बाजार में दस्तक देने के लिए तैयार है जियो का बड़ा आईपीओ
जियो प्लेटफॉर्म्स का बहुप्रतीक्षित आईपीओ अगले सप्ताह शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के लिए पूरी तरह तैयार है। 21 अक्टूबर को यह आईपीओ बाजार में दस्तक देगा, जिसके बाद निवेशकों की निगाहें इस पर टिकी हैं। बाजार में इस आईपीओ के आने से पहले ही ब्रोकरेज हाउस और मार्केट एक्सपर्ट्स ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कई प्रतिष्ठित ब्रोकरेज फर्मों ने इस आईपीओ को खरीदने की सलाह दी है और विशेषज्ञों का अनुमान है कि लिस्टिंग के दिन ही निवेशकों को 15 से 20 प्रतिशत तक का शानदार रिटर्न मिल सकता है। ग्रे मार्केट में भी उत्साह का माहौल है, जहां जीएमपी यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम 84 प्रतिशत के स्तर को पार कर गया है।
ब्रोकरेज हाउस की क्या है राय
16 अक्टूबर को जारी अपनी एक विशेष आईपीओ नोट में एमके रिसर्च ने जियो के इस आईपीओ को सब्सक्राइब रेटिंग प्रदान की है। ब्रोकरेज फर्म का स्पष्ट मानना है कि कंपनी की बाजार में मजबूत पकड़, अपनी कीमतों को निर्धारित करने की ताकत और भविष्य की विकास योजनाओं को देखते हुए, कंपनी का मौजूदा प्राइस बैंड पूरी तरह से वाजिब और आकर्षक है। इसके साथ ही, स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट ने भी निवेशकों को इस आईपीओ को सब्सक्राइब करने का सुझाव दिया है। उनकी रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की अनुमानित कमाई के आधार पर जियो का प्राइस टू अर्निंग रेशियो यानी P/E लगभग 33.3 गुना है। वहीं, भारती एयरटेल का इसी आधार पर P/E 40.7 गुना के आसपास है। इस तुलनात्मक मूल्यांकन के आधार पर, स्वास्तिका की रिपोर्ट जियो को एयरटेल की तुलना में करीब 18 प्रतिशत सस्ता मान रही है।
सस्ता और आकर्षक मूल्यांकन
बाजार के कुछ अन्य विशेषज्ञ अलग-अलग मानकों पर मूल्यांकन कर रहे हैं। इन विशेषज्ञों का आकलन है कि यदि जियो की कीमत को उसकी कमाई के 33.5 गुना और भारती एयरटेल की कीमत को 38.9 गुना माना जाए, तो भी जियो का शेयर भारती एयरटेल के मुकाबले लगभग 14 प्रतिशत कम कीमत पर उपलब्ध है। हालांकि, विश्लेषकों का यह भी कहना है कि कंपनी की भविष्य की संभावित ग्रोथ का असर मौजूदा कीमत में पहले ही शामिल किया जा चुका है। एक बड़ी राहत की बात यह है कि जियो का 5G नेटवर्क खड़ा करने के लिए किया गया भारी निवेश अब एक सुरक्षित और परिपक्व चरण में पहुंच गया है। एमके रिसर्च के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के बीच कंपनी का पूंजीगत व्यय रेवेन्यू के 48.8 प्रतिशत से गिरकर 23.3 प्रतिशत पर आ गया है। कंपनी का फ्री कैश फ्लो भी वित्त वर्ष 2026 में 32,500 करोड़ रुपये रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब अतिरिक्त बड़े निवेश की आवश्यकता घटने से कंपनी के पास नकदी का प्रवाह बेहतर बना रहेगा।
दीर्घकालिक विकास के लिए मजबूत आधार
बाजार के जानकार केवल मोबाइल कनेक्टिविटी के आधार पर ही जियो का मूल्यांकन नहीं कर रहे हैं। कंपनी के भविष्य के विकास के लिए होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सेवाएं, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जैसे क्षेत्र बड़े ग्रोथ ड्राइवर के रूप में देखे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कंपनी अपनी इन-हाउस तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ले जाने की भी तैयारी कर रही है। एमके रिसर्च ने भी होम ब्रॉडबैंड को अगली बड़ी सफलता के रूप में चिह्नित किया है। जियो की इस स्वतंत्र लिस्टिंग का प्रभाव रिलायंस इंडस्ट्रीज यानी RIL पर भी देखने को मिल रहा है। 15 अक्टूबर को जियो का प्राइस बैंड सामने आने के बाद RIL के शेयरों में लगभग 3.4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। बाजार के विश्लेषक इस बात पर भी गौर कर रहे हैं कि जियो की यह स्वतंत्र लिस्टिंग रिलायंस के मौजूदा शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉकिंग का एक बड़ा अवसर साबित हो सकती है।
ग्रे मार्केट में निवेशकों का भारी उत्साह
ग्रे मार्केट में निवेशकों के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स के स्टॉक्स को लेकर गजब की दीवानगी देखने को मिल रही है। पिछले दो सप्ताह के भीतर ही ग्रे मार्केट प्रीमियम में 84 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है। 16 अक्टूबर के आंकड़ों के अनुसार, जीएमपी बढ़कर 230 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। यदि हम 2 अक्टूबर की बात करें, तो यही प्रीमियम केवल 125 रुपये था। जियो प्लेटफॉर्म्स का वैल्यूएशन 10 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक आंका गया है। इसका सीधा असर रिलायंस समूह पर पड़ा है, जिसका कुल बाजार वैल्यूएशन अब 28.3 लाख करोड़ रुपये हो चुका है। इन आंकड़ों के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज अब देश की सबसे अधिक वैल्यूएशन वाली कंपनी का खिताब अपने नाम कर चुकी है।
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