दिल्ली मार्च के बाद कानूनी पेंच
दिल्ली में आयोजित तिरंगा मार्च के उपरांत एक बड़ा सवाल राजनीतिक और कानूनी गलियारों में तैर रहा है। वर्तमान में आईसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को रिहाई मिल चुकी है, लेकिन सीपीजे के संस्थापक अभिजीत दीपके अभी भी कानून के दायरे में हैं और उनकी गिरफ्तारी के बाद की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
पुराने घटनाक्रम से जुड़ा है मामला
इस मामले का एक दिलचस्प पहलू यह है कि अभिजीत दीपके को पूर्व में भी आशुतोष रांका और सौरव दास के साथ हिरासत में लिया गया था। उस दौरान कानूनी प्रक्रिया के तहत एक बॉन्ड भरवाकर उन्हें छोड़ दिया गया था। हालांकि, उस घटना के कुछ ही समय बाद आशुतोष और सौरव को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। यह इतिहास अब दीपके के समर्थकों और उनके कानूनी सहयोगियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
न्यायालय में पेशी और भविष्य की राह
फिलहाल अभिजीत दीपके को एसईएम अदालत में पेश किया जाना है। अब हर किसी के मन में यह सवाल है कि क्या इस बार उन्हें कानूनी राहत मिलेगी या फिर उन्हें भी अपने साथियों की तरह जेल की हवा खानी पड़ेगी। क्या दीपके को रिहाई के बाद फिर से गिरफ्तारी और जेल जाने की प्रक्रिया का सामना करना होगा, यह तो आने वाले समय में स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल उनकी स्थिति पर गहरा संशय बरकरार है।
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