के तहत महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 30 और 31 अक्टूबर को जॉर्जिया के अटलांटा शहर में सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेंगे। इसके बाद, शिखर सम्मेलन का मुख्य आयोजन 14 और 15 दिसंबर को फ्लोरिडा के मियामी स्थित ट्रंप नेशनल डोराल में होगा। इस आयोजन में दुनिया के शक्तिशाली देशों के प्रमुखों के शामिल होने की पूरी उम्मीद है। ज्ञात हो कि रूस और भारत दोनों ही इस समूह के अहम सदस्य हैं और भारत ने इससे पहले सितंबर 2023 में नई दिल्ली में इस सम्मेलन की सफल मेजबानी की थी।

रूस और चीन के साथ परमाणु समझौते की महत्वाकांक्षा

ट्रंप ने केवल पुतिन के स्वागत की बात ही नहीं की, बल्कि उन्होंने रूस और चीन के साथ एक बड़े परमाणु समझौते की ओर इशारा भी किया है। उन्होंने इच्छा जताई है कि वह इन देशों के साथ मिलकर परमाणु हथियारों के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए किसी संधि पर काम करना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने वास्तविकता को स्वीकार करते हुए यह भी कहा कि इस वर्ष ऐसा कोई बड़ा समझौता हो पाना थोड़ा मुश्किल लगता है। इसके बावजूद, उनका यह बयान यह स्पष्ट करता है कि अमेरिका परमाणु सुरक्षा के वैश्विक मुद्दों पर रूस और चीन के साथ संवाद जारी रखने का इच्छुक है।

युद्ध को समाप्त करना पहली प्राथमिकता

जब पत्रकारों ने ट्रंप से रूस-यूक्रेन युद्ध और व्लादिमीर पुतिन की भूमिका को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी है और वह उचित समय पर इसे लेकर अपनी बात रखेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संघर्ष को समाप्त करना ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ट्रंप ने दावा किया कि इस युद्ध के कारण भारी जान-माल का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस संघर्ष में हर महीने औसतन करीब 25 हजार सैनिक मारे जा रहे हैं, जबकि पिछले महीने यह आंकड़ा बढ़कर 32 हजार तक पहुंच गया था। इसके अलावा, यूक्रेन द्वारा स्टारशील्ड तकनीक पर प्रतिबंध लगाए जाने के दावों को नकारते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है।

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