यमुना एक्सप्रेस-वे पर बंदरों का बढ़ा आतंक, हमले के डर से टोल छोड़कर भाग रहे कर्मचारी

ग्रेटर नोएडा से आगरा तक फैले 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेस-वे पर बंदरों का जमावड़ा यात्रियों और टोल कर्मियों के लिए गंभीर खतरा बन गया है। वन विभाग को शिकायत के बावजूद ढाई महीने से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

यमुना एक्सप्रेस-वे पर मंडराया जानलेवा खतरा

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को मथुरा तथा आगरा से जोड़ने वाले यमुना एक्सप्रेस-वे पर इन दिनों यात्रियों और कर्मचारियों के लिए एक नई और अनोखी मुसीबत खड़ी हो गई है। ग्रेटर नोएडा से लेकर आगरा तक फैले इस व्यस्त मार्ग पर बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति इस हद तक बिगड़ चुकी है कि टोल प्लाजा पर तैनात कर्मचारी बंदरों के झुंड को देखते ही अपनी सीटें छोड़कर जान बचाने के लिए भाग खड़े होते हैं। इस मार्ग से रोजाना हजारों तेज रफ्तार वाहन गुजरते हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका हर समय बनी रहती है।

अचानक वाहनों के सामने आ जाते हैं बंदरों के झुंड

यमुना एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई लगभग 165 किलोमीटर है। इस एक्सप्रेस-वे पर वाहन बेहद तेज गति से चलते हैं, जिससे दिल्ली से आगरा का सफर महज कुछ घंटों में पूरा हो जाता है। हालांकि, अब इस मार्ग पर सफर करना जोखिम भरा साबित हो रहा है। बंदरों का झुंड अचानक एक्सप्रेस-वे की लेन या टोल बूथ के पास आ धमकता है। तेज रफ्तार में जा रही गाड़ी के सामने अचानक किसी जानवर के आ जाने पर चालक को आपातकालीन ब्रेक लगाने पड़ते हैं या वाहन मोड़ना पड़ता है। इससे पीछे से आ रही गाड़ियों की भिड़ंत होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

छह महीने पहले अज्ञात वाहन से छोड़े गए थे बंदर

एक्सप्रेस-वे पर बंदरों की इस भारी मौजूदगी के पीछे छह महीने पुरानी एक घटना बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग छह महीने पहले किसी अज्ञात वाहन के माध्यम से बंदरों को यहां लाकर छोड़ दिया गया था। इसके बाद से ही बंदरों ने इस पूरे इलाके में अपना डेरा जमा लिया। समस्या को देखते हुए टोल प्रबंधन ने कदम उठाया था। टोल अथॉरिटी ने बीते 25 जुलाई को वन प्राणी प्रबंधक से औपचारिक शिकायत की थी और बंदरों को जल्द से जल्द पकड़ने के लिए सहायता मांगी थी। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बरती गई और बंदरों को हटाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

टोल इंचार्ज तुलसीराम गुर्जर ने जाहिर की कड़ी नाराजगी

प्रशासनिक उदासीनता के कारण उत्पन्न हुए इन हालात पर टोल इंचार्ज तुलसीराम गुर्जर ने गहरा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई महीने से अधिक समय से बंदरों का यह झुंड लगातार क्षेत्र में उत्पात मचा रहा है। बंदर बार-बार टोल क्षेत्र में आते हैं और वहां मौजूद लोगों पर हमला कर देते हैं। तुलसीराम गुर्जर के अनुसार, अब तक बंदरों के हमले की 13 से 14 बार से ज्यादा घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें कई टोल कर्मचारी घायल भी हुए हैं।

फील्ड हॉस्टल के बाहर भी बना हुआ है खौफ का माहौल

समस्या सिर्फ टोल बूथ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के आवास तक पहुंच चुकी है। टोल इंचार्ज ने बताया कि बंदरों का झुंड कर्मचारियों के फील्ड हॉस्टल के बाहर भी लगातार मंडराता रहता है। इस खौफ के चलते कर्मचारी अपनी पाली की ड्यूटी के लिए हॉस्टल से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम न होने से कर्मचारियों में भारी रोष है और एक्सप्रेस-वे से गुजरने वाले वाहन चालक भी सहमे हुए हैं।

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