संघर्ष और दृढ़ निश्चय की कहानी
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुश नगर के रहने वाले आकाश बाजपेई ने अपनी मेहनत और अटूट संकल्प के दम पर नीट (NEET) जैसी कठिन परीक्षा को उत्तीर्ण कर लिया है। आज वह सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के छात्र के रूप में अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। आकाश की यह यात्रा जितनी प्रेरणादायक है, उतनी ही भावुक भी है, क्योंकि उन्होंने कई व्यक्तिगत दुखों और विफलताओं का सामना करते हुए अपने दादा और मां के अधूरे सपनों को पूरा किया है।
दादा और मां का सपना
आकाश बताते हैं कि उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य डॉक्टर बनना था, जो उनके दादा और मां की दिली इच्छा थी। उनके परिवार में उनकी मां का सपना था कि बेटा बड़ा होकर एक अच्छा अफसर या डॉक्टर बने, लेकिन साल 2016 में उनके निधन ने परिवार को गहरा धक्का दिया। इसके अलावा, आकाश के दादा पेशे से एक आयुर्वेदिक चिकित्सक थे। बचपन से ही अपने दादा को लोगों का इलाज करते देख आकाश के मन में चिकित्सा क्षेत्र के प्रति लगाव पैदा हुआ। कोविड-19 के दौर में उनकी रुचि नीट परीक्षा की ओर अधिक बढ़ी और उन्होंने डॉक्टर बनने का पक्का इरादा कर लिया।
दो बार की असफलता और कोटा का सफर
आकाश ने अपनी स्कूली शिक्षा कक्षा 10वीं तक लवकुश नगर में पूरी की। इसके बाद, बेहतर तैयारी के लिए वह कक्षा 11वीं और 12वीं की पढ़ाई करने के लिए राजस्थान के कोटा चले गए। हालांकि, सफलता का सफर आसान नहीं था। उन्हें पहली बार में नीट परीक्षा में निराशा हाथ लगी। इसके बाद साल 2025 में उन्होंने दूसरी बार प्रयास किया, लेकिन कुछ अंकों के अंतर से वह सफलता से चूक गए। लगातार दो बार असफल होने के बाद आकाश के मन में हताशा आना स्वाभाविक था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्हें हर हाल में सरकारी मेडिकल कॉलेज से ही एमबीबीएस करना था।
तीसरे प्रयास में मिली सफलता
दृढ़ निश्चय के साथ आकाश तीसरी बार तैयारी में जुट गए और साल 2026 में उन्होंने अपना तीसरा प्रयास दिया। हालांकि, इस दौरान भी उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 3 मई 2026 को आयोजित नीट पेपर के रद्द हो जाने से वे काफी निराश हुए थे। उस मुश्किल घड़ी में उनके पिता ने उन्हें हिम्मत बंधाई और उन पर पूरा भरोसा जताया कि उनका चयन जरूर होगा। इसके बाद 21 जून 2026 को परीक्षा दोबारा आयोजित की गई, जिसमें आकाश ने बेहतर प्रदर्शन किया।
खुशी के बीच गम का साया
आकाश की सफलता का दिन उनके लिए मिला-जुला अहसास लेकर आया। जिस दिन उन्होंने परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया, उसी दिन दुर्भाग्यवश उनके दादा की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। 25 जून 2026 को उनके दादा का निधन हो गया। जब एक महीने बाद नीट का परिणाम आया, तो आकाश को डॉक्टर बनने की खुशी तो हुई, लेकिन उसे साझा करने के लिए उनके दादा उनके पास नहीं थे। आकाश का कहना है कि उनकी मां के जाने के बाद उनके दादा, दादी, पिता और दीदी ने उनकी परवरिश की और उन्हें कभी मां की कमी महसूस नहीं होने दी।
मेडिकल कॉलेज में एडमिशन
आकाश ने नीट यूजी परीक्षा में कुल 720 अंकों में से 529 अंक हासिल किए। इस शानदार उपलब्धि के चलते उन्हें मध्य प्रदेश के सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिला मिला है। आकाश के पिता विनोद बाजपेई सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने अपने बेटे के सपनों को पूरा करने में हर संभव सहयोग दिया है। आज आकाश अपनी मेहनत के दम पर अपने परिवार और विशेष रूप से अपने स्वर्गीय दादा व मां के सपने को साकार करते हुए चिकित्सा के क्षेत्र में अपने करियर की ओर बढ़ चुके हैं।
https://hindi.news18.com/news/career/education-akash-bajpai-neet-ug-third-attempt-529-marks-singrauli-medical-college-mbbs-local18-10914215.html